गोरखपुर बना 'जल...पुर', जोखिम में जान:304 गांवों का बाढ़ से हाल-बेहाल, अचानक पलटी 'जुगाड़ की नाव' और बुआ- भतीजे की गई जान; दहशत में ग्रामीण

गोरखपुर2 महीने पहले
  • प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों के करीब 304 गांवों में 405 से ज्यादा नाव लगाने का दावा
  • 400 से 500 रुपए में बिकने वाला पुराना ट्यूब इन दिनों 600 से 800 रुपए में बिक रहा

उत्तर प्रदेश का गोरखपुर अब 'जल पुर' बन गया है। बाढ़ की भयावह स्थिति ने यहां लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शहर के घरों में कमर से ऊपर तक पानी भर गया है। बांध पर छोटे बच्‍चे और मवेशियों के साथ शरण लिए लोग बारिश और मुश्किलों को झेल रहे हैं।

शहर में आने वाले सभी रास्तों पर बाढ़ का पानी चढ़ने से रास्ते बंद होते जा रहे हैं। वहीं, प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों के करीब 304 गावों में 405 से ज्यादा नाव लगाने का दावा किया गया है। यहां मगर 'जुगाड़ की नाव' की नाव ही इस मुश्किल घड़ी में लोगों का सहारा बनी है।

इसी बीच शनिवार की रात करीब 8 बजे खजनी इलाके के महुआडाबर में एक जुगाड़ की नाव पलट गई। हादसे में 32 साल की महिला और उसके 8 साल के भतीजे की डूबकर मौत हो गई। हालांकि, दोनों को ग्रामीणों ने बचाने की काफी कोशिश की थी।

यहां 'जुगाड़ की नाव' ही इस मुश्किल घड़ी में लोगों का सहारा बनी है।
यहां 'जुगाड़ की नाव' ही इस मुश्किल घड़ी में लोगों का सहारा बनी है।

नाव से घर जा रहे थे बुआ- भतीजे
मुआडाबर निवासी मकसूदन निषाद की बेटी पिंकी निषाद (32) अपने भतीजे विवेक निषाद (8 साल) सहित अन्य के साथ शनिवार की रात करीब 8 बजे नाव से घर की तरफ जा रही थी। तभी गांव के पास ही उनकी नाव पलट गई। नाव में सवार अन्य लोगों ने तो कूद कर जान बचा ली। मगर पिंकी और उसका भतीजा पानी में डूब गया। गांव के लोगों ने उन्हें किसी तरह से तलाश कर बाहर निकाला, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत बताया।

प्रभावित गांवों में 405 नाव और 50 मोटर बोट लगाने का दावा किया गया है, लेकिन यहां लोग ट्यूब और थर्माकोल से बने जुगाड़ का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।
प्रभावित गांवों में 405 नाव और 50 मोटर बोट लगाने का दावा किया गया है, लेकिन यहां लोग ट्यूब और थर्माकोल से बने जुगाड़ का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।

दावों से अलग है गांवों की हकीकत
सरकारी आंकड़ों में अब तक 304 बाढ़ से प्रभावित गांवों में 405 नाव और 50 मोटर बोट लगाने का दावा किया गया है, लेकिन बाढ़ ग्रस्त इलाकों की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। हालत यह है कि गोरखपुर शहर से गाड़ियों के पुराने से लेकर नए ट्यूब बाजार से पूरी तरह गायब हो चुके हैं। वहीं, ट्रकों और बसों से निकलने वाले पुराने ट्यूब से नाव बनाने के लिए लोग इसकी मुंह मांगी कीमत देने को तैयार हैं।

सामान्य दिनों से 400 से 500 रुपए में बिकने वाला पुराना ट्यूब इन दिनों 600 से 800 रुपए में बिक रहा है।
सामान्य दिनों से 400 से 500 रुपए में बिकने वाला पुराना ट्यूब इन दिनों 600 से 800 रुपए में बिक रहा है।

मार्केट से गायब हो गए ट्यूब और थर्माकोल
सामान्य दिनों से 400 से 500 रुपए में बिकने वाला पुराना ट्यूब इन दिनों 600 से 800 रुपए में बिक रहा है, जबकि नए ट्यूब की कीमत 1800 से 2200 के बीच है। वहीं, थर्माकोल की एक शीट जो सामान्य दिनों से 40 से 50 रुपए में बिकती थी, डिमांड बढ़ने से इसकी कीमत 80 से 100 रुपए तक पहुंच गई। बावजूद इसके ट्यूब और थर्माकोल बाजार से पूरी तरह गायब हो चुका है।

थर्माकोल की एक शीट जो सामान्य दिनों से 40 से 50 रुपए में बिकती थी, डिमांड बढ़ने से इसकी कीमत 80 से 100 रुपए तक पहुंच गई।
थर्माकोल की एक शीट जो सामान्य दिनों से 40 से 50 रुपए में बिकती थी, डिमांड बढ़ने से इसकी कीमत 80 से 100 रुपए तक पहुंच गई।

जान जोखिम में डालने को लोग मजबूर
वहीं, शहर के बहरामपुर की रहने वाली शांति देवी बताती हैं‍ कि गांव में बहुत पानी भर गया है। जरूरत का सामान नहीं मिल पा रहा है। बच्‍चे और वे लोग कहीं जा नहीं पा रहे हैं। वे बताती हैं कि नाव हर समय उपलब्‍ध नहीं होने से पानी में डूबकर जाना पड़ रहा है। ऐसे में ट्यूब और थर्माकोल से बनी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे जान का खतरा भी बना हुआ है। रामधारी बताते हैं कि यहां की स्थिति बहुत खराब है। दरवाजे पर 10 फीट तक पानी लगा हुआ है। बच्‍चों के निकलने पर जान का खतरा बना हुआ है। उनके पास खाने-पीने का सामान नहीं है।

नाव हर समय उपलब्‍ध नहीं होने से ट्यूब और थर्माकोल से बनी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
नाव हर समय उपलब्‍ध नहीं होने से ट्यूब और थर्माकोल से बनी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

400 घरों में 2 नाव
राजेंद्रनगर पश्चिमी के रहने वाले बबलू सिंह बताते हैं कि रामपुर नयागांव में कमर भर पानी में डूबकर सब्‍जी लेने जा रहे हैं। यहां नाव नहीं मिलने से काफी परेशानी है। मोहरीपुर के रहने वाले प्रशांत बताते हैं कि यहां पानी बढ़ने से बच्‍चों और महिलाओं को काफी परेशानी है। 400 घरों में दो नाव से क्‍या होगा। ऐसे में लोग अपने देसी नाव का जुगाड़ करने को मजबूर हैं। कोई थर्माकोल तो कोई ट्यूब की नाव बना रहा है। फिलहाल इसी से सभी का काम चल रहा है।

राजेंद्रनगर पश्चिमी के रहने वाले बबलू सिंह बताते हैं कि रामपुर नयागांव में कमर भर पानी में डूबकर सब्‍जी लेने जा रहे हैं।
राजेंद्रनगर पश्चिमी के रहने वाले बबलू सिंह बताते हैं कि रामपुर नयागांव में कमर भर पानी में डूबकर सब्‍जी लेने जा रहे हैं।

एक नजर में जिले में बाढ़ के हालात

  • शुक्रवार को जिले में दो बांध टूटने के बाद शनिवार को यहां नदियों का जलस्तर 11 सेमी कम हुआ है।
  • बीते 24 में घंटे राप्ती नदी का जलस्तर 5 इंच कम हुआ है।
  • गोरखपुर- सोनौली मार्ग, गोरखपुर- वाराणसी मार्ग, गोरखपुर- खजनी मार्ग, गोरखपुर- देवरिया मार्ग गोरखपुर- पिपराइच मार्ग पर बाढ़ का पानी होने से बंद।
  • शहर के निचले इलाकों में लगातार बढ़ता जा पानी पानी का जलस्तर, तेजी से पलायन कर रहे लोग।
  • ग्रामीण इलाकों में लोग बच्चों और मवेशियों के साथ बांध, रेलवे स्टेशन और सड़के ​के किनारे तिरपाल डालकर रह रहे हैं।
  • ग्रामीण इलाकों के करीब सभी मुख्य मार्गों पर बाढ़ का पानी आ चुका है।
  • बाढ़ की वजह से यहां तेजी से जल जनित बीमारियां फैल रही हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में लोग तेजी से बीमार पड़ रहे हैं।
  • ग्रामीण इलाकों में बाढ़ की वजह से लोगों को राशन- पानी, गैस, लकड़ी, बच्चों के लिए दूध, मवेशियों के लिए हरा चारा आदि की किल्लत हो गई है।

कम होने लगा नदियों का जलस्तर

नदीखतरे का निशानवर्तमान जलस्तर
राप्ती74.9877.20
रोहिन82.4483.63
घाघरा अयोध्या पुल92.7392.88
घाघरा तुर्तीपार64.0165.06

(नोट: नदियों का जलस्तर 4 सितंबर की शाम 4 बजे तक आरएल मीटर में है।)

बिजली घरों में घुसा पानी, 100 गांवों की बिजली गुल
बाढ़ में बिजली वितरण सिस्टम भी प्रभावित हो गया है। बिजली निगम ने एहतियातन 100 गांवों की बिजली आपूर्ति काट दी है। ताकि पानी में करंट उतरने की सम्भावना न रहें। चौरीचौरा क्षेत्र में फरेन नाले के किनारे के बांध आमघाट राजधानी बिजली घर परिसर समेत 34 गांवों में पानी भरने लोगों की मुश्किलें बढ़ गई है। बिजली घर में ट्रांसफार्मर व स्वीच यार्ड में पानी जमा होने से 50 गांवों की बिजली आपूर्ति शनिवार की भोर में 3 बजे ठप कर दी गई। इस प्रकार चौरीचौरा क्षेत्र के पलिया, गजाईकोल व अमहिया बिजली घर से जुड़े 20 गांवों में बिजली आपूर्ति शुक्रवार से ठप है।

बिजली निगम के मुताबिक कैंपियरगंज, पीपीगंज, कौड़ीराम, बड़हलगंज, बांसगांव, महावीर छपरा, चौरीचौरा समेत क्षेत्रों के गांवों में बाढ का पानी भरने से 100 से अधिक गांवों में एहतियातन बिजली आपूर्ति ठप कर दी गई है। सर्वाधिक दिक्कत चौरीचौरा वितरण खंड में है। यहां राजधानी बिजली घर परिसर में बाढ़ का पानी पावर ट्रांसफार्मर व स्विचयार्ड तक पहुंच गया है। बिजली घर से आपूर्ति बंद कर दी गई है। इसी क्षेत्र के नौवा बारी पलिपा बिजली घर के आसपास भी पानी भरने लगा है। बिजली घर के दो फीडर से आपूर्ति ठप कर दी गई है। अमहिया बिजली घर से निकलने वाले दो फीडरों से जुड़े गांवों में बिजली आपूर्ति काट दी गई है। इन गांवो में भी बाढ़ का पानी घुसने से लोग परेशान है।

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