याद किए गए शहीद ले. गौतम गुरूंग:23वीं पुण्‍यतिथ‍ि पर कारगिल शहीद ले. गौतम गुरुंग को दी गई श्रद्धांजलि; ब्रिगेडियर पिता बोले- बेटे की शहादत पर है गर्व

6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
5 अगस्‍त 1999 को कारगिल युद्ध के समय जम्‍मू कश्‍मीर के तंगधार में ले. गौतम गुरुंग 23 साल की उम्र में शहीद हो गए थे। - Dainik Bhaskar
5 अगस्‍त 1999 को कारगिल युद्ध के समय जम्‍मू कश्‍मीर के तंगधार में ले. गौतम गुरुंग 23 साल की उम्र में शहीद हो गए थे।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कारगिल में शहादत देने वाले राष्‍ट्रपति द्वारा ‘सेना मेडल’ से सम्‍मानित गोरखा रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट गौतम गुरुंग के 23वीं पुण्‍य ति‍थि पर उन्‍हें याद किया गया। उनके पिता रिटायर्ड ब्रिगेडियर पीएस गुरुंग के साथ 3/4 गोरखा रेजिंमेंट गोरखपुर के जवानों ने उन्‍हें याद किया और उन्‍हें सलामी दी। इस अवसर पर शहीद ले. गौतम गरुंग के पिता ब्रिगेडियर पीएस गुरुंग ने कहा कि उनके और परिवार के साथ पूरे देश को बेटे की शहादत पर गर्व है। सेना में ब्रिगेडियर और पिता होने के नाते वे हर साल यहां पर आकर उनकी पुण्‍यतिथ‍ि मनाते हैं।

शहीद को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर
भारत नेपाल मैत्री समाज की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कूड़ाघाट स्थित शहीद ले. गौरम गुरुंग चौक पर देश के वीर सपूत को 3/4 गोरखा रेजिमेंट की ओर से उनके पिता पूर्व ब्रिगेडियर पीएस गुरुंग की उपस्थिति में मातमी धुन बजाकर शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। शहीद ले. गौतम गुरुंग का परिवार तीन पुश्‍त से भारतीय सेना में रहा है। परिवार के इकलौते बेटे रहे शहीद ले. गौतम गुरुंग को आज भी याद कर उनके पिता और गोरखा रेजि‍मेंट के जवानों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।

23 साल की उम्र में शहीद हो गए थे ले. गौतम गुरुंग
रिटायर्ड ब्रिग‍ेडिर पीएस गुरुंग मूलतः नेपाल के रहने वाले हैं और उनके परिवार ने भारतीय सेना के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। वे अब उत्‍तराखंड के देहरादून में रहते हैं। उनका जन्‍म 23 अगस्‍त 1973 को देहरादून में हुआ था। वे 6 मार्च 1997 को उन्‍होंने पिता की बटालियन 3/4 गोरखा राइफल्‍स (चिन्डिटस) में कमीशन प्राप्‍त किया और प्रथम नियुक्ति जम्‍मू-कश्‍मीर सीमा पर हुई।

5 अगस्‍त 1999 को कारगिल युद्ध के समय जम्‍मू कश्‍मीर के तंगधार में ले. गौतम गुरुंग 23 साल की उम्र में शहीद हो गए थे। 15 अगस्‍त 1999 को उन्‍हें महामहिम राष्‍ट्रपति के. आर. नारायणन द्वारा मरणोपरान्‍त ‘सेना मेडल’ से सम्‍मानित किया गया। उसके बाद से हर साल उनके शहादत दिवस पर यहां शहीद ले. गौतम गुरुंग चौक पर उन्‍हें याद किया जाता है।

इन लोगों ने दी श्रद्धांजलि
इस दौरान आसाम लेखापानी 3/4 गोरखा रेजिमेंट के पांच सदस्‍य सूबेदार हरि, हवलदार राजेश, नायक दिलीप, नायक समीर, लांस लायक दावा शेरपा, रायफल मैन वीरेन्‍द्र 29 जुलाई से आकर यहां पर मूर्ति के साफ-सफाई के काम में लगे रहे हैं। इस अवसर पर भारत-नेपाल मैत्री समाज के अध्‍यक्ष अनिल कुमार गुप्‍त, वीर सेनानी कल्‍याण संस्‍थान के अध्‍यक्ष अन‍िरुद्ध शाही, अति विशि‍ष्‍ठ सेवा मेडल से सम्‍मानित रिटायर्ड मेजर जनरल एसके जसवल, डिप्‍टी कमांडेंट कर्नल संदीप राय, नगर निगम प्रवर्तन अधिकारी ले. कर्नल सीपी सिंह उपस्थित रहे।

खबरें और भी हैं...