नवरात्रि...दो दिनों के दौरे पर गोरखपुर पहुंचे CM योगी:गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में किए कलश स्थापना, गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने की मॉ शैलपुत्री की अराधना

गोरखपुर2 महीने पहले
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सीएम योगी ने सबसे पहले गुरु गोरक्षनाथ का दर्शन किया। साथ ही अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवैधनाथ की समाधि पर मत्था टेक उनका आर्शीवाद लिया। - Dainik Bhaskar
सीएम योगी ने सबसे पहले गुरु गोरक्षनाथ का दर्शन किया। साथ ही अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवैधनाथ की समाधि पर मत्था टेक उनका आर्शीवाद लिया।

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन आज दोपहर एक बजे सीएम योगी आदित्यनाथ गोरखपुर पहुंचें। यहां गोरखनाथ मंदिर पहुंचते ही सीएम योगी ने सबसे पहले गुरु गोरक्षनाथ का दर्शन किया। साथ ही अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवैधनाथ की समाधि पर मत्था टेक उनका आर्शीवाद लिया। मंदिर में पूजन- अर्चन कर सीएम सीधा वे मंदिर में मां शैल पुत्री की आराधना करने चले गए। गोरखनाथ मंदिर के गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ आज यहां के शक्ति पीठ में कलश की स्थापना किए।

अब सीएम के पहुंचने के बाद यहां गोरखनाथ मंदिर में एक कलश यात्रा निकाली गई।, इस यात्रा के बाद मंदिर परिसर में ही स्थित भीम सरोवर से कलश में जल भरा गया। उसके बाद सीएम योगी इस कलश को स्थापित किए। अपने इस दो दिवसीय दौरे के दौरान सीएम विकास कार्यों को लेकर एक समीक्षा बैठक भी की।

अपने इस दो दिवसीय दौरे के दौरान सीएम विकास कार्यों को लेकर एक समीक्षा बैठक भी की।
अपने इस दो दिवसीय दौरे के दौरान सीएम विकास कार्यों को लेकर एक समीक्षा बैठक भी की।

श्रीदेवी भागवत पाठ, महानिशा पूजा करेंगे पीठाधीश्वर
नवरात्र में यहां श्रीदेवीभागवत/दुर्गा शप्तशती का पाठ अनवरत चलेगा। इसके साथ ही देवी देवताओं के आवाह्न के साथ पूजन आरती हुई। हर दिन देवी के स्वरूप विशेष की विशिष्ट पूजा होगी। अष्टमी की रात्रि में गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महानिशा पूजन करते हैं। महानिशा पूजन को विशेष शक्ति पूजा समझा जाता है।

नौ दिन व्रत रहते हैं गोरक्षपीठाधीश्वर
नवरात्र में गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ नौ दिन व्रत रहते हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी यह सिलसिला जारी है। हालांकि, मुख्यमंत्री बनने के पहले वह अनवरत नौ दिन शक्ति की आराधना के दौरान मंदिर परिसर से बाहर नहीं निकलते थे।

मातृ स्वरूप में कन्याओं का पांव पखारते हैं योगी
नौ दिन व्रतोपासना की पूर्णाहुति हवन और कन्या पूजन से होती है। गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कन्याओं का मातृ स्वरूप में पूजन कर उनका पांव पखारते हैं। यह दृश्य देखने लायक होता है। इस अवसर पर बटुक भैरव के रूप में कुछ बालक भी शामिल होते हैं।

दशमी के जुलूस का रहता है इंतजार
नवरात्र पूर्ण होने पर विजयादशमी के दिन गोरक्षपीठाधीश्वर रथयात्रा जुलूस से मन्दिर से थोड़ी दूरी पर स्थित मानसरोवर मैदान जाते हैं और वहां पहले से चल रही रामलीला में प्रभु श्रीराम का राजतिलक करते हैं। इसी क्रम में विजयादशमी पर श्रद्धालुओं और शिष्यों द्वारा पीठाधीश्वर योगी जी का तिलक कर तिलकोत्सव की भी परंपरा रही है। हालांकि गत वर्ष कोविड प्रोटोकॉल के तहत यह नहीं हो पाया था।

दशमी के दिन दंडाधिकारी की भी भूमिका
गोरक्षपीठाधीश्वर विजयादशमी के दिन साधु-संतों के आपसी विवादों के समाधान के लिए दंडाधिकारी की भी भूमिका में होते हैं। गत विजयादशमी से लेकर इस विजयादशमी तक यानी वर्षभर के विवादों का योगी द्वारा सर्व स्वीकार्य निपटारा किया जाता है।

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