पढ़िए...गोरखपुर की हत्यारी महिलाओं की कहानी:प्यार के लिए किया रिश्तों का कत्ल, फिर भी हासिल नहीं हुई मोहब्बत

गोरखपुर4 महीने पहले
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कोई प्रेमी से अलग जेल में बंद हैं, तो किसी को सजा हो चुकी है। वहीं, कोई जेल के बाहर हैं और दूसरी जगह उनकी शादी हो गई है। - Dainik Bhaskar
कोई प्रेमी से अलग जेल में बंद हैं, तो किसी को सजा हो चुकी है। वहीं, कोई जेल के बाहर हैं और दूसरी जगह उनकी शादी हो गई है।

प्यार अंधा होता है, ऐसा तो आपने सुना ही होगा। लेकिन प्यार में आकर जब रिश्तों का कत्ल होने लगे तो फिर इसे प्यार नहीं पागलपन ही कहेंगे। ऐसे एक नहीं बल्कि कई मामले यूपी के गोरखपुर में भी सामने आ चुके हैं। आज हम आपको गोरखपुर की उन तीन हत्यारी महिलाओं की कहनी बता रहे हैं, जिन्होंने प्यार के लिए सिर्फ रिश्तों का ही कत्ल नहीं किया बल्कि मां की ममता का भी गला घोंट दिया।

लेकिन इसके बाद भी उन्हें अपनी मोहब्बत हासिल नहीं हो पाई। कोई प्रेमी से अलग जेल में बंद हैं, तो किसी को सजा हो चुकी है। वहीं, कोई जेल के बाहर हैं और दूसरे जगह उनकी शादी हो गई है। अब उन्हें अपने किए पर ऐसा पछतावा है कि ये जेल से बाहर भी नहीं आना चाहती हैं और जेल को ही अपनी जिंदगी और घर मान लिया है और अब वे यहीं खुद के मौत का इंतजार कर रहीं हैं।

कलयुगी मां का दिल नहीं पसीजा और उसने खुद अपने हाथ से बेटे की गला दबाकर हत्या कर दी।
कलयुगी मां का दिल नहीं पसीजा और उसने खुद अपने हाथ से बेटे की गला दबाकर हत्या कर दी।

हत्यारे ने पूछा बेटे को छोड़ दें, मां ने लाल को उतारा मौत के घाट
शाहपुर इलाके के अशोकनगर की अर्चना सिंह ने 5 जनवरी 2016 की रात अपने प्रेमी फिरोजाबाद निवासी शिक्षक अजय यादव को ट्रेन से बुलाया। उसे अपने कमरे में छिपा दिया। रात में पति के सोने के बाद प्रेमी के साथ संबंध बनाया और भोर में पति नेत्र चिकित्सक डॉ ओमप्रकाश यादव की हथौड़े से मार कर हत्या कर ​दी। इस दौरान उसका 5 साल का मासूम बेटा नितिन उठ गया और रोते हुए मां की गोद में आ गया। प्रेमी को बच्चे पर दया आ गई वह अर्चना को बोला कि इसे रहने दो। लेकिन उस कलयुगी मां का दिल नहीं पसीजा और उसने खुद अपने हाथ से बेटे की गला दबाकर ​हत्या कर दी। प्रेमी को घर से भगा दिया और देर सुबह तक सोती रही।

4 साल बाद जनवरी 2020 में अर्चना व उसके प्रेमी को आजीवन कारावास व 65 हजार अर्थदंड की सजा हुई।
4 साल बाद जनवरी 2020 में अर्चना व उसके प्रेमी को आजीवन कारावास व 65 हजार अर्थदंड की सजा हुई।

अखिलेश यादव का करीबी था प्रेमी
बाद में पुलिस ने अर्चना और प्रेमी अजय यादव को पकड़ा और केस दर्ज कर जेल भिजवा दिया। शहरवासियों का गुस्सा उस समय इतना ज्यादा था कि कचहरी और जेल में दोनों की पिटाई हो गई। घटना के ठीक 4 साल बाद जनवरी 2020 में अर्चना और उसके प्रेमी को आजीवन कारावास और 65 हजार अर्थदंड की सजा हुई। जुर्माना न भरने पर 3 माह की अतिरिक्त सजा भी काटनी पड़ी। अर्चना का भाई पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सुरक्षा में तैनात था। वह अक्सर मायके जाती थी तो प्रेमी अजय से मिलती थी। अजय से उसका प्यार फेसबुक के जरिए हुआ था। अजय के अपने फेसबुक वाॅल पर लगाये गए मुलायम सिंह यादव आदि के साथ अपनी फोटो से वह प्रभावित हुई थी।

परिवार ने भी तोड़ दिया रिश्ता
जेल जाने के बाद अर्चना से मिलने कोई नहीं पहुंचा। वह डिप्रेशन में चली गई, उसकी काउंसलिंग कराई गई। सजा के बाद उसे हाईकोर्ट में अपील के लिए निशुल्क वकील दिया गया लेकिन उसने इंकार कर दिया और अपील नहीं की। अब वह जेल में ही रहना चाहती है। उसे वर्तमान में लिवर की बीमारी है। वह जेल में झाड़ू व साफ सफाई का काम करती है। उसका प्रेमी अजय भी साफ सफाई करता है। अर्चना ने हाल ही में छठ व करवा चौथ का व्रत भी रखा था। यह प्यार के लिए पति और बेटे को मारने की पहली घटना थी। शहर के लोग हतप्रभ थे। इसके बाद कई पत्नियों ने प्यार के चक्कर मे अपने पतियों को मौत की नींद सुला दी।

सुषमा सिंह ने ब्वॉयफ्रेंड डब्लू सिंह के साथ मिलकर पति 35 वर्षीय विवेक प्रताप सिंह की हत्या कर दी।
सुषमा सिंह ने ब्वॉयफ्रेंड डब्लू सिंह के साथ मिलकर पति 35 वर्षीय विवेक प्रताप सिंह की हत्या कर दी।

पति को मारकर प्रेमी ने पूछा- बेटे को भी मार दूं, पत्नी बोली- ये तेरा ही तो है
गोरखपुर में 22 अप्रैल 2017 की रात कैंट इलाके के कूड़ाघाट विशुन पुरवा निवासी सुषमा सिंह ने ब्वॉयफ्रेंड डब्लू सिंह के साथ मिलकर पति 35 वर्षीय विवेक प्रताप सिंह की हत्या कर दी। पकड़े गए डब्लू ने बताया कि महिला ने मेरे साथ मिलकर अपने पति की हत्या की।

उसके बेटे ने हत्या करते हुए देख लिया जिसके बाद वह उसको मारने जा रहा था तो सुषमा ने बोला कि वह उसका ही बेटा है। व‍िवेक की पत्नी सुषमा सिंह का अपने मायके के कामेश्वर सिंह उर्फ डब्लू सिंह से शादी से पहले करीब 12 साल तक अफेयर रहा। यही नहीं, डब्लू अक्सर मोहल्ले में भी दिखाई देता था और कई बार व‍िवेक और उनके परिजनों की गैर मौजूदगी में सुषमा के घर भी आता था। इसकी जानकारी व‍िवेक को भी हो गई थी और उसने पत्नी पर कड़ा पहरा बिठा दिया था।

बेटे ने खोला था राज
पूरी प्लान‍िंग के तहत ही 22 अप्रैल की रात डब्लू अपने गांव के सोनू, राधेश्याम सिंह और अनिल मौर्या के साथ कैंट इलाके के विशुनपुरवा गांव स्थ‍ित व‍िवेक के घर पहुंचा और सुषमा की ही मदद से उसने व‍िवेक की सोते समय ईंट से कुचलकर हत्या कर दी।

ज‍िस समय वारदात को अंजाम द‍िया गया, कमरे में सुषमा का बेटा आरुष (6) मौजूद था। उसने पूरी घटना की जानकारी बुआ को दी। आरुष ने बुआ से बताया की रात में मम्मी ने दरवाजा खोला तो 3 अंकल कमरे घुस आए। मैंने चिल्लाने की कोश‍िश की तो मेरा मुंह दबा दिया। इसके बाद उन लोगों ने पापा का गला दबाया। फ‍िर उन्हें बेड से नीचे उतारकर ईंट से मारा। पापा के बहुत खून निकल रहा था। इसके बाद वो लोग पापा को कहीं ले गए और मम्मी जमीन पर पर गिरा खून साफ करने लगीं। इसी दौरान पुल‍िस आ गई। रात में हुई इस घटना की जानकारी परिवार के किसी सदस्य को नही हुई।

प्रेमी और उसके साथी शव को बोरे में भर कर ले जा रहे थे कि इस बीच पुलिस की नजर पड़ी शक के आधार पर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।
प्रेमी और उसके साथी शव को बोरे में भर कर ले जा रहे थे कि इस बीच पुलिस की नजर पड़ी शक के आधार पर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।

हत्या का हादसा साबित करना चाहती थी सुषमा
उधर सुषमा घटना को दुर्घटना का रूप देने के लिए शव सड़क पर फेंकवा रही थी। उसका प्रेमी और उसके साथी शव को बोरे में भर कर ले जा रहे थे कि इस बीच पुलिस की नजर पड़ी शक के आधार पर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। बोरे में शव मिलने के बाद सनसनी फैल गई। सुषमा का प्रेमी डब्लू घटना के 1 महीने पहले ही जेल से छूटा था। वो हत्या के आरोप में जेल में था। उस पर हत्या और लूट के करीब 12 से अधिक केस हैं। वह खूंखार बदमाश चंदन सिंह के गिरोह का मेंबर है। चंदन भी जेल में बंद है। अब उसे दूसरी जेल में बंद है। वही सुषमा गोरखपुर जेल में ही है। उससे भो कोई मिलने नही जाता। वह भी करवा चौथ और छठ व्रत रहती है।

प्रेमी के लिए रुंधा ने करा दिया पति और देवर का कत्ल
4 मार्च 2018 को सिद्धार्थनगर जिले के गुजरवलिया गांव की रहने वाली महिला रूंधा ने प्रेमी के साथ रहने के लिए पति विजय सिंह और देवर दिनेश की हत्या करा दी। वारदात के बाद पहचान छुपाने के लिए प्रेमी और उसके साथियों ने दोनों का शव पेट्रोल से जलाकर सहजनवां क्षेत्र में हाईवे किनारे फेंक दिया। सहजनवां पुलिस ने शव का शिनाख्त कर घटना में शामिल रूंधा उसके प्रेमी समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर घटना का पर्दाफाश किया। तबसे रुंधा और उसका प्रेमी गोरखपुर जेल में ही हैं।

जिस पति ने पढ़ा कर शिक्षिका बनवाया, प्रेमी के लिए ले ली उसी की जान
3 अप्रैल 2018 को चिलुआताल के जंगल नकहा नंबर दो कोइलहिया निवासी हार्डवेयर व्यापारी विनोद की हत्या उसकी पत्नी आशा ने प्रेमी अनूम मोदनवाल के साथ कि थी। दरअसल शादी के बाद विनोद ने पत्नी आशा को पढ़ाया उसे सरकारी शिक्षिका बनावाया। शिक्षिका आशा का पिपराइच के आलू व्यापारी अनूम मोदनवाल से स्कूल आते-जाते समय प्रेम हो गया था। प्रेमी ने उसके आने जाने के लिए ऑटो बुक करा दिया। आशा ने प्रेमी और ऑटो चालक की मदद से मिलकर दो अप्रैल की रात में घर के पास पति विनोद की हत्या कर दी थी। अब जेल में आशा करवा चौथ व्रत रहती है।

पैसों के साथ रज्जाक को हासिल करने की सनक में हनीफ की पत्नी ने उसकी हत्या की साजिश रची।
पैसों के साथ रज्जाक को हासिल करने की सनक में हनीफ की पत्नी ने उसकी हत्या की साजिश रची।

पति के दोस्त से हुआ प्यार, पति को उतारा मौत के घाट
27 नवम्बर 2017 को चिलुआताल निवासी मोहम्मद हनीफ की हत्या भी उसकी पत्नी शायरा खातून ने प्रेमी रज्जाक के साथ मिलकर ईंट से कुचकर किया था। दरअसल मृतक हनीफ राजमिस्त्री था। जबकि उसका दोस्त रज्जाक उसे ठेके पर काम दिलाया करता था। काम के सिलसिले में रज्जाक अक्सर हनीफ के घर आया करता था। इस बीच रज्जाक और हनीफ की पत्नी के नाजायज रिश्ते कायम हो गये। वहीं कुछ दिनों पहले हनीफ ने 25 लाख में अपनी जमीन बेची थी। इन पैसों को हनीफ ने बैंक में अपनी पत्नी के साथ संयुक्त खाते में जमा कराया था। पैसों के साथ रज्जाक को हासिल करने की सनक में हनीफ की पत्नी ने उसकी हत्या की साजिश रची।

दिलचस्प बात ये है कि रज्जाक हत्या को अंजाम देने से पहले दिल्ली चला गया था। इतना ही नहीं दिल्ली जाकर रज्जाक ने अपना मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर दिया था। 27 नवबंर की शाम को बगैर किसी को बताये वापस गोरखपुर लौटा था। वहीं, हनीफ को नये मोबाइल नंबर से फोन कर के चिलुआताल थाना के चकिया शुक्ला के पास बंधे पर बुलाया था। जहां रज्जाक ने हनीफ को गांजा पिलाया। इसके बाद ईंट से सिर कूचकर हत्या को अंजाम दे दिया और रज्जाक वापस दिल्ली लौट गया। अब दोनों जेल में हैं।

फूफा से इश्क में ले ली पति की जान
27 नवंबर 2020 को गोरखपुर के गोरखनाथ निवासी क्लीनिक कर्मचारी ओंकार उपाध्याय की हत्या भी उसकी पत्नी नीलम ने कराया था। क्योंकि उसे अपने फूफा से ही इश्क हो गया था। शादी के पहले से ही पत्नी नीलम का अपने सगे फूफा बांसगांव निवासी रामअशीष मिश्र से अवैध संबंध था।शादी के बाद भी यह जारी रहा। पति को इस बात की भनक लग गई थी और वह उनके बीच रोड़ा बन रहा था। इसी वजह से दोनों ने साजिश रची और फिर फूफा ने हत्या कर दी। नीलम से रामअशीष की बातचीत हुई थी और उसके बाद ही नीलम ने पति को फूफा को लाने के लिए कहा था। घर पर उसने झूठ बोल दिया था कि दोस्त के जीजा आने वाले हैं।

सिर पर मार की थी पति की हत्या
ओंकार ने रामअशीष को बाइक पर बैठा लिया तो रास्ते में पेशाब करने के बहाने रामअशीष ने रोका और फिर कहा कि हेलमेट उतारो, देख लूं तुम ओंकार ही हो ना। इस पर ओंकार हंसते हुए हेलमेट उतार दिया और जैसे ही उसने हेलमेट उतारा साथ में लाए खल बट्टे से रामअशीष ने सिर पर वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद ओंकार का शव गीडा के गाहासांड के पास मिला था। पत्नी नीलम और प्रेमी फूफा ने घटना के लिए दो नए सिम खरीदे थे। जिसपर घटना की रात लगातार बात हो रही थी। नीलम और ओंकार की शादी 10 वर्ष पूर्व हुई थी। दोनो के 6 और 5 साल के बच्चे हैं। अब दोनों जेल में हैं और दोनों से कोई मिलने नहीं आता।

पता चला कि शिखा जिंदा है और उसने प्रेमी के साथ रहने के लिए एक निर्दोष महिला को मौत के घाट उतार दिया।
पता चला कि शिखा जिंदा है और उसने प्रेमी के साथ रहने के लिए एक निर्दोष महिला को मौत के घाट उतार दिया।

खुद को मरा साबित करने के लिए कर दी किसी और की हत्या
वर्ष 2011 में गोरखपुर के कैंट इलाके के इंजीनियरिंग कालेज में एक सनसनीखेज वारदात हुई। जंहा एक युवती की लाश मिली। लाश का सिर कुंच दिया गया था। कपड़ो से उसकी पहचान शिखा दुबे के रूप में हुई। घटना ने लोगो को हैरान कर दिया था और जब मामले का खुलासा हुआ तो लोग और हतप्रभ रह गए थे क्योंकि पता चला कि शिखा जिंदा है और उसने प्रेमी के साथ रहने के लिए एक निर्दोष महिला को मौत के घाट उतार दिया।

उसे अपने कपड़े पहना दिए थे ताकि लोग समझें कि वह मर गयी और वह प्रेमी के साथ रह सके। शिखा और प्रेमी उसके सहयोगी जेल गए। कई बार शिखा ने पत्र लिखकर जेल में ही प्रेमी के साथ रहने की गुहार लगाई लेकिन मंजूर नही हुआ। लेकिन शायद भगवान को भी दोनो का साथ नही पसंद था। जेल से छूटने के बाद दोनो की अलग-अलग शादी हो गयी। घटना के बाद शिखा को मरा समझ कर उसके पिता रामप्रकाश दुबे ने दाह संस्कार भी कर दिया था। लेकिन वह प्रेमी के साथ सोनभद्र में रह रही थी लेकिन पकड़ी गई।

11 जून 2011 को गोरखपुर सिंघाड़िया में एक युवती की लाश मिली थी।
11 जून 2011 को गोरखपुर सिंघाड़िया में एक युवती की लाश मिली थी।

2011 में हुई थी घटना
बता दें कि 11 जून 2011 को गोरखपुर सिंघाड़िया में एक युवती की लाश मिली थी। उसकी कद काठी और उम्र से पता चला कि वह इंजीनियरिंग कॉलेज के कमलेशपुरम कॉलोनी इलाके से गायब युवती शिखा दुबे है। उसके पिता को बुलाया गया, घरवाले, रिश्तेदार भी जुटे सबने माना लाश शिखा की ही है। इस दौरान पिता राम प्रकाश दुबे ने पड़ोसी दीपू पर हत्या की आशंका जताई और केस दर्ज करा दिया। पुलिस जांच करने पहुंची तो पता चला दीपू भी घर से गायब है। जांच के दौरान पुलिस को खबर मिली कि आरोपी दीपू सोनभद्र में है। सोनभद्र पहुंचकर पुलिस टीम के सामने एक हैरान करने वाला सच दिखा। वहां केवल दीपू ही नहीं शिखा भी मौजूद थी।

शिखा ने बताया कि उसे पड़ोसी दीपू यादव (26) से प्यार हो गया था। दोनों को पता था कि उनके घरवाले इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं होंगे।
शिखा ने बताया कि उसे पड़ोसी दीपू यादव (26) से प्यार हो गया था। दोनों को पता था कि उनके घरवाले इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं होंगे।

पुलिस के भी छूट गए थे पसीने
पुलिस दोनों को गिरफ्तार कर गोरखपुर लाई। यहां आने के बाद शिखा ने एक ऐसी कहानी सुनाई कि पुलिस भी हैरान रह गई। शिखा ने बताया कि उसे पड़ोसी दीपू यादव (26) से प्यार हो गया था। दोनों को पता था कि उनके घरवाले इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं होंगे। ऐसे में दोनों घर से भागने और परिजनों से पीछा छुड़ाने के लिए एक खतरनाक साजिश रची। दोनों ने तय किया कि शिखा की कद काठी की किसी महिला की हत्या कर उसे शिखा की पहचान दे दी जाए। इस साजिश में दीपू का दोस्त सुग्रीव (35) भी शामिल था जो ट्रांसपोर्ट कारोबार था। उसका अक्सर सोनभद्र जिले जाना होता था, वहां वह एक ऐसी लड़की को जानता था, जो कद-काठी में शिखा से बहुत मिलती थी।

उसका नाम पूजा (25) था। पूजा तीन साल की बच्ची की मां थी। दीपू और सुग्रीव उसे गोरखपुर में 3 हजार रुपये की नौकरी के बहाने ले आए। सुग्रीव 10 जून की रात में पूजा को ट्रक से कूड़ाघाट लाया और उधर, शिखा- दीपू के साथ घर से भागकर कुसम्ही जंगल पहुंच गई। जंगल में ट्रक में सवार पूजा को शिखा ने वह कपड़ा पहना दिए, जिसे पहनकर वह घर से निकली थी।

ऐसे की थी प्लानिंग
इतना ही नहीं उसके गले में एक धागा डाला गया जो शिखा हमेशा पहनती थी। इसके बाद ट्रक में ही पूजा की हत्या कर दी गई। इस कत्ल में ट्रक का खलासी बलराम भी चंद रुपये के लालच में शामिल हो गया। हत्या के बाद सबने पूजा की लाश का चेहरा धारदार हथियार से इस कदर बिगाड़ दिया कि चेहरे से असल की पहचान ना हो सके। फिर सिंघड़िया के पास लाकर शव को फेंक दिया गया। इस हत्या का आरोपी बनाते हुए पुलिस ने शिखा और दीपू को जेल भेज दिया, बाद में दोनों जमानत पर रिहा हो गए और जेल से बाहर के आने के बाद दोनों अलग-अलग शादी करके अपनी एक अलग ही दुनिया बसा लिए हैं।

शिखा की शादी लुधियाना में तो दीपू की शादी गोरखपुर में हुई है। दोनो के अपने अपने बच्चे भी हैं। फिलहाल केस अदालत में अभी भी चल रहा है। उधर इस पूरी घटना में निर्दोष पूजा की मौत हो गयी और उसकी मासूम बेटी अनाथ हो गयी। यह घटना अपने आप मे उस समय की दहला देने वाली थी। सबकुछ फिल्मी स्टाइल में हुआ। फिल्मों को देखकर ही प्लान बनाया गया था। लेकिन अपराध कभी छिपता नही। इस घटना का नाट्य रूपांतरण क्राइम पेट्रोल आदि जैसे कई धारावाहिकों में चला।

पति की हत्या में जेल बंद हैं 20 से अधिक महिलाएं
वर्तमान में गोरखपुर जेल में लगभग 2300 बंदी हैं। इसमे 95 के करीब महिला बंदी भी हैं। इन महिला बन्दियों में 20 के करीब प्रेम के चक्कर मे पतियों को मौत के घाट उतारने वाली महिलाएं भी बन्द हैं। जो जेल में एक साथ रहती हैं। इनमें रुंधा पत्‍‌नी विजय सिंह, अर्चना पत्नी डा.ओम प्रकाश, सुषमा सिंह, पत्नी विवेक सिंह, शायरा खातून पत्नी मोहम्मद हनीफ, मनीता देवी पत्नी राजदेव, पुष्पाजलि देवी पत्नी विनोद, नीलम उपाध्याय पत्नी ओंकार, आशा पत्नी विनोद आदि हैं।