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गोरखपुर का लॉक वाला गांव:सेकेंड वेव में मौत का ऐसा तांडव दिखा कि थर्ड वेव की आहट में गांव छोड़ गए लोग, घरों में लगे हैं ताले

गोरखपुर21 दिन पहले

देश में कोरोना केसेज बढ़ने के साथ थर्ड वेव का खौफ किस कदर बढ़ रहा है, इसकी मिसाल है गोरखपुर जिले का गौनर गांव। चौरी-चौरा इलाके के इस गांव ने पिछले साल सेकेंड वेव के दौरान मौत का ऐसा खौफनाक मंजर देखा था कि अब थर्ड वेव की आहट के साथ ही यहां गलियों में दहशत पसर गई है।

गांव में सेकेंड वेव के दौरान 60 दिन में 130 लोगों की मौत हुई थी। उसी दौरान कई मकानों पर ताला लग गया था। अब दोबारा केस बढ़ने के साथ ही कई और परिवार घरों पर ताला लगा गांव छोड़ गए हैं। दुकानदारों ने अघोषित लॉकडाउन लगा दिया है और बहुत जरूरी होने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं।

सेकेंड वेव के दौरान हर टोले से उठी थी अर्थियां

इंटर कॉलेज सामान्य दिनों में छात्रों से गुलजार नजर आता था, लेकिन अब ये बंद पड़ा है।
इंटर कॉलेज सामान्य दिनों में छात्रों से गुलजार नजर आता था, लेकिन अब ये बंद पड़ा है।

चौरी-चौरा के सरदारनगर ब्लॉक के गांव गौनर की कुल आबादी करीब 15 हजार है। गांव में कुल 18 टोले हैं। कोरोना की दूसरी लहर में इस गांव का एक भी टोला नहीं बचा, जहां 2-3 अर्थियां न उठी हों। दूसरी लहर के दौरान यहां 20 दिन के अंदर गांव में 40 से अधिक मौतें हुईं।

ग्रामीणों के मुताबिक यहां करीब 60 दिनों के अंदर 130 मौतें हुईं। मौतों के इस तांडव से लोग ऐसे सहम गए कि कई परिवारों ने गांव ही छोड़ दिया। उस समय कमिश्नर को पूरे प्रशासनिक अमले और स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ यहां कैंप करना पड़ा था। फिर भी दहशत ऐसी है कि उस वक्त गए कई लोग आज भी नहीं लौटे हैं। आज आलम ये है कि गांव के 40 से 50 घरों में ताला लगा हुआ है।

गलियां सूनी पड़ी हैं, दुकानों पर अघोषित लॉकडाउन

गांव में लोगों के जाने के बाद बाजार खुद-ब-खुद बंद हो चुके हैं।
गांव में लोगों के जाने के बाद बाजार खुद-ब-खुद बंद हो चुके हैं।

सुबह हो या दोपहर, इस गांव में सन्नाटा छाया रहता है। गांव के बगीचे से लेकर तालाब पर लगने वाली चौपाल बंद हो गई हैं। गांव की गलियों में बच्चों का खेलना भी बंद हो गया। अधिकांश दुकान वालों ने खुद ही लॉकडाउन लगा लिया है। घरों के बाहर मवेशियों के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा। बहुत जरूरी होने पर ही यहां के लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। सिर्फ कुछ लोग यहां खेतों में काम करते या फिर आते-जाते दिख जाते हैं।

महीनों नहीं जला था चूल्हा, पेड़ पर नहीं बची थी मटका बांधने की जगह
गांव वाले आज भी कोरोना की सेकेंड वेव का खौफ भूले नहीं हैं। बताते हैं कि उन्हें आज भी वो दिन याद है जब महीनों इस गांव में चूल्हा तक नहीं जला था। मौत का ऐसा कहर देखने को मिला था कि आधे लोग घर पर तो आधे श्मशान पर होते थे। गांव के रहने वाले कृष्ण प्रताप बताते हैं कि सेकेंड वेव की मौतों के खौफ से उसी वक्त करीब 50 से अधिक परिवारों ने गांव छोड़ दिया था।

गांव की आमना खातून कहती हैं कि हमने यहां ऐसी तबाही देखी है, जिसे कभी भूला नहीं जा सकता। वहीं, अरविंद कुमार कहते हैं कि यहां गांव के तालाब के पास एक पीपल का पेड़ है। जहां गांव में हो रही मौतों के संस्कार के लिए एक साथ इतने मटके बांधे गए थे कि पेड़ की डाल तक टूट गई थी। दाह संस्कार के लिए लकड़ी तक का अकाल था।

प्रशासन पर गुस्सा...सेकेंड वेव के बाद नहीं हुई सफाई

गांव की इस चौपाल पर लोगों की भीड़ जुटा करती थी, लेकिन घरों से लोगों के जाने के बाद चौपाल भी खाली है।
गांव की इस चौपाल पर लोगों की भीड़ जुटा करती थी, लेकिन घरों से लोगों के जाने के बाद चौपाल भी खाली है।

ग्रामीणों में प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गुस्सा भी है। उनका कहना है कि सेकेंड वेव खत्म होने के बाद कभी न गांव में सफाई हुई और न ही छिड़काव। प्रधान ने किसी तरह कैंप लगवाकर लोगों का वैक्सीनेशन जरूर कर दिया। लेकिन यह नाकाफी है।

स्पेशल कैंप लगवाकर हो रहा वैक्सीनेशन, डीएम अब भेजेंगे टीम
गौनर गांव की स्थिति पर डीएम विजय किरन आनंद ने कहा कि अगर ऐसा है तो यह गंभीर विषय है। कोरोना को लेकर जागरूकता की जरूरत है, लेकिन इसके लिए घर छोड़कर चले जाना विकल्प नहीं है। एक टीम गठित कर गांव की स्थिति जानने के लिए भेजी जाएगी। संबंधित विभाग को निर्देशित कर इस गांव में विशेष ध्यान रखने के निर्देश दे दिए गए हैं। गांव में स्पेशल कैंप लगवाकर वैक्सीनेशन पर भी जोर दिया जा रहा है।

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