गोरखपुर...सैनिकों के नाम से होगी उनके गांवों की पहचान:2 हजार से ज्यादा गांव बनेंगे 'सैनिक ग्राम', मॉडल गांव बनाने के लिए मास्टर प्लान तैयार

गोरखपुर9 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
पूर्व सैनिकों व शहीदों को सम्मान देने के लिए गो​रखपुर सैनिक कल्याण विभाग ने प्रस्ताव भी तैयार कर लिया है। - Dainik Bhaskar
पूर्व सैनिकों व शहीदों को सम्मान देने के लिए गो​रखपुर सैनिक कल्याण विभाग ने प्रस्ताव भी तैयार कर लिया है।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में रहने वाले सैनिकों के नाम पर अब उनके गांवों की पहचान होगी। उनके गांव का सैनिकों के नाम पर नामकरण किया जाएगा। उन गांवों को 'सैनिक ग्राम' घोषित किया जाएगा और तमाम विकास की योजनाओं का लाभ देकर उन्हें मॉडल गांव बनाया जाएगा। पूर्व सैनिकों व शहीदों को सम्मान देने के लिए गो​रखपुर सैनिक कल्याण विभाग ने प्रस्ताव भी तैयार कर लिया है। प्रस्ताव को विभाग की ओर से डीएम को भेज दिया गया है।

डीएम विजय किरण आनंद ने प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए सीडीओ के पास भेजा है। अब सीडीओ उसका आकलन कर रहे हैं और कई अन्य बिंदुओं पर जानकारी जुटा रहे हैं। माना जा रहा है कि विभाग व जिला प्रशासन नए साल पर प्रस्ताव को मंजूरी के लिए शासन को भेजेगा। शासन से मंजूरी मिलने के बाद इसे जमीनी हकीकत में उतारा जाएगा।

बनेंगे तोरण द्वार, स्थापित होगी मूर्ति
सूत्रों के अनुसार सैनिक ग्राम योजना के अंतगर्त गोरखपुर जिले व गोरखपुर मंडल के महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर के करीब 2000 सैनिकों के गांवों को शामिल किया जाएगा। उनके गांव का नामकरण स्थानीय सैनिकों के नाम पर किया जाएगा। साथ ही गांव में उनकी मूर्ति भी स्थापित की जाएगी और शासन से आने वाली सभी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। गांव के युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करने के साथ ही हर स्तर पर मदद भी की जाएगी। जिससे वे देश की रक्षा करने के जिए आगे आ पाएं। ।

जुटाई जा रही ब्लाक वार जानकारी
सूत्रों के अनुसार सीडीओ अब यह जानकारी जुटा रहे हैं कि किस विकास खंड में कौन से गांव पूर्व सैनिकों व शहीदों के है वहां उनकी कितनी संख्या है। जिसके आधार पर गांवों का चयन होगा और वहां विकास की सारी योजनाएं जैसे सड़क, नाली, पेयजल सहित अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। कई सैनिक ऐसे भी हैं जिनकी जानकारी सैनिक कल्याण विभाग के पास नहीं हैं जिनकी जानकारी जुटाई जा रही है।

महराजगंज से मिली प्रेरणा
सैनिक कल्याण विभाग के सूत्रों के अनुसार इस कार्य की प्रेरणा महराजगंज के एक गांव से मिली है। महराजगंज के फरेंदा के पास स्थित लोक पीठनिया नामक गांव को पहले ही सैनिक गांव घोषित है। यहां के लगभग 70 प्रतिशत लोग सेना में हैं। यहां कई पूर्व सैनिक व शहीद हैं। इनमें से अधिकांश लोग नेपाल के रहने वाले हैं। ये लोग गोरखा रेजीमेंट सहित अन्य सेनाओं से संबंधित हैं।

मंडल में हैं करीब 50 हजार सैनिक
​विभाग के सूत्र बताते हैं कि मंडल में करीब 50 हजार सैनिक, पूर्व सैनिक व शहीद हैं। शहीदों व पूर्व सैनिकों में प्रथम व द्वितीय विश्वयुद्ध, कारगिल व बांग्लादेश में पाकिस्तान यद्ध से संबंधित हैं। इनमें से 200 के करीब शहीद हैं। माना जा रहा है कि सैनिक ग्राम योजना नए साल पर लागू होगी।

खबरें और भी हैं...