गोरखपुर टेरर फंडिंग:गोरखपुर के प्राइवेट बैंक का सिक्योरिटी गार्ड बन गया मास्टरमाइंड; जमानत पर छूटे मुशर्रफ के साथ मिलकर अजय ने दोबारा खड़ा किया था नेटवर्क

गोरखपुर3 महीने पहले
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टेरर फंडिंग का मास्टरमाइंड अजय सिंह उर्फ दिनेश सिंह ने रिमांड के दौरान अजय ने एक नहीं बल्कि कई चौकाने वाले खुलासे किए हैं। - Dainik Bhaskar
टेरर फंडिंग का मास्टरमाइंड अजय सिंह उर्फ दिनेश सिंह ने रिमांड के दौरान अजय ने एक नहीं बल्कि कई चौकाने वाले खुलासे किए हैं।
  • रिमांड के दौरान अजय सिंह उर्फ दिनेश सिंह ने एटीएस के सामने किए कई चौकाने वाले खुलासे
  • जिस बैंक में सिक्योरिटी गार्ड था अजय, उसी बैंक के कर्मचारियों की मदद से खुलवाता था अकाउंट

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से बीते सोमवार को पकड़ा गया टेरर फंडिंग का मास्टरमाइंड अजय सिंह उर्फ दिनेश सिंह को यूपी एटीएस ने 7 दिनों की ट्रांजिट रिमांड पर लिया है। इस दौरान अजय ने एक नहीं बल्कि कई चौकाने वाले खुलासे किए हैं। अजय इस मामले में वर्ष 2018 में पकड़े गए आरोपी मुशर्रफ अंसारी उर्फ निखिल राय उर्फ डब्लू के साथ मिलकर एक बार फिर से इस अवैध कारोबार का नेटवर्क खड़ा कर चुका है। मुशर्रफ फिलहाल जमानत पर रिहा चल रहा है। अजय के इस खुलासे के बाद एटीएस फिर से उसकी तलाश में जुट गई है।

बैंक कर्मचारियों की मदद से खुलवाता था अकाउंट
इसके अलावा भी अजय ने कई खुलासे किए हैं। बांसगांव का रहने वाला रमेश यहां रामगढ़ताल इलाके के शिवाजी नगर कॉलोनी में किराए का कमरा लेकर रहता है और वह एक प्राइवेट कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड का काम करता था। गिरफ्तारी के वक्त उसकी तैनाती शहर के एक प्राइवेट बैंक की सुरक्षा में लगाई गई थी। जहां कर्मचारियों की मिलीभगत से वह लोगों के फर्जी खाते खुलवाता था और उन खातों का इस्तेमाल फंडिंग के लिए करता था।

एटीएस के हाथ लगे 100 से अधिक बैंक खाते
इस दौरान अजय द्वारा पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर एटीएस उसे लेकर यूपी भर के विभिन्न शहरों में दबिश दे रही है। ताकि इस गैंग से जुड़े अन्य लोगों को भी पकड़ा जा सके। साथ ही अब तक 100 से अधिक ऐसे बैंक खातें टीम के हाथ लगे हैं, जिनके जरिए टेरर फंडिंग की रकम इधर से उधर की जाती थी। वहीं, उम्मीद यह भी है कि रिमांड के दौरान टीम अजय को लेकर गोरखपुर भी आ सकती है और उसके बताए गए ठिकानों और उससे जुड़े लोगों से भी पूछताछ कर सकती है।

मुशर्रफ के जमानत पर छूटने के बाद फिर खड़ा किया नेटवर्क
अजय ने पूछताछ में कबूल किया है कि टेरर फंडिंग का सरगना कहे जाने वाले रमेश शाह की गिरफ्तारी के बाद इस गैंग का कोई भी सदस्य बाहर नहीं बचा था। ऐसे में एक मात्र फरार आरोपी अजय ही बाहर था। इस बीच 2018 में पकड़े गए कई आरोपियों को जमानत मिल गई। इसमें मुशर्रफ अंसारी उर्फ निखिल राय उर्फ डब्लू भी जमानत पर जेल से छूट गया।

मुशर्रफ के जेल से बाहर आते ही अजय ने उससे संपर्क किया और दोनों ने मिलकर एक बार फिर से इस गैंग को खड़ा कर दिया। इस दौरान अजय ही इस गैंग का सरगना बन गया। दोनों मिलकर गरीब युवाओं को अपनी जाल में फंसाते थे और उन्हें रुपयों का लालच देकर उनके फर्जी दस्तावेजों पर बैंक खाते खुलवाते थे।

बैंक कर्मचारियों से भी पूछताछ करेगी एटीएस
चूंकी अजय खुद एक प्राइवेट बैंक में बतौर सिक्योरिटी गार्ड काम करता था, तो वे वहां के कर्मचारियों से मिलकर लोगों के बैंक खाते आसानी से खुलवा देता था। अब यूपी एटीएस एक बार फिर इस गैंग की कमर तोड़ने में जुट गई है। एटीएस जल्द ही शहर के उस प्राइवेट बैंक के कर्मचारियों से भी पूछताछ कर सकती है, जहां अजय काम करता था। साथ ही मुशर्रफ की भी तलाश शुरू हो गई है।

क्या है मामला?
दरअसल, बीते सोमवार को यूपी एटीएस ने यहां रामगढ़ताल इलाके के शिवाजी नगर कॉलोनी में रहने वाले अजय सिंह उर्फ दिनेश सिंह को टेरर फंडिंग के मामले में गिरफ्तार किया था। अजय बांसगांव इलाके के मरवटियां वार्ड नंबर 3 का रहने वाला है। यहां वह किराए का कमरा लेकर रहता था। वह वर्ष 2018 में गोरखपुर से टेरर फंडिंग के मामले में नामजद आरोपी था। तभी से वह फरार चल रहा था। 2018 में भी यूपी एटीएस ने इस मामले में गोरखपुर से 7 और यूपी के विभिन्न शहरों से 4 अन्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था।

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