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गोरखपुर में कोरोना के नए वेरिएंट को लेकर अलर्ट:जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे गए 14 मरीजों के सैंपल,दो नमूनों में डेल्टा प्लस की पुष्टि

गोरखपुर3 महीने पहले
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30 लोगों के नमूनों की रिपोर्ट पिछले सप्ताह आई। उसमें दो में डेल्टा प्लस, एक में कप्पा व 27 में डेल्टा की पुष्टि हुई है। - Dainik Bhaskar
30 लोगों के नमूनों की रिपोर्ट पिछले सप्ताह आई। उसमें दो में डेल्टा प्लस, एक में कप्पा व 27 में डेल्टा की पुष्टि हुई है।

गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज पूरी तरह अलर्ट हो गया है। यहां दो मरीजों के नमूनों में कोरोना के सबसे खतरनाक वायरल वैरिएंट डेल्टा प्लस मिलने के बाद अब इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की तरफ से पूरी सर्तकता बरती जा रही है। जुलाई में बाहर से आए पॉजिटिव 14 लोगों के सैंपल लेकर बीआरडी के माइक्रोबायोलाजी विभाग ने जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट आफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलाजी (आइजीआइबी) में भेजा है।

30 लोगों के भेजे गए थे सेंपल
हालांकि इससे पहले यहां से भेजे गए 30 लोगों के नमूनों की रिपोर्ट पिछले सप्ताह आई। उसमें दो में डेल्टा प्लस, एक में कप्पा व 27 में डेल्टा की पुष्टि हुई है। डेल्टा को दूसरी लहर का जिम्मेदार माना जा रहा है। लेकिन डेल्टा प्लस व कप्पा को लेकर कालेज प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि कोरोना के इन दो स्वरूपों ने यहां अनेक लोगों को संक्रमित किया होगा। इसलिए इस बार भेजे गए नमूनों में दिल्ली, मुंबई व मध्य प्रदेश से आए पाजिटिव लोगों के साथ ही स्थानीय लोगों के नमूने भी भेजे गए हैं।

75 सेंपल में सिर्फ 30 की आई रिपोर्ट
माइक्रोबायोलाजी विभाग का मानना है कि यदि स्थानीय लोगों के नमूनों में डेल्टा प्लस या कप्पा की पुष्टि होती है तो विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होगी। क्योंकि इन दोनाें वैरिएंट की संक्रमित करने की व मारक क्षमता कई गुना ज्यादा होती है। जीनोम सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट आने के बाद इनकी रोकथाम के लिए कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

अब तक आइजीआइबी में 75 नमूने भेज चुके हैं

अब तक आइजीआइबी में माइक्रोबायोलाजी विभाग 75 नमूने भेज चुका है। इनमें से अभी तक केवल 30 की रिपोर्ट आई है। शेष की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। माइक्रोबायोलाजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि नमूने उन मरीजों के भेजे गए हैं, जिनकी सीटी वैल्यू 25 से कम थी या वे बाहर से आए हुए थे। सीटी वैल्यू 25 से कम वाले मरीजों को गंभीर माना जाता है।

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