गोरखपुर में RSS ने भी मनाई विजयदशमी:स्वयंसेवको ने किया शस्त्र पूजन, प्रांत प्रचारक बोले- यह पर्व असत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की विजय का घोतक है

गोरखपुर8 महीने पहले
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गोरखपुर महानगर के दोनों भाग उत्तरी व दक्षिणी के विभिन्न नगरों में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। - Dainik Bhaskar
गोरखपुर महानगर के दोनों भाग उत्तरी व दक्षिणी के विभिन्न नगरों में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा शुक्रवार को विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजन व श्री विजयादशमी उत्सव का आयोजन किया गया। गोरखपुर महानगर के दोनों भाग उत्तरी व दक्षिणी के विभिन्न नगरों में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमे स्वयंसेवको ने पूर्ण गणवेश में भाग लिया और शस्त्र पूजन किया। उत्तरी भाग के गोरक्षनगर में प्रांत प्रचारक गोरक्ष प्रांत सुभाष जी बतौर मुख्य वक्ता के रूप में सम्मलित होकर शस्त्र पूजन किया।

गोरक्षनगर में प्रांत प्रचारक गोरक्ष प्रांत सुभाष जी बतौर मुख्य वक्ता के रूप में सम्मलित होकर शस्त्र पूजन किया।
गोरक्षनगर में प्रांत प्रचारक गोरक्ष प्रांत सुभाष जी बतौर मुख्य वक्ता के रूप में सम्मलित होकर शस्त्र पूजन किया।

संघ के 6 उत्सव में एक है विजयदशमी
उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे राष्ट्र जीवन में अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय महत्व के प्रसंग भरे पड़े हैं। प्रत्येक प्रसंग के साथ हमारे उत्सव भी जुड़े हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्ष भर में कुल छह उत्सव मनाता है। विजयादशमी उसमें एक है। यह पर्व असत्य पर सत्य की और अंधकार पर प्रकाश की विजय का घोतक है।

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भारतीय जन मानस की आत्मा हैं। अयोध्या राजपरिवार में जन्म लेने वाला राजकुमार जब पिता की आज्ञा से महल छोड़ता है तो वह अपनी सामर्थ्य और सामाजिक संरचना के बल पर मर्यादा पुरुषोत्तम बन जाता है। सारी आसुरी शक्तियां शरणागत हो जाती हैं। पुरातन काल से हम शक्ति की उपासना करते रहे हैं।।संघ विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं।।विजयादशमी के दिन संघ की स्थापना हुई।।यह दिन विजय, शौर्य, संयम, असत्य पर सत्य की विजय, शक्ति की पूजा एवं संघ की स्थापना का दिन है।।

96 वर्षों से बुराई पर अच्छाई को प्रतिस्थापित करने की कोशिश
उन्होंने आगे कहा कि मनुष्यत्व ही हिंदुत्व है और हिंदुत्व ही राष्ट्रीयत्व है। स्वदेशी और देशभक्ति के माध्यम से हम बड़ी से बड़ी शक्तियों को हम परास्त कर सकते हैं। भारत की भूमि भोग्य भूमि नहीं बल्कि कर्म और त्याग की भूमि है। भारत कभी पराजित नही रहा, सभी आक्रांताओं का मान मर्दन करने के लिए भारत भूमि ने अनेक वीर पुत्रों को जन्म दिया है। भारत भूमि शक्ति की आराधना करने वाला देश है।

यह भौतिक और आध्यात्मिक दोनों तरह की पूजा करता है। इसलिए यह सोने की चिड़िया के साथ साथ विश्वगुरु भी रहा। हमें गर्व करने की आवश्यकता है कि हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की संस्कृति है।हम सत्य व न्याय के लिए सनातन काल से लड़ते आये हैं। कलियुग में शक्ति का प्रमुख स्रोत संगठन है, संघ की शक्ति है। उन्होंने सभी को विजयादशमी की शुभकामनाए दी।

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