गोरखपुर में धूमधाम से मनाया गया भैयादूज:बहनों ने पूजन कर भाईयों के लंबी उम्र की कामना की, कायस्थ समाज ने की कलम दवात की विशेष पूजा

गोरखपुर24 दिन पहले
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हनों ने पूरे विधि-विधान से अपने भइयों के माथे पर टीका लगाकर उनकी लंबी उम्र के साथ ही समृद्धि की कामना की। - Dainik Bhaskar
हनों ने पूरे विधि-विधान से अपने भइयों के माथे पर टीका लगाकर उनकी लंबी उम्र के साथ ही समृद्धि की कामना की।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में शनिवार को भगवान चित्रगुप्त की पूजा विधि विधान से संपन्न हुई। चित्रगुप्त मंदिर में सुबह से जुटे भक्तों ने लेखनी दवात की पूजा की और भगवान चित्रगुप्त से जीवन में खुशहाली की मनोकामना की। इसके साथ ही इस मौके पर कायस्थ समाज के लोगों ने अपने घरों, दफ्तरों और प्रतिष्ठानों पर भी भगवान चित्रगुप्त की पूजा की। कलम व दवात से लोगों ने कागज पर भगवान श्रीराम का नाम लिखकर भगवान चित्रगुप्त को अर्पित कर आज के दिन के लिए कलम त्यागा।

बहनों ने सुनी भैयादूज की कथा
वहीं इसके साथ ही भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व भैयादूज परंपरागत तरीके से मनाया गया। बहनों ने पूरे विधि-विधान से अपने भइयों के माथे पर टीका लगाकर उनकी लंबी उम्र के साथ ही समृद्धि की कामना की। मुहूर्त के अनुसार बहनों ने पूजन की थाल सजाकर भैयादूज की कथा सुनी। थाल में रखी रोली से भाई के माथे पर टीका लगाकर उन्हें मिठाई खिलाई। इसके बाद उनकी लंबी उम्र के साथ ही समृद्धि की कामना की। इसके पूर्व बहनों की टोली शहर के मंदिरों में दर्शन-पूजन को उमड़ी रही। शहर के विभिन्न इलाकों में सुबह से ही दर्शन-पूजन के लिए भीड़ उमड़ी रही।

मृत्यु के देवता यम और कलम के आराध्य चित्रगुप्त महराज को प्रसन्न करने के लिए शनिवार को विशेष पूजा हुई।
मृत्यु के देवता यम और कलम के आराध्य चित्रगुप्त महराज को प्रसन्न करने के लिए शनिवार को विशेष पूजा हुई।

यम और चित्रगुप्त महराज के लिए की गई पूजा
दरअसल, मृत्यु के देवता यम और कलम के आराध्य चित्रगुप्त महराज को प्रसन्न करने के लिए शनिवार को विशेष पूजा हुई। इस दिन भाई का बहन के घर या उसके हाथों भोजन करने और स्वेच्छा से बहन को उपहार देने का बड़ा महात्म्य है। यमुना (नदी) को यमराज की बहन कही जाती हैं इसीलिए कार्तिक शुक्ल पक्ष की दूसरी तिथि शनिवार के दिन भाई-बहन के यमुना में स्नान और पूजन से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

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