होटल के कमरे में मिले खून के धब्बे:पुलिस जीप में खून से सना कपड़ा मिला, CBI जांच के वक्त मनीष के दोस्त भी साथ थे

गोरखपुर7 महीने पहले
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कानपुर के प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए मंगलवार को CBI गोरखपुर में उस कृष्णा होटल पहुंची, जहां वह ठहरा हुआ था। CBI ने कमरा नंबर 512 खुलवाया। इसके बाद CFSL फॉरेंसिक टीम ने कमरे से सबूत जुटाए। केमिकल के इस्तेमाल से उन्हें होटल की फर्श पर खून होने की पुष्टि हुई।

इतना ही नहीं, होटल की लॉबी, लिफ्ट और गेट यानी कि ऊपर से नीचे तक खून के धब्बे मिले। ये संकेत हैं कि मनीष को कमरे के बाहर लिफ्ट और लॉबी में लाया गया था। जबकि SIT को जांच के दौरान कमरा नंबर 512 तक जाने वाली सीढ़ी और मुख्य गेट पर ही खून मिला था। इस दौरान मनीष गुप्ता के गुड़गांव के और गोरखपुर के 6 दोस्त भी मौजूद रहे। CBI टीम आगे की पूछताछ के लिए अभी मौजूद है। बुधवार को आरोपियों की न्यायिक हिरासत पूरी हो रही है।

खास केमिकल से खून होने के साक्ष्य मिले

सीबीआई अधिकारियों ने होटल के स्टाफ से भी पूछताछ की।
सीबीआई अधिकारियों ने होटल के स्टाफ से भी पूछताछ की।

4 घंटे की पड़ताल, फिर दोस्तों को भी बुलाया

CBI दूसरी बार गोरखपुर पहुंची है। सोमवार की सुबह होटल के मैनेजर और पुलिस वालों से पूछताछ की थी। साथ ही, मनीष गुप्ता के दोस्तों को मंगलवार की सुबह बुलाया था। इसके पहले सोमवार की रात में CBI की 6 सदस्यीय फॉरेंसिक टीम भी गोरखपुर पहुंच गई। इनके लिए पहले से एनेक्सी भवन में कमरा बुक कराया गया था। मंगलवार की सुबह से फोरेंसिक जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। फॉरेंसिक टीम के साथ 10.45 बजे CBI होटल कृष्णा पैलेस पहुंची।

टीम ने मनीष के गुड़गांव के दोस्त हरबीर और प्रदीप और गोरखपुर के दोस्त चंदन सैनी, राणा प्रताप व धनंजय को भी होटल में ही बुलाया था। पुलिस के पहरे में मौजूद कमरा नंबर 512 को CBI ने खुलवाया। फोरेंसिक टीम 2.40 बजे तक होटल में मौजूद रही।

इसी होटल में मनीष गुप्ता की पुलिस पिटाई से मौत हुई थी।
इसी होटल में मनीष गुप्ता की पुलिस पिटाई से मौत हुई थी।

कमरा नम्बर 512 के साथ ही होटल की सीढ़ी और लिफ्ट से भी टीम ने फॉरेंसिक नमूने लिए। लिफ्ट को चलाकर भी चेक किया। SIT ने अपनी जांच के दौरान सीढ़ी को प्लास्टिक से पैक किया था। लिफ्ट भी सील की गई थी। जिससे CBI को जांच में कोई दिक्कत नहीं हुई।

पुलिस जीप की भी हुई फॉरेंसिक जांच
यहां से सबूत इकट्ठा करने के बाद CBI की फॉरेंसिक टीम रामगढ़ ताल थाना पहुंची। यहां से पुलिस की उस जीप (बोलेरो UP 53 एजी 1354) से नमूने लिए। जिससे मनीष को होटल से हास्पिटल तक ले जाया गया था। यहां भी करीब 45 मिनट तक फॉरेंसिक टीम रही। जीप को सील कर रखा गया है। लम्बे समय से लॉक होने की वजह से जीप को खोलने में ही काफी समय लग गया। जीप के खुलने के बाद अंदर मौजूद सामानों से नमूने लेकर टीम ने फिर जीप को सील कर दिया। वहां से 4 बजे के करीब एनेक्सी भवन के लिए निकल गई। उधर, मनीष के दोस्तों को भी एनेक्सी भवन ही बुलाया गया था। करीब 1 घंटे बंद कमरे में पूछताछ हुई।

पुलिस की सील गाड़ी में मिला खून से सना कपड़ा
फॉरेंसिक टीम ने जो भी जांच की, उसकी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी हुई। पुलिस की जीप में रखा चार बॉडी प्रोटेक्ट, पानी का जार पीछे रखा मिला, बीच सीट के नीचे से टीम को एक कपड़े का टुकड़ा मिला। उस पर खून का धब्बा लगा हुआ था। सीट पर भी खून के छींटे थे। जिसे टीम ने संकलित कर लिया। टीम ने सभी सामानों की एक-एक कर फोटो लिया। वीडियोग्राफी कराई।

बुधवार को कोर्ट पेश होंगे आरोपी 6 पुलिस वाले
मनीष गुप्ता के हत्या में आरोपित बनाए गए सभी 6 पुलिस वालों की न्यायिक हिरासत 1 दिसम्बर को पूरी हो रही है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस दौरान CBI भी कोर्ट में मौजूद रहेगी। अब CBI उन्हें कोर्ट से अपने हिरासत में मांगती है। या फिर उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाने की अपील करती है। यह बुधवार को ही तय होगा। फिलहाल अभी तक CBI ने आरोपियों से पूछताछ नहीं की है।

यह था मनीष हत्याकांड

गोरखपुर के होटल कृष्णा पैलेस में कहासुनी के दौरान पुलिसकर्मियों ने मनीष की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।
गोरखपुर के होटल कृष्णा पैलेस में कहासुनी के दौरान पुलिसकर्मियों ने मनीष की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

कानपुर के बर्रा-3 निवासी मनीष गुप्ता 27 सितंबर की रात गोरखपुर के होटल कृष्णा पैलेस में ठहरे थे। उनके साथ गुरुग्राम निवासी दोस्त हरवीर सिंह और प्रदीप कुमार भी थे। देर रात रामगढ़ताल थाना प्रभारी जगत नारायण सिंह ने फोर्स के साथ होटल में छापेमारी की थी। आरोप है कि कहासुनी के दौरान पुलिसकर्मियों ने मनीष की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद मीनाक्षी की तहरीर पर गोरखपुर के रामगढ़ ताल थाना में इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, दरोगा अक्षय मिश्रा, दरोगा विजय यादव व तीन अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।

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