गोरखपुर...10 हजार से ज्यादा लोगों का आवास बना सपना:एक महीने में भी नहीं हो सका PM आवास का सर्वे, आशियाने की आस में ठंड में ठिठुर रहे लोग; सर्वे कंपनी हुई ब्लैकलिस्टेड

Gorakhpurएक वर्ष पहले
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दरअसल जो कंपनी आवास के आवेदनों का सर्वे करती थी वह ब्लैकलिस्टेड हो गई है और नई फर्म का चयन नहीं हो पाया है - Dainik Bhaskar
दरअसल जो कंपनी आवास के आवेदनों का सर्वे करती थी वह ब्लैकलिस्टेड हो गई है और नई फर्म का चयन नहीं हो पाया है

उत्तर प्रदेश सरकार व उसके मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही आए दिन गरीबों को अपना आवास देने का दावा कर रहे हैं लेकिन उनके गृह जनपद गोरखपुर में पिछले एक महीने से पीएम आवास का सपना सजोंए करीब 10 हजार लोगों का सपना पिछले एक महीने से पूरा नहीं हो पा रहा है। ये लोग इस गलन भरी ठंड में पक्के छत की आश लगाए ठिठुर रहे हैं। क्योंकि जो कंपनी आवेदनों का सर्वे करती है वह ब्लैक लिस्टेड हो चुकी है।

दरअसल जो कंपनी आवास के आवेदनों का सर्वे करती थी वह ब्लैकलिस्टेड हो गई है और नई फर्म का चयन नहीं हो पाया है। लिहाजा पिछले एक माह से सर्वे का काम डूडा प्रशासन नहीं करा पा रहा है। जिससे हजारों आवदेन लंबित पड़े हुए हैं। जियो टैगिंग भी नहीं होने से करीब 4000 लाभार्थियों की दूसरी और तीसरी किस्त भी खाते में नहीं जा पा रही है।

भ्रस्टाचार की शिकायतों पर ब्लैक लिस्टेड हुई कंपनी
गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े पैमाने में भ्रष्टाचार की शिकायतें आ रही थीं। इसको देखते हुए डूडा के परियोजना निदेशक ने सर्वे करने वाली एजेंसी को पिछले 22 नवम्बर 2021 को डिबार कर दिया था। फर्म के ऊपर 28.83 लाख रुपये का जुर्माना भी ठोका गया था। लेकिन नई एजेंसी की तलाश पूरी नहीं हो रही है। नतीजा यह हुआ कि नए आवेदकों को दिक्कत तो हो ही रही है, जियो टैगिंग नहीं होने से लाभार्थियों के खाते में दूसरी और तीसरी किस्त भी नहीं जा पा रही है।

छोटे कॉजीपुर वार्ड के पार्षद अमरनाथ यादव का कहना है कि 30 से अधिक आवेदकों के खाते में रकम नहीं पहुंच पा रही है। नये लोग आवेदन ही करना बंद कर दिये हैं। वहीं गिरधरगंज के पार्षद प्रतिनिधि राघवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है​ कि सर्वे का काम ठप होने से 50 से अधिक आवेदकों का सर्वे नहीं हो पा रहा है। वहीं कई की दूसरी या तीसरी किश्त भी जारी नहीं हो पा रही है।

लंबा हो सकता है इंतजार
लोगों का कहना है कि ​अब दिसंबर बीत रहा है। जनवरी में चुनाव आचार संहिता लग सकता है। जिसके बाद आवास की मंजूरी नहीं मिल पाएगी और मार्च से अप्रैल तक का इंतजार करना पड़ेगा। उनके अपने पक्के मकान का सपना सपना ही रह जाएगा।

6000 से अधिक नये आवेदन लंबित
ठंठ में ठिठुर रहे 6000 से अधिक लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया है लेकिन सर्वे नहीं होने से उनकी डीपीआर नहीं तैयार हो रही है। वहीं ऑनलाइन आवेदन करने वालों को शार्ट लिस्ट भी नहीं किया जा रहा है। हजारों ऐसे लोग हैं जो निर्माण होने के बाद दूसरी और तीसरी किस्त के लिए आवेदन किया है। लेकिन जियो टैगिंग नहीं होने से किस्त खाते में नहीं जा पा रही है। इस संबंध में उपसभापति ऋषि मोहन का कहना है कि ठंड व बारिश में आशियाने की सर्वाधिक जरूरत होती है। बारिश के समय भ्रष्टाचार के मामले प्रकाश में आ रहे थे और अब फर्म ब्लैक लिस्टेड है।

पीपीगंज में 5 से 10 हजार रूपये मांगे जाने का आरोप
पीपीगंज में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास दिलाने एवं पहली किश्त जारी कराने के नाम पर बिचौलिए, आवेदनकर्ताओं से पांच से दस हजार की वसूली कर रहे हैं। जबकि हाल ही में जांच के दौरान अपात्रों से वसूली करने वाली सर्वे कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है और उससे रिकवरी का भी आदेश भी हुआ है। उसके बाद भी अवैध वसूली का सिलसिला बदस्तूर जारी है।

पीपीगंज नगर पंचायत में सीमा विस्तार के तहत शामिल किए गए गांवों में बीते कुछ महीने में भारी संख्या में पीएम आवास के लिए आवेदन किये गए हैं। जिनमें पहले चरण में करीब 1100 आवेदनों की स्वीकृति मिली है। जिसकी लिस्ट बिचौलियों के हाथ लगते ही धनउगाही की होड़ मच गई है। इस सम्बंध में नगर पंचायत अध्यक्ष गंगा प्रसाद जायसवाल ने कहा है कि किसी भी बिचौलिए को पैसा देने की जरूरत नही है। नगर पंचायत द्वारा अपने स्तर से जांच के बाद ही पात्रों की ही सूची भेजी जाएगी।

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