आतंकियों को लेकर में अलर्ट:गोरखपुर में भी छिपे हो सकते हैं आतंकी, किराएदारों का नहीं हुआ सत्यापन; पुलिस की सवेरा योजना भी हुई फेल

गोरखपुर5 महीने पहले
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SSP दिनेश कुमार प्रभु के निर्देश पर जिले भर में संदिग्धों की चेकिंग शुरू। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
SSP दिनेश कुमार प्रभु के निर्देश पर जिले भर में संदिग्धों की चेकिंग शुरू। (फाइल फोटो)

प्रदेश को दहलाने की योजना बनाकर लखनऊ में छिपे आतंकियों के पकड़े जाने के बाद गोरखपुर जोन में भी हाई अलर्ट जारी कर दिया है। यहां नेपाल व बिहार से लगने वाली सीमाओं से आतंकी घुसपैठ और आतंकियों के छिपे होने की आशंका पर जोन के एडीजी अखिल कुमार ने सभी 11 जिलों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

वहीं, आतंकी लखनऊ में भारी मात्रा में IED जैसे घातक विस्फोटक लेकर कई साल से बैठे थे। हालांकि, अब तक आतंकियों का गोरखपुर से कोई कनेक्शन नहीं निकला है। लेकिन सतर्कता के तौर पर SSP दिनेश कुमार प्रभु के निर्देश पर जिले भर में संदिग्धों की चेकिंग शुरू हो गई है।

सत्यापन होता तो पहले ही पकड़ लिए जाते आतंकी
राजधानी के दुबग्गा के जिस मकान से अलकायदा के आतंकी को पकड़ा गया। उससे महज एक किलोमीटर दूर ठाकुरगंज थानाक्षेत्र के हाजी कॉलोनी में 7 मार्च 2017 को ISI के खुरासान मॉड्यूल के आतंकी सैफुल्लाह को ATS ने ढेर किया था। सैफुल्लाह मलिहाबाद निवासी एक कारोबारी के हाजी कॉलोनी स्थित मकान में करीब छह महीने से किराए पर रह रहा था। इसकी भनक लोकल पुलिस को न लगने पर नाराजगी जताते हुए तत्कालीन डीजीपी जावेद अहमद ने राजधानी क्षेत्र में रहने वाले हर नागरिक की पहचान और उसकी नागरिकता से जुड़े प्रमाण थानों पर रखने का निर्देश दिया था। उन्होंने किरायेदारों के सत्यापन के लिए खास स्किम बनाई जिसके तहत पुलिस को घर-घर जाकर किरायेदारों का सत्यापन करना था। लेकिन यह योजना महज कागजी ही साबित हुई।

गोरखपुर में नहीं हुआ किराएदारों का सत्यापन
इसी क्रम में अभी बीते दिनों रोहिंग्या की तलाश के लिए गोरखपुर जोन के एडीजी ने भी किरायदारों के सत्यापन का निर्देश तो जारी किया, लेकिन पुलिस के सभी मामलों की तरह यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया। ऐसे में प्रदेश में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे गोरखपुर शहर में आतंकी छिपे होंगे, इस आशंका से कतई इंकार नहीं किया जा सकता। लेकिल यहां रात दिन गश्त का दावा करने वाली यूपी 112, थाना पुलिस और हर गतिविधि पर नजर रखने वाली LIU को इसके लिए फुरसत तक नहीं है।

सवेरा योजना भी फेल
हालांकि, प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद जब जावेद अहमद के बाद डीजीपी बने सुलखान सिंह ने इसमें एक कड़ी और जोड़ते हुए सवेरा योजना लांच की। इस योजना में पुलिस को हर मकान की छानबीन करके उसमें रहने वाले बुजुर्गों को चिन्हित कर उनकी हर पल मदद करनी थी। लेकिन यह योजना भी पुलिस के अन्य योजनाओं की तरह फेल साबित हुई

घुसपैठ का सबसे आसान रास्ता है भारत-नेपाल सीमा
ATS के हत्थे चढ़े आतंवादियों द्वारा खुलासे के बाद आशंका है कि उसका बिहार से भी संपर्क हो। सूत्रों के मुताबिक यूपी एटीएस की एक टीम बिहार भी पहुंच गई है। हाल के वर्षों में चार बड़े आतंकी विभिन्न राज्यों से लगी नेपाल सीमा से पकड़े गए। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि आतंकी घुसपैठ का सबसे आसान रास्ता भारत-नेपाल सीमा है। आतंकवाद को संरक्षण देने वाले पाकिस्तान के लिए भारत-नेपाल सीमा सबसे मुफीद साबित हो रही है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, नेपाल में पाकिस्तान एंबेसी आतंकियों के छिपने और रहने का प्रबंध करती है। भारत व नेपाल के बीच उपजे ताजा सीमा विवाद व तनाव के कारण नेपाल में ये गतिविधियां बढ़ गईं हैं।

भारत-नेपाल सीमा से पकड़े गए प्रमुख आतंकी

  • 1991 मे खालिस्तान एरिया फोर्स का डिप्टी कमांडर सुखबीर सिंह।
  • 1991 में ही नेपाल की बढ़नी सीमा पर खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट के भागा सिंह और अजमेर सिंह की गिरफ्तारी हुई थी।
  • 1993 में आतंकी टाइगर मेमन।
  • 1995 में ISI एजेंट यासिया बेगम।
  • 2000 में आसिम अली और चार आतंकी।
  • 2002 में परसामलिक थाने के पास कारतूसों का जखीरा पकड़ा गया था जो कि बिहार के एमसीसी उग्रवादियों ने नेपाल के माओवादियों के लिए भेजा था।
  • 2007 में लश्कर के आतंकी सादात रशीद मसूद आलम की गिरफ्तारी।
  • 2009 में मुंबई के आतंकी नूरबक्श और इश्तियाक उर्फ शैतान की गिरफ्तारी।
  • 2013 में आतंकी लियाकत अली शाह की गिरफ्तारी।
  • 2013 में आतंकी हमलों में 140 लोगों की हत्या के आरोपी और मोस्ट वॉन्टेड आंतकवादी यासीन भटकल की गिरफ्तारी।
  • अब्दुल करीम टुंडा को भी उत्तराखंड में नेपाल की खुली सीमा पर ही गिरफ्तार किया गया था।
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