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प्रतिबंधित चाइनीज सेब की तस्करी:नेपाल के रास्ते गोरखपुर पहुंच रहा चीनी सेब, यहां से देश भर में जा रहा, डॉक्टर्स बोले- केमिकल इंजेक्शन वाले यह सेब नर्वस सिस्टम के लिए खतरा

गोरखपुर9 दिन पहले
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गोरखपुर के फल बाजारों में ​खूब - Dainik Bhaskar
गोरखपुर के फल बाजारों में ​खूब

नेपाल बार्डर से चाइनीज सेब की सप्लाई धड़ल्ले से की जा रही है। तस्कर बेखौफ होकर नेपाल से सटे भारत बार्डर में माल खपाने में लगे हैं। सेब की तस्करी नेपाल से सटे बढनी, ठुठीबारी, सोनौली के रास्ते हो रही है।

कस्टम डिपार्टमेंट के अफसर और बार्डर पर तैनात एसएसबी पूरी तरह से सुस्त है। जिसका फायदा उठाकर तस्कर हर रोज नेपाल के रास्ते चाइनीज सेब गोरखपुर ला रहे हैं और यहां से पूरे देश में सप्लाई कर रहे हैं। गोरखपुर व आसपास का इलाका इन दिनों पूरी तरह चाइनीज सेब से पट गया है।

हार्मफुल इंजेक्शन से ट्रीट होते हैं चाइनीज सेब
डॉ. वीजाहत करीन बताते हैं कि प्रतिबंधित इंजेक्शन का इस्तेमाल कर चाइनीज सेब को तैयार किया जा रहा है। इसमें ऐसे केमिकल्स होते हैं जो नर्वस सिस्टम के साथ बॉडी के नाजुक अंगों पर सीधे अटैक करते हैं। इन हार्मफुल इंजेक्शन की वजह से सेब में मौजूद केमिकल बॉडी में जाते ही एक्टिव हो जाते हैं। जिससे कई बीमारियों का खतरा होता है। हालांकि देखने में यह सेब इतना खूबसूरत और ताजा लगेगा कि कस्टमर दुकानों पर देख सबसे पहले इसे ही खरीदना पसंद करते हैं।

क्या है चाइनीज सेब की पहचान?
एक्सपर्ट के अनुसार हार्मफुल रसायनों वाले सेब की पहचान बिल्कुल आसान है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह प्लास्टिक के जालीदार कवर से ढका होता है। साइज में बड़ा और गोलमटोल होता है। इसमें काफी चमक होती है। इसका कलर पिंक या येलोइस होता है। खाने पर टेस्ट शक्कर के जैसा नरम और भुरभुरा लगता है। जबकि ओरिजनल सेब में कम शाइनिंग होती है। साथ ही उसका स्वाद भी चेंज होता है।

ओरिजन सेब के स्वाद थोड़ी खट्टापन लिए होता है। सहायक आयुक्त कस्टम अजीत कुमार किस्पोट्टी बताते हैं कि चाइनीज सेब की बिक्री भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित है। विभाग ने कई बार सेब की खेप पकड़ी भी है। कोरोना काल में कस्टम डिपार्टमेंट की तरफ से बार्डर पर निगरानी की जा रही है। यदि बार्डर के रास्ते चाइनीज सेब की तस्करी हो रही है, तो अभियान चलाकर छापेमारी की जाएगी. साथ ही माल जब्त करने के साथ कार्रवाई की जाएगी।

कस्टम से लाइन सेट कर हो रही तस्करी
डॉक्टर भी लोगों को सेब का सेवन करने की सलाह देते हैं। लेकिन जरा सोचिए जिन फलों को लेकर इतनी आपाधापी मची है, वहीं, जब यह सेहत के दुश्मन बन जाएं तो क्या होगा। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जिसमें इंडियंस की हेल्थ पर ड्रैगन सेब के जरिए खूब हमले कर रहा है। चीन के सेबों की बढ़ रही तस्करी के पीछे सबसे बड़ी वजह है गोरखपुर का कस्टम डिपार्टमेंट।

कस्टम से जुड़े सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2013 से पहले तत्कालीन सुप्रिटेंडेंट एनडी सिंह सोलंकी ने कई बार चाइनीज सेब की खेप पकड़ी थी। लेकिन उनके रिटायरमेंट के बाद अन्य अधिकारी इसे लाइन देने लगे। यानी कि तस्करों से बकायदा महीना सेट कर इस गोरखधंधे को बढ़ाया जा रहा है।

हालांकि अभी बीते फरवरी महीने में बस्ती टोल प्लाजा के पास लखनऊ की टीम ने एक डीएसएम नंबर यूपी 58 टी 9091 पर लदी चाइनीज सेब पकड़ी थी। इसके अलावा भी कई अन्य बार भी पकड़ी गई, लेकिन कस्टम की तस्करों पर मेहरबानी से इसे छोड़ दिया गया।

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