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तस्करी नेपाल वाया गोरखपुर:लॉकडाउन में खूब खप रहा तस्करी का माल, नेपाली रेट पर खरीदकर इंडियन दामों पर बेचकर मालामाल रहे व्यापारी

गोरखपुर4 महीने पहले
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रोजाना इस तस्करी के कारोबार से व्यापारी हो रहे मालामाल। कस्टम सुप्रीटेंडेंट बोलीं - वाहनों की सघन चेकिंग कर तस्करी पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जाएगा। - Dainik Bhaskar
रोजाना इस तस्करी के कारोबार से व्यापारी हो रहे मालामाल। कस्टम सुप्रीटेंडेंट बोलीं - वाहनों की सघन चेकिंग कर तस्करी पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जाएगा।

उत्तर प्रदेश का गोरखपुर शहर इन दिनों तस्करी के सामानों का हब बन चुका है। लॉकडाउन में नेपाल से सोनौली के रास्ते रोजाना करोड़ों रुपए के कास्मेटिक प्रॉडक्ट तस्करी कर गोरखपुर देश के अन्य इलाकों में खपाए जा रहे हैं। इन प्रॉडक्ट में टूथपेस्ट से लेकर शैंपू, साबुन, मसाला, पाउडर, सौंदर्य प्रसाधन के तमाम ब्रांड के क्रीम आदि शामिल हैं। हैरानी वाली बात तो यह है कि इन सामानों में नकली से लेकर असली भी शामिल है, लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि इन सामानों को नेपाल के रेट पर खरीदकर यहां इंडियन दामों में बेचा जा रहा है। रोजाना इस तस्करी के कारोबार से यहां के व्यापारी जहां मालामाल हो रहे हैं, वहीं ब्रांडेड कंपनियों से लेकर सरकार को रोजाना लाखों के राजस्व का नुकसान पहुंच रहा है। भास्कर की पड़ताल में इसका राजफाश हुआ। जब हमारी टीम इसकी पड़ताल करने निकली तो पता चला कि शहर के साहबगंज मंडी से लेकर शाहमारूफ, पांडेय हाता से लेकर विभिन्न इलाकों में होलसेलर तस्करी के इन सामानों को खरीदकर गांव-देहात के ग्राहकों में खपा रहे हैं।

होता है दोगुने का मुनाफा
हालांकि, इससे जुड़े जानकारों के मुताबिक इन सामानों में कुछ कास्मेटिक प्रॉडेक्ट तो नकली हैं। जिनपर मेड इन चाइना भी लिखा होता है, लेकिन अधिकांश सामान असली और ब्रांडेड ही हैं। इसपर लगातार कस्टम डिपार्टमेंट से लेकर एसएसबी और अन्य एजेंसियां कार्रवाई भी कर रही हैं। बावजूद इसके इसपर अंकुश लगने की बजाए तस्करी का यह कारोबार लगातार बढ़ता ही जा रहा है। वजह यह है कि जिस टूथ पेस्ट की कीमत नेपाल में 89 रुपए है, जबकि इंडिया में उसकी कीमत करीब 55 रुपए है। हालांकि, यही सामान होलसेल में लेने में इसकी कीमत 55 से घटकर करीब 45 रुपए हो जाती है। जबकि भारतीय बाजार के होलसेल मार्केट में भी इस टूथपेस्ट की कीमत करीब 78 रुपए है। ऐसे में 45 रुपए का टूथपेस्ट इंडियन मार्केट में एमआरपी यानी कि पूरे 89 रुपए में बिक रहा है। इससे प्रति टूथपेस्ट व्यापारी को करीब डबल का मुनाफा हो रहा है।

बेहद मुश्किल है पकड़ पाना
वहीं, इन सामानों को यहां की मार्केट में आसानी से खपाने की एक सबसे बड़ी खास वजह यह भी है कि इनकी पहचान करना बेहद मुश्किल है। क्योंकि यह सामान देखने में बिलकुल उसी तरह है, जैसा कि इंडिया में है। फर्क सिर्फ इतना है कि इनके सामानों की पैकिंग के पीछे काफी ध्यान से देखने पर पता चलेगा कि यह प्रॉडक्ट मेड इन नेपाल के हैं। हालांकि, हिंदुस्तान लीवर से लेकर डाबर जैसी तमाम ऐसी ब्रांडेड कंपनियां हैं। जिन्होंने नेपाल में अपनी फैक्ट्री डाल रखी है। जिसपर मेन्यूफैक्चरिंग से लेकर कंपनी का पता भी नेपाल का है और यह प्रॉडक्ट सिर्फ नेपाल में ही बेचे जा सकते हैं। चूंकि नेपाल में इसकी एमआरपी बेहद कम है और भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत और भी अधिक कम हो जाती है, इसका फायदा उठाते हुए तस्कर रोजाना करोड़ों का माल बार्डर से आसानी से पार करा रहे हैं। जोकि गोरखपुर सहित देश के तमाम हिस्सों में खप रहा है।

ऐसे पार करते हैं बार्डर
तस्करी के इस कारोबार से कई सफेदपोश भी जुड़े हैं। जिन्होंने इस काम के लिए सैकड़ों कैरियर को भी लगा रखा है। यह कैरियर भारत-नेपाल की खुली 182 किलोमीटर की सीमा का फायदा उठाते हुए पकडंडियों के रास्ते पहले इन सामानों को बार्डर एरिया पार कराकर सोनौली, कोल्हुई बाजार, ठूठीबारी, झुलनीपुर आदि एरिया में स्टॉक करते थे। इसके बाद यहां से इन सामानों को गोरखपुर भेजा जाता है। जहां से इसकी देश भर में सप्लाई हो रही है।

रास्ते में होती है सेटिंग
हालांकि, इन सामानों को बार्डर एरिया से गोरखपुर लाते वक्त भी आसानी से पकड़ा जा सकता है, बार्डर पर एसएसबी और कस्टम की आंखों में धूल झोंकर आने वाले इन सामानों की भारत सीमा में पड़ने वाले थाना क्षेत्रों में कोई चेकिंग नहीं होती है। सभी पुलिस पिकेट और पोस्ट पर ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों को 100 की नोट देकर गाड़ियां बड़े ही आराम से पास हो जाती हैं। यही वजह है कि रोजाना हो रहे इस कारोबार का कस्टम या एसएसबी भले ही कभी-कभार भंडाफोड़ करती है, लेकिन पुलिस इनकी परछाई भी नहीं छूती।

केस-1
2018 के अक्टूबर माह में कस्टम डिपार्टमेंट ने रेलवे स्टेशन के पार्सल ऑफिस से तस्करी कर लुधियाना भेजे जा रहे करीब पांच लाख रुपए का टूथपेस्ट बरामद किया। इस मामले में टीम ने तस्कर को भी गिरफ्तार किया था। इन टूथपेस्टों में डाबर रेड पेस्ट, पेप्सोडेंट जैसी ब्रांडेड कंपनियों के टूथपेस्ट शामिल थे।

केस-2
2019 जुलाई महीने में भी कस्टम डिपार्टमेंट ने सोनौली के रास्ते आ रही एक ट्रक पकड़ा था। जिसमें टीम ने तस्करी कर आ रहे टूथपेस्ट सहित विभिन्न तरह के ब्रांडेड कास्मेटिक क्रीम आदि भी बरामद किए थे। इस मामले में भी टीम ने तस्कर को गिरफ्तार किया था।

केस-3 जनवरी 2019 महीने में भी कस्टम डिपार्टमेंट ने सोनौली रोड पर एक मैजिक टैप्पू से तस्करी कर आ रहे कास्मेटिक सामान बरामद किए थे। इस तरह इस साल 2017 में अब तक कस्टम ने करीब 50 लाख रुपए से अधिक के तस्करी के माल बरामद किए हैं।

एक नजर में समझे तस्करी का खेल

  • सोनौली से गोरखपुर के रूट पर पड़ता हैं 10 पुलिस थाना और दर्जनों चौकिंया
  • रोजाना नेपाल बार्डर से आते हैं तस्करी के करोड़ों के सामान, नहीं होती चेकिंग
  • प्रति बार्डर से रोजना भारत की सीमा में भेजा जाता है करीब दो करोड़ का सामान
  • भारत-नेपाल के बीच 182 किलोमीटर की खुली सीमा से चल रहा तस्करी का खेल
  • सोनौली से लेकर ठूठीबारी, रक्सौल, झुलनीपुर बार्डर से आता है तस्करी का माल
  • गोरखपुर में तस्करी का माल इक्ठ्ठा कर होती है देश भर में सप्लाई
  • शहर के साहबगंज मंडी से लेकर शाहमारूफ और पांडेयहाता में बिकता है नेपाली प्रॉडक्ट

क्या कहते हैं अधिकारी?
कस्टम सुप्रीटेंडेंट राधिका त्रिपाठी ने बताया कि नेपाल से तस्करी का गोरखपुर आने वाले सामान एक साल पहले तक काफी पकड़े गए हैं। इधर, लगातार लॉकडाउन की वजह से ऐसी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अगर ऐसी सूचना है तो इसे पुष्ट कर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, एडीजी जोन अखिल कुमार ने कहा कि तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए सीमावर्ती इलाकों के सभी पुलिस कप्तानों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। नेपाल के रास्ते गोरखपुर आने वाले वाहनों की सघन चेकिंग कर तस्करी पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जाएगा। इसमें लापरवाही करने वाले पुलिसकर्मी बक्शे नहीं जाएंगे।

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