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गोरखपुर के दरोगाओं को जूनियर करने का खेल:खुद पर न आए कोई आंच इसलिए बाबुओं ने फिर उलझा दी जांच, भास्कर के पास पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग की डेट लेकिन पुलिस के पास नहीं

गोरखपुर2 महीने पहले
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एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु। - Dainik Bhaskar
एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में 2015 बैच के 195 और 2017 बैच के 39 दरोगाओं को जूनियर किए जाने के मामले में फिर एक नया मोड़ आ गया है। खुद पर इस गड़बड़झाले की आंच न आए, इसलिए पुलिस दफ्तर के बाबुओं ने फिर जांच उलझा दी। एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु की ओर से कराई गई जांच में पता चला है कि यह गड़बड़ी गोरखपुर से हुई ही नहीं है।

यह पूरा मामला सूचना तकनीकी सेवा विभाग लखनऊ संभालता है। वहीं, गोरखपुर पुलिस के पास सब इंस्पेक्टरों की ट्रेनिंग डेट का रिकार्ड भी नहीं है। ऐसे में पत्राचार की कार्यवाही कर, इस मामले को फिर ठंडे बस्ते में डालने का जुगाड़ लग गया।

बहराइच जिले के दरोगाओं के पीएनओ संशोधन का आदेश
बहराइच जिले के दरोगाओं के पीएनओ संशोधन का आदेश

मुवमेंट आर्डर पर की थी आमद, फिर क्यों नहीं देखी गई ट्रेनिंग डेट
जबकि दूसरी तरफ भास्कर के पास एक नहीं बल्कि कई ऐसे रिकार्ड मौजूद हैं, जिससे यह साफ स्पष्ट होता है कि दरोगाओं की ट्रेंनिंग के लिए पीटीसी में आमद डेट क्या थी। वहीं, गोरखपुर पुलिस विभाग की ओर से तकनीकी सेवा विभाग, लखनऊ को पत्राचार किए जाने के बाद एक बार फिर पीड़ित दरोगा निराश होते दिख रहे हैं।

उनका कहना है कि हम लोगों के कैरेक्टर रोल में भी हमारी ट्रेनिंग डेट का रिकार्ड होता, लेकिन उसे जांच में शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा जब ट्रेनिंग पूरी कर कोई भी सब इंस्पेक्टर जिले में आमद करता है ​तो, उसे ज्वाइन करने के लिए मुवमेंट आर्डर दिया जाता है। जिसे दिखाकर ही वह जिले में आमद करता है। उस मुवमेंट आर्डर पर भी उनकी ट्रेनिंग डेट साफ शब्दों में लिखी है, लेकिन यहां गोरखपुर पुलिस का कहना है कि उनके पास दरोगाओं के ट्रेनिंग का कोई रिकार्ड नहीं है।

भर्ती के बाद ट्रेनिंग में आमद करने के लिए दरोगा को जारी आदेश
भर्ती के बाद ट्रेनिंग में आमद करने के लिए दरोगा को जारी आदेश

दरोगाओं के आरोप पर भास्कर ने किए एसएसपी से सीधे सवाल

सवाल: अगर जिले में आमद डेट को ज्वॉनिंग डेट माना गया तो पुलिसकर्मियों ने ट्रेनिंग कब की?
जवाब : इसके लिए सभी ट्रेनिंग सेंटर से पत्र लिखकर डिटेल मांगी गई है।

सवाल: क्या जिले में पुलिसकर्मियों को बिना मुवमेंट आर्डर के ज्वाइन कराया गया, क्योंकि मुवमेंट आर्डर पर उनकी ट्रेनिंग का वर्ष लिखा होता है?
जवाब: इसकी जांच कराई जा रही है।

सवाल: पुलिसकर्मियों का आरोप है उनके कैरेक्टर रोल पर भी उनकी ट्रेनिंग डेट मेंशन होती है? उसे जांच में शामिल क्यों नहीं किया गया?
जवाब: अब तक की जांच में जो सामने आया, उसके आधार पर पत्राचार किया गया है। जांच चल रही है, कैरेक्टर रोल भी चेक कराया जाएगा।

सवाल: इन्हीं तथ्यों के आधार पर बहराइच सहित अन्य जिलों में हुई गड़बड़ी ठीक करा दी गई, फिर गोरखपुर में मामला उलझाया क्यों जा रहा?
जवाब: दरोगाओं को उनका हक दिलाने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। मैं स्वंय इसकी मानिटरिंग कर रहा हूं। हर हाल में उन्हें न्याय मिलेगा।

सवाल: डॉ. सुनील गुप्ता जब एसएसपी थे, उनके समय में एक सामूहिक प्रार्थना पत्र भी पुलिसकर्मियों ने दिया था, उसपर आज तक कुछ नहीं हुआ?
जवाब: पहले क्या हुआ, मुझे यह जानकारी नहीं है। लेकिन अभी मामला संज्ञान में है। जल्द से जल्द इसकी प्रक्रिया पूरी कर दरोगाओं का PNO ठीक कराया जाएगा।

सवाल: पीड़ित दरोगा लगातार आरोप लगा रहे हैं कि इसमें पुलिस दफ्तर के बाबू आपको गुमराह कर मामले को उलझाया जा रहा, ताकि बाबुओं पर कोई आंच न आए।
जवाब: तत्कालीन बड़े बाबू पहले ही बर्खास्त हो चुके हैं। बाकी इस गड़बड़ी में जो भी शामिल है, उन्हें किसी भी हाल में बख्सा नहीं जाएगा।

ट्रेनिंग पूरी करने के बाद जिले में आमद करने के लिए जारी आदेश
ट्रेनिंग पूरी करने के बाद जिले में आमद करने के लिए जारी आदेश

किसकी डिटेल पर जारी हुआ पीएनओ
दरअसल एसएसपी के मीडिया सेल की ओर से एक प्रेस विज्ञिप्त जारी कर बताया गया है कि दरोगाओं का पीएनओ सूचना तकनीकी सेवा विभाग लखनऊ से जारी हुआ था। दरोगाओं की जनपद आगमन की तिथि के आधार पर बायोडाटा संबंधित कर्मी से भरवाकर निर्धारित प्रारूप में सूचना तकनीकी सेवा विभाग लखनऊ को प्रेषित किया गया था, जिसके आधार पर पीएनओ नंबर आवंटित किया गया है। पीएनओ आवंटन की प्रक्रिया तकनीकी सेवा उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा ही संपादित की जाती है, जनपद स्तर पर उपनिरीक्षक का पीएनओ आवंटित नहीं किया जाता है। लेकिन ऐसे में यह सवाल खड़ा होना लाजमी है कि यहां से जो डिटेल भेजी गई होगी, उसी के आधार पर ही पीएनओ जारी हुआ होगा।

पीएनओ ठीक कराने के लिए पीड़ित दरोगाओं की ओर से लिखित प्रार्थना पत्र देकर शिकायत की गई थी।
पीएनओ ठीक कराने के लिए पीड़ित दरोगाओं की ओर से लिखित प्रार्थना पत्र देकर शिकायत की गई थी।

यह दी गई सफाई
एसएसपी के मीडिया सेल के मुताबिक गोरखपुर में तैनात उपनिरीक्षक के सेव अभिलेख से स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि उन्होंने प्रशिक्षण केंद्र में कब प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके लिए संबंधित प्रशिक्षण केंद्र पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय सीतापुर, मुरादाबाद और उन्नाव से पत्राचार किया गया है। प्रशिक्षण केंद्र से आख्या प्राप्त होने पर उसके अनुसार पीएनओ के संबंध में निर्धारित प्रारूप में बायोडाटा तैयार कर आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक तकनीकी सेवा, लखनऊ को भेजा जाएगा।

क्या है मामला

2017 बैच के 39 व 2015 बैच के 195 दरोगा हुए जूनियर
दरअसल, 2015 बैच के दरोगाओं की नवम्बर 2015 से ट्रेनिंग शुरू हुई थी। उन्होंने नवम्बर 2015 को ट्रेनिंग के लिए आमद किया था। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वर्ष 2017 में उन्हें जिला आवंटित हुआ और अगस्त 2017 में 195 दारोगा गोरखपुर में ज्वाइन किए। लेकिन इन दारोगाओं का पीएनओ नम्बर 2017 का आवंटित कर दिया यानी उन्हें 2017 बैच का दरोगा बना दिया। जबकि अन्य जिलों में आमद करने वाले दरोगाओं को 2015 बैच जारी हुआ।

वहीं, इसी तरह 2017 बैच के 39 दरोगाओं ने 2017 में ट्रेनिंग की। लेकिन जिन लोगों ने ट्रेनिंग पूरी कर अन्य जिलों में आमद किया, उन्हें 2017 बैच मिला और जिन लोगों ने गोरखपुर जिले में आमद किया, उन्हें 2018 बैच का पीएनओ जारी कर दिया गया। ऐसे में सर्विस बुक में 2015 बैच के दरोगा दो साल तो 2017 बैच के दरोगा एक साल जूनियर हो गए।

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