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कोरोना की थर्ड वेव पर शिकंजा:गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस मॉडल पर होगा कोविड संक्रमितों का इलाज, शहर के अस्पताल में आने की नहीं पड़ेगी जरूरत

गोरखपुर2 महीने पहले
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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा भांप कर जिले का स्वास्थ्य महकमा एलर्ट मोड पर।  (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा भांप कर जिले का स्वास्थ्य महकमा एलर्ट मोड पर। (फाइल फोटो)

कोविड-19 की दूसरी लहर को भी लगभग काबू कर चुकी प्रदेश सरकार अब इसकी 'थर्ड वेव' पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। अपने गोरखपुर दौरे के दौरान यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा भांप कर जिले का स्वास्थ्य महकमा एलर्ट मोड में आ चुका है। स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा और निरीक्षण के बाद सीएमओ ने तैयारियों का खाका बना लिया। ऐसे में अगली वेव से बच्चों को विशेष रूप से बचाने का ताना-बाना इंसेफेलाइटिस मॉडल पर बुना जा रहा है।

सीएचसी इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर पर भी होगा इलाज
सीएमओ डॉ. सुधाकर ने बताया कि जिस तरह से सघन इंतजामों और कड़ी निगरानी की बदौलत इंसेफेलाइटिस का उन्मूलन किया गया, ठीक उसी तर्ज पर कोविड की तीसरी लहर पर काबू पाने की योजना बनाई गई है। इसके तहत जिला अस्पताल में पहले से मौजूद 17 वेंटिलेटर बेड की संख्या में इजाफा करके उसे 50 किया जा रहा है। वहीं, जनपद में 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हैं। यहां इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर बने हुए हैं। अब इनका उपयोग कोविड के उपचार में होगा। इसी तरह गगहा, चौरीचौरा और पिपरौली में तीन-तीन बेड के पीडियाट्रिक वेंटिलेटर वार्ड तैयार किए जा चुके हैं।

इंसेफेलाइटिस की रोकथाम में आशा कार्यकर्ता और एएनएम का रहा सहयोग
उन्होंने कहा कि इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए पहले ग्रामीण इलाकों में आशा कार्यकर्ता और एएनएम को लगाया गया था। बच्चों और बड़ों को बुखार होने पर वे उन्हें पहले सीएचसी पर भर्ती कराती थीं, वहां हालत न सुधरने पर जिला अस्पताल अथवा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता था। ठीक उसी प्रकार यदि गांवों में किसी को भी बुखार अथवा कोरोना का लक्षण दिखता है तो तत्काल मोबाइल वैन जाकर उनकी जांच करती है और फिर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। यदि बहुत मामूली लक्षण है तो उसे वहीं पर दवा की किट देकर होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी जाती है।

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