जिसने योगी के खिलाफ आवाज उठाई, वो जेल गया:गोरखपुर में चंद्रशेखर आजाद बोले, जेल जाने वालों में, मैं भी एक हूं; मुसलमान होने के नाते डॉ. कफील को बनाया बलि का बकरा

गोरखपुरएक वर्ष पहले
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनावी हूंकार भरने पहुंचे चंद्रशेखर सोमवार को मीडिया को संबोधित कर रहे थे। - Dainik Bhaskar
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनावी हूंकार भरने पहुंचे चंद्रशेखर सोमवार को मीडिया को संबोधित कर रहे थे।

भीम आर्मी आज़ाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद ने आज गोरखपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। उन्होंने इस दौरान सबूतों के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ की पोल खोली। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में यूनिवर्सिटी की छात्रा प्रियंका भारती की मौत हत्या का केस होमसाइंस की एचओडी दिव्या रानी पर दर्ज हुआ। लेकिन आज तक कार्रवाई तो दूर इस मामले में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दिया, क्योंकि प्रोफेसर दिव्या रानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की करीबी हैं।

पीड़ित परिवार को आज तक मुख्यमंत्री से मिलने तक नहीं दिया गया। परिवार के लोग सीबीआई जांच की मांग रहे हैं। न ही उनकी मांग पूरी हुई और न ही उन्हें कोई मदद दी गई। मुख्यमंत्री उस परिवार से मिलने की बजाए पीछे भाग रहे हैं। लेकिन मैं पीड़ित परिवार की लड़ाई लड़ूंगा और उसे न्याय दिलाऊंगा।

सत्ता का दुर्पयोग कर रहे हैं मुख्यमंत्री

अपनी गोरखपुर सदर सीट से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनावी हूंकार भरने पहुंचे चंद्रशेखर सोमवार को मीडिया को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बीते 5 साल में उत्तर प्रदेश में 123 लोगों पर रासुका लगाई गई। जिनमें से एक मैं भी हूंं। हालांकि इनमें से 102 मामले कोर्ट में खारिज हो गए, मेरा मामला भी कोर्ट में खारिज हो गया। क्योंकि जांच में सामने आया कि यह रासुका की कार्रवाई राजनीतिक बदला लेने के लिए लगाई गई थी।

इनमें से 15 लोगों पर अकेले सिर्फ गोरखपुर में रासुका की कार्रवाई हुई। यह 15 वे लोग हैं जिन्होंने कभी न कभी या तो योगी के खिलाफ विद्रोह किया या फिर उनके खिलाफ आवाज उठाई। चंद्रशेखर ने कहा कि मुख्यमंत्री सत्ता का दुर्पयोग कर हिटलरशाही और तानाशाही राज चला रहे हैं। यह बात सिर्फ गोरखपुर के लोगों को ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की जनता को जानना चाहिए। यही गोरखपुर का समाजिक न्याय है।

डॉ. कफील को बनाया बलि का बकरा

गोरखपुर आक्सीजन कांड की चर्चा करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज त्रासदी में अपनी कमियों को छिपाते हुए मुख्यमंत्री ने डॉक्टर कफील को बलि का बकरा बना दिया। जबकि कोर्ट में उनपर लगे सभी आरोप पूरी तरह से खारिज हो गए। आरोप लगाया कि डॉक्टर कफील को सिर्फ मुसलमान होने की वजह से इतनी प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

आज कफील गोरखपुर में नहीं हैं, फिर भी पुलिस उनके घर जाकर उनकी 70 साल की बुजुर्ग मां को परेशान करती है। झूठे मुकदमें लगाकर उन्हें जेल भेजा गया, ले​किन जिन लोगों को जेल जाना चाहिए, वे आज बाहर घूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि योगी के राज में उत्तर प्रदेश में मुसलमान होना भी अपराध है। अन्याय के खिलाफ जो भी आवाज उठाता है, मुख्यमंत्री उसे सत्ता का दुर्पयोग करके दबा देते हैं।

यहां सिर्फ हत्यांए होती हैं, कार्रवाई नहीं

यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जिस कानून व्यवस्था की पूरे प्रदेश में दुहाई दी जाती है, उसकी हकीकत गोरखपुर में साफ दिख रही है। यहां होटल के कमरे में कानपुर के व्यापारी की पीट पीटकर पुलिस हत्या कर देती है। 18 दिन से लापता छात्रों को पुलिस खोजना भी जरूरी नहीं समझती और उनकी गड्ढे में गड़ी हुई लाश मिल रही है। मेरे यहां आने से कुछ घंटे पहले महिला की उसके घर में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई। यही यहां की कानून व्यवस्था है। जोकि पूरी तरह ध्वस्त होने के बाद भी उसे मुख्यमंत्री जबरदस्ती बेहतर दिखाने का प्रचार कर रहे हैं।

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में सिर्फ बड़े जातियों की हुई नियुक्तियां

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में कुलपति और टीचर्स के बीच चल रहे विवादों की भी चंद्रशेखर ने चर्चा की। कहा कि यहां विश्वविद्यालय के शिक्षक कमलेश गुप्ता ने तानाशाह कुलपति के खिलाफ आवाज उठाई तो उन्हें निलंबित कर दिया गया। क्योंकि वे हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष बनने वाले थे, लेकिन कुलपति नहीं चाहते कि कोई पिछड़े वर्ग का शिक्षक विभागाध्यक्ष बने।

मजबूरन बीते दिनों उन्होंने शरीर त्याग देने तक की घोषणा कर दी थी। मैंने ही उन्हें बात करके रोका और आश्वासन दिया कि मैं उनकी लड़ाई लड़ूंगा। उन्हें समझाया कि ऐसा कोई कदम आप न उठाएं कि युवाओं के हौसले टूट जाएं।

2018 में गोरखपुर यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर्स की नियुक्तियां हुईं। लेकिन मुख्यमंत्री ने सिर्फ बड़ी जा​ति के और अपने करीबियों को ही नियुक्त कराया। उसकी एक पूरी लिस्ट है। हालांकि नियुक्तियों का रिजल्र्ट घोषित होने के दो दिन पहले ही उसकी लिस्ट बाहर आ गई थी और बाद में लिफाफे में भी वही नाम खुले, जिनकी पहले से चर्चा थी।

गर्मी शांत करने और शिमला बनाने की धमकी दे रहे मुख्यमंत्री

चंद्र शेखर ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद को दलितों का​ हितौषी बताते हैं, वोट बैंक की राजनीति के लिए वे दलितों के घर भोजन करने जा रहे हैं। लेकिन दलितों को आरक्षण नहीं दे सकते। जबकि इसके लिए सुप्रीम कोर्ट भी आदेश दे चुका है। कहा कि मुख्यमंत्री चाहें तो मेरे उपर फिर से मुकदमें लगवा दें, लेकिन मैं कहूंगा कि 69000 शिक्षक भर्ती में घोटाला इन्हीं के शासनकाल में हुआ। घोटाला करने वाले को जेल भेजने की जगह पुलिस उसके आगे नतमस्तक हो गई।

युवा रोजगार के लिए लाठियां खा रहे हैं और मुख्यमंत्री लोगों की गर्मी शांत करने और शिमला बनाने की धमकी दे रहे हैं। यह क्या कि साधू- संत की भाषा होती है? कहा कि इनकी सरकार में हुए घोटालों की जांच कराकर, मुकदमा दर्ज कराकर मुख्यमंत्री को जेल भेजेंगे, यह मुख्यमंत्री सुन लें। वैसे भी मैं मुख्यमंत्री से काफी नजदीक हूं। मैं सहारनपुर का हूं और वे उत्तराखंड के हैं। 5 साल से उनसे लड़ रहा हूं आगे भी लडूंगा और इस बार के चुनाव में गोरखपुर की जनता के साथ उन्हें सबक सिखाया जाएगा।

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