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गोरखपुर...पुलिस की पिटाई से प्रापर्टी डीलर की मौत का मामला:जहां की थी थानेदारी- अब वहीं से काट रहे फरारी, हत्या का केस दर्ज होते ही पुलिसकर्मी फरार; क्राइम ब्रांच को जांच

गोरखपुर2 महीने पहले
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बुधवार को नए इंस्पेक्टर की भी तैनाती कर दी गई है। वहीं इस केस को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है। - Dainik Bhaskar
बुधवार को नए इंस्पेक्टर की भी तैनाती कर दी गई है। वहीं इस केस को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है।

कानपुर के प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता की गोरखपुर पुलिस की पिटाई से मौत के मामले में इंस्पेक्टर सहित 6 पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया है। वहीं, केस दर्ज होते ही सभी आरोपी पुलिसकर्मी अपने ही थाने से फरार हो गए हैं। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि गिरफ्तारी के लिए उनकी तलाश शुरू कर दी गई है। इंस्पेक्टर सहित तीन पुलिस कर्मी नामजद हैं, लिहाजा उन्हें पकड़ने के लिए टीम बनाई गई है। उधर, बुधवार को नए इंस्पेक्टर की भी तैनाती कर दी गई है। वहीं इस केस को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है।

क्राइम ब्रांच करेगी केस की विवेचना
मनीष की हत्या का केस दर्ज होने के बाद विवेचना को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। दरअसल जिस थाने में उसी थाने के पूर्व थानेदार सहित अन्य पुलिसवालों पर केस किया गया हो उसकी विवेचना वहां कराने पर पुलिस ही कठघरे में घिर सकती है। इस लिए पूरी विवेचना क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है। एसपी क्राइम की निगरानी में यह विवेचना आगे बढ़ेगी।

रामगढ़ताल इलाके में स्थित होटल ठहरे मनीष गुप्ता की सोमवार की आधी रात को पुलिस पिटाई से मौत हो गई थी।
रामगढ़ताल इलाके में स्थित होटल ठहरे मनीष गुप्ता की सोमवार की आधी रात को पुलिस पिटाई से मौत हो गई थी।

दोस्तों संग गोरखपुर घुमने आए थे मनीष
अपने दोस्तों के साथ गोरखपुर के रामगढ़ताल इलाके में स्थित होटल ठहरे मनीष गुप्ता की सोमवार की आधी रात को पुलिस पिटाई से मौत हो गई थी। मनीष गुप्ता के दोस्त हरियाणा के रहने वाले हरदीप और प्रदीप ने पुलिस की ज्यादती बताई वहीं मनीष गुप्ता की अपने भांजे से मोबाइल से बातचीत की आडियो भी सामने आई जिसमें पता चला कि पुलिसवालें उनके साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। हालांकि पिटाई के बाद मौत होने पर पुलिस ने शव को करीब डेढ़ घंटे तक छिपाए रखा।

वह एक प्राइवेट हास्पिटल में ले गए और वहां से हालत गंभीर बताकर मेडिकल कालेज ले गए। इस बीच उसकी मौत हो गई। उधर, शासन के निर्देश पर एसएसपी ने 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया। देर रात तमाम हंगामों के बाद सीएम योगी की पहल पर देर रात तमाम हंगामों के बाद सीएम योगी की पहल पर इंस्पेक्टर जगत नारायन सिंह, चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्र और सब इंस्पेक्टर विजय यादव को नामजद और तीन अज्ञात पुलिस कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया।

अधिकारी भी जिम्मेदार, CM को आना पड़ा आगे
वहीं, इस पूरे मामले में अब तक गोरखपुर के जिले के पुलिस कप्तान कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। पूरे घटनाक्रम में अलग- अगल बयान देने के बाद भी पुलिस अधिकारी इस मामले में उठ रहे सवालों का जवाब देने से कतरा रहे हैं। आलम यह है कि पहले पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने के लिए शासन को पहल करनी पड़ी, जबकि केस दर्ज करने के लिए खुद सीएम योगी को आगे आना पड़ा।

जबकि घटना के बाद से ही पुलिस अधिकारियों पर दोषी पुलिसकर्मियों को बचाने, हत्या का सबूत मिटाने सहित तमाम गंभीर आरोप लग रहे हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि अगर हर एक काम के लिए मुख्यमंत्री को ही पहल करनी पड़ेगी, तो फिर जिले में तैनात पुलिस के सीनियर अफसरों की तैनाती किस लिए की गई है?

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