गोरखपुर यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के लिए अच्छी खबर:अब बहुत जल्द आपदा में जान बचाने का गुर सीखेंगे स्टूडेंट्स, राज्य आपदा प्राधिकरण के साथ DDUGU का हुआ समझौता

गोरखपुर4 महीने पहले
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दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्राधिकरण के बीच प्रशासनिक भवन के कमेटी हाल में समझौता। - Dainik Bhaskar
दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्राधिकरण के बीच प्रशासनिक भवन के कमेटी हाल में समझौता।

उत्तर प्रदेश की गोरखपुर यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स अब बहुत जल्द आपदा में जान बचाने का गुर सीखेंगे। इसके लिए सोमवार को ​दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्राधिकरण के बीच प्रशासनिक भवन के कमेटी हाल में समझौता हुआ। आपदा प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल रविंद प्रताप शाही और वीसी प्रो. राजेश सिंह ने मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किया। इस दौरान एमएमएमयूटी कुलपति प्रो. जेपी पांडेय भी मौजूद रहे।

बनाया जा रहा डिप्लोमा कोर्स
इस दौरान वीसी प्रो. राजेश सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि पीएम ने डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट पर कार्य करने के लिए 10 बिंदु निर्धारित किये हैं। इनमें बिंदु नंबर 6 यूनिवर्सिटी में डिजास्टर मैनेजमेंट को करिकुलम और गतिविधियों के आयोजन पर फोकस करता है। राच्य में आपदा से लोगों के जान और माल की सुरक्षा में ये करार मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि डीडीयू प्रदेश के ऐसे यूनिवर्सिटी में शुमार है जो आपदा प्रबंधन पर कोर्स का संचालन कर रहा है। इसके साथ ही नई शिक्षा नीति के तहत आपदा प्रबंधन पर डिग्री और डिप्लोमा कोर्स बनाया जा रहा है। राच्यपाल के निर्देश पर डिजास्टर मैनेजमेंट सेल का गठन किया गया है।

रोवर्स रेंजर्स फैला रहे अवेयरनेस
इसमें रोवर्स रेंजर्स, एनसीसी और एनएसएस के को-ऑर्डिनेटर को जोड़ा गया है। इनकी मदद से कोरोना महामारी के साथ साथ विवि के हेल्थ सेंटर पर चल रही वैक्सीनेशन ड्राइव के प्रति जागरूकता फैलाने में मदद ली जा रही है। वीसी ने कहा कि आपदा की वजह से किसी की जान न जाये इसे लेकर विवि की तरफ से हर संभव मदद आपदा प्राधिकरण को दी जाएगी। प्राधिकरण को रीजनल सेंटर या कोई केंद्र खोलना चाहता है उसमें भी हर मुमकिन मदद की जाएगी। साथ ही साथ आपदा प्रबंधन पर कार्य करने के लिए सरकार से फण्ड मिल सके इस बाबत प्रस्ताव भेजा जाएगा।

डिजास्टर मैनेजमेंट से बचाई गई लाखों जान
उत्तर प्रदेश राच्य आपदा प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेपिफटेनेंट जनरल रविंद्र प्रताप शाही ने कहा कि डिजास्टर मैनेजमेंट की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जी-7 समिट में दुनिया के प्रभावशाली देश इसके लिए ठोस योजना बनाने पर मंथन कर रहे हैं। डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 की स्थापना के बाद उडीसा और केरला ने बेहतर कार्य किया है जिससे आने वाली बाढ या चक्रवाती तुफान से लाखों लोगों की जिंदगियां बचाई गई हैं। प्राइमरी स्कूल से लेकर पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन का गुर सिखाया जाना वक्त की मांग हैं।

एमएमएमयूटी ने लिए हैं गोद पांच गांव
एमएमएमयूटी के वीसी प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि हमारे यहां आग लगने पर कुआं खोदने की रवायत रही है। अब इसे बदलने की जरूरत है। आपदा किसी भी तरह की हो सकती है। पूर्वांनुमान लगाए जाने से जान और माल की सुरक्षा हो सकेगी। प्रो पांडेय ने कहा कि एमएमएमयूटी ने पांच गांव को गोद लिया है। एक गांव को आईओटी की मदद से विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। साल 2021-22 का जो कोर्स रिवाइज किया है उसमें एनसीसी को इलेक्टिव कोर्स के रूप मंजूरी दी है। जो अपने आप में आपदा के 40 फीसदी सिलेबस को कवर करता है।

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