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UP के 8 जेलों में शुरू हुई टेली मेडिसिन सुविधा:इलाज के लिए अब नहीं जाना होगा अस्तपाल; जेल से ऑनलाइन मिलेगा कैदियों को डॉक्टरों से परामर्श

22 दिन पहले
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अभी ये योजना आठ जेलों में शुरू की गई है। लेकिन इसकी सफलता को देखते हुए जल्द ही इसे राज्य की सभी जेलों में भी लागू किया जाएगा। - Dainik Bhaskar
अभी ये योजना आठ जेलों में शुरू की गई है। लेकिन इसकी सफलता को देखते हुए जल्द ही इसे राज्य की सभी जेलों में भी लागू किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर सहित प्रदेश के 8 जेलों में बंद कैदियों के लिए राहत भरी खबर है। क्योंकि अब उन्हें इलाज के लिए जेल से अस्पताल नहीं ले जाना पड़ेगा, बल्कि जेल में ही उन्हें डॉक्टरों से ऑनलाइन परामर्श कर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। इसके लिए यहां जिला कारागार में बुधवार को टेली मेडिसिन की शुरुआत की गई है। इसके लिए अब कैदियों का ऑनलाइन ही बड़े डॉक्टरों से कंसल्ट कर इलाज जेल में ही हो जाएगा।

गोरखपुर सहित इन 8 जेलों में हुई शुरूआत
दरअसल, अक्सर इलाज के ​लिए अस्पताल जाने के दौरान कैदियों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प भी होती रही है। ऐसे में कई बार अस्तपाल से कैदियों के भाग जाने की भी खबरें आई हैं। ऐसे में इस समस्या को देखते हुए जेल प्रशासन ने बुधवार को डीजी जेल ने गोरखपुर सहित जिला कारागार वाराणसी, केंद्रीय कारागार वाराणसी, जिला कारागार बरेली, केंद्रीय कारागार बरेली, जिला कारागार लखनऊ, जिला कारागार गौतमबुद्धनगर, जिला कारागार गाजियाबाद में टेली मेडिसिन सर्विस की ऑनलाइन शुरुआत की है।

रोजाना अस्तपाल जाते थे मरीज
जेलर पीए शुक्ला ने बताया कि जेल में ओपीडी है। डॉक्टर भी हैं, लेकिन गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए कैदियों को अस्पताल ले जाना पड़ता है। ऐसे में प्रतिदिन एक दो कैदी गंभीर बीमारी का हवाला देकर अस्पताल ले जाने के लिए दबाव डालते हैं। इससे पुलिस पर इन्हें ले जाने और लाने का दबाव तो बढ़ता ही है, साथ ही कैदियों के भागने और उनके बाहरी लोगों के संपर्क में आने का खतरा बना रहता है। लेकिन टेली मेडिसिन योजना के तहत जेल में ही उनका इलाज करने की शुरुआत हुई है। इससे ऐसे मामलों से निजात पाने में सफलता भी मिलेगी।

सभी ​जेलों में लागू होगी शुरूआत
जेलर ने बताया कि हालांकि अभ सोनोग्राफी और एमआरआई जैसे टेस्ट के लिए आरोपियों को अस्पताल ले जाना पड़ेगा। एडीजी जेल ने बताया कि अभी ये योजना आठ जेलों में शुरू की गई है। लेकिन इसकी सफलता को देखते हुए जल्द ही इसे राज्य की सभी जेलों में भी लागू किया जाएगा।

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