योगी CM बने और खतरे में आ गई शहर सीट:पूरे कार्यकाल में हर मुद्दों पर सरकार की आलोचना करते रहे शहर विधायक, अपनी ही सरकार के खिलाफ ​चलाया आंदोलन

गोरखपुर7 महीने पहले
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अपने कार्यकाल के दौरान राधामोहन दास अग्रवाल का नाम पार्टी विरोधी गतिविधियों में बार- बार सामने आता रहा है। - Dainik Bhaskar
अपने कार्यकाल के दौरान राधामोहन दास अग्रवाल का नाम पार्टी विरोधी गतिविधियों में बार- बार सामने आता रहा है।

गोरखपुर विधानसभा से वर्ष 2002 से ही लगातार चार विधायक बनने वाले डॉ. राधा मोहन का टिकट योगी के लिए काट दिया गया। जबकि इस बात की भनक डॉ. राधा मोहन को उसी दिन हो गई थी जब योगी प्रदेश के सीएम बने थे। यही वजह है कि वर्ष 2017 में भाजपा से विधायक बनने के बाद भी 5 साल अपने कार्यकाल के दौरान राधामोहन दास अग्रवाल का नाम पार्टी विरोधी गतिविधियों में बार- बार सामने आता रहा है।

एक समय तो ऐसा भी आया कि जब भाजपा ने राधा मोहन को पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से ही कारण बताओ नोटिस तक जारी कर दिया था। आइए जानते हैं जिस राधा मोहन के लिए योगी आदित्यनाथ ने पूरी भाजपा से बगावत की थी, आखिर ऐसा क्या हुआ कि इनके रिश्ते में दरार पड़ गई।

​योगी को मिला टिकट सन्नाटा खींच लिए विधायक
बीते शनिवार को सीएम योगी का टिकट गोरखपुर सदर सीट से फाइनल हुआ। इसके बाद नगर विधायक ने बेहद नपा-तुला लिखित बयान जारी करके, उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि हम भाजपा के कार्यकर्ता हैं, इस निर्णय का स्वागत करते हैं। इसके बाद से ही नगर विधायक लोगों से दूरी बनाकर सन्नाटा खींच लिए। योगी के अयोध्या से चुनाव लड़ने की चर्चा से नगर विधायक को ये उम्मीद थी कि उनकी सीट सेफ है। यही सोचकर वह सोशल मीडिया के जरिए अपने चुनाव प्रचार में लगे रहे।

जिस दिन (15 जनवरी) मुख्यमंत्री योगी को शहर विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया गया, उस रात आठ बजे नगर विधायक को जनता से लाइव संवाद करना था। जैसे ही मुख्यमंत्री को प्रत्याशी घोषित गया, वैसे ही विधायक ने अपरिहार्य कारणों का हवाला देकर लाइव संवाद स्थगित कर दिया। डॉ अग्रवाल ने 16 जनवरी को सोशल मीडिया पर लिखा कि विधायक रहने या न रहने से सेवा प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने मानबेला खास में सड़क का निर्माण अपनी उपस्थिति में करवाया।

अखिलेश यादव के बयान पर नहीं दी प्रतिक्रिया
जबकि सोमवार को सपा में आमंत्रण के अखिलेश के बयान पर सवाल करने पर वे कुछ नहीं बोले। राजनीति के जानकार कहते हैं कि नगर विधायक राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं। वे नफा-नुकसान का आकलन कर रहे हैं। किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले सब कुछ तौल लेना चाहते हैं, फिर पत्ते खोलेंगे। वैसे भी टिकट कटने के बाद, नगर विधायक ने अपने स्वभाव के विपरीत प्रतिक्रिया दी है।

सांसद, विधायक ने किया राधा मोहन का विरोध
एक समय गोरखपुर के विधायक राधामोहन अग्रवाल को सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना लिखने पर भारतीय जनता पार्टी ने नोटिस थमाया था। उस समय गोरखपुर से सांसद व फ़िल्म अभिनेता रविकिशन ने तो उन्हें यहां तक कह दिया कि वे पार्टी छोड़ दें। साथ ही गोरखपुर की अन्य विधान सभाओं से भी जितने विधायक थे, वे भी राधा मोहन के खिलाफ विरोध दर्ज कराने लगे।

हालत ये थी कि भाजपा में रहकर भी राधा मोहन हर किसी को विपक्षी नजर आ रहे थे। इसके बाद भी सामने से तो नहीं लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से डॉ. अग्रवाल ने विरोध का जवाब देते हुए फेसबुक पर लिखा कि वो अभिमन्यु नहीं अर्जुन हैं, चक्रव्यूह में घुसना और उसे तोड़ना जानते हैं।

बंद कमरे में हुई मीटिंग और दूर हो गए गीले- शिकवे
पार्टी ने विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर डॉ. अग्रवाल को नोटिस भेजा। इसके बाद डॉ. अग्रवाल ने भाजपा कार्यालय जाकर अपना पक्ष भी रखा। सारी बातें दरकिनार कर इस मामले में बड़े नेताओं ने इंट्रेस्ट दिखाया और बंद कमरे में सीएम और गोरखपुर के सांसद समेत सभी विधायकों की एक मीटिंग बुलाई। इस मीटिंग में राधा मोहन भी थे। काफी देर मीटिंग चलने के बाद जब सांसद विधायक बाहर आए तो उनके स्वर बदले नजर आए और सारे गीले- शिकवे उसी दिन दूर हो गए।

कब- कब बागी बने नगर विधायक

  • कच्ची शराब के के विरोध में महिलाओं के साथ अपनी ही सरकार के खिलाफ दिए थे धरना, महिला पुलिस अधिकारी से भी भीड़े।
  • बीजेपी नेता और नगर विधायक से बात में यूपी में ठाकुरों की सरकार चली है का आडियो हुआ था वायरल।
  • मेडिकल कॉलेज रोड पर नाले का निमार्ण हो या फिर सड़कों का फोरलेन, वे ऐसे तमाम मामले में सरकार के कामों की आलोचना करते रहे।
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