अलग-अलग दो फैक्ट्री पर वाणिज्य कर विभाग का छापा:हापुड़ में दोनों फैक्ट्री पर टैक्स चोरी को लेकर जांच, 1.5 करोड़ की पकड़ी गई चोरी

हापुड़14 दिन पहले
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हापुड़। टैक्स चोरी की शिकायत पर शनिवार को गाजियाबाद से आई वाणिज्यकर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआइबी) की टीम ने अलग अलग दो प्रतिष्ठान पर छापामार कार्रवाई की। टीम ने एक केबिल कंपनी व स्टील फैक्ट्री पर छापा मारा। सुबह से देर रात तक जारी छानबीन के बाद गोपाल इलेक्ट्रिक स्टोर पर करीब 1.26 करोड़ की टैक्स चोरी पाई गई है। जबकि स्टील फैक्ट्री पर जांच जारी होने तक 25 लाख रुपये की चोरी पकड़ी गई। अधिकारियों ने बताया कि बोगस बिलों के माध्यम से टैक्स चोरी किया गया है। देर रात तक कार्रवाई जारी थी।

पुलिस बल के साथ एक साथ छापा मारा
जवाहर गंज निवासी व्यापारी लोकेश सिंहल की पत्नी कुसुमलता अग्रवाल के नाम पर धीरखेड़ा में यूपी इंसुलेटिंग केबिल कंपनी है। जबकि उनके व उनके पुत्र के नाम मेटल इंडस्ट्री और गोपाल इलेक्ट्रिक के नाम से भी फर्म है। शनिवार दोपहर वाणिज्यकर विभाग की एसआईबी टीम ने उनके घर और धीरखेड़ा स्थित केबिल फैक्टरी पर भारी पुलिस बल के साथ एक साथ छापा मारा। दोनों स्थानों पर करीब 15 सदस्यीय टीम दस्तावेजों को खंगालने में जुट गई।

ताला तोड़ते हुए आगे की कार्रवाई
अलमारियों के ताले लगे हुए थे। चाबियां मांगने पर मुहैया नहीं कराई गई, जिसके बाद टीम ने ताले तोड़ते हुए आगे की कार्रवाई शुरू की। देर शाम तक दस्तावेजों को खंगाला गया। गाजियाबाद एसआईबी में डिप्टी कमिश्नर रमेश सिंह बैश ने बताया कि जांच के दौरान करीब एक करोड़ 26 लाख रुपये की टैक्स चोरी का मामला प्रकाश में आया है। वर्ष 2018 से अब तक फर्जी बिलों के माध्यम से यह टैक्स चोरी की गई है। जिनमें से कंपनी द्वारा 50.62 लाख रुपये जमा कर दिए गए हैं। उधर फैक्टरी मालिक का दावा है कि उन्होंने किसी भी प्रकार की टैक्स चोरी नहीं की है। खरीद-फरोख्त के सभी बिल और दस्तावेज उनकी कम्पनी के पास मौजूद हैं।

कॉपर शीट बनाने की फैक्ट्री पर छापा
इसके अलावा शनिवार शाम सूर्य विहार निवासी अमित कुमार जैन की धीरखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित सतीश इंडस्ट्रीज की कॉपर शीट बनाने की फैक्ट्री पर छापा मारा। मौके पर माल का स्टाक कम मिला है। इसके अलावा शुरूआती जांच में करीब 25 लाख रुपये की टैक्स चोरी सामने आई है। अभी तक टैक्स चोरी की जांच पूरी नहीं हुई है। स्टाक कम पाए जाने के बाद व्यापारी ने पैनल्टी के तौर पर 8.50 लाख और टैक्स के तौर पर दस लाख रुपये फिलहाल जमा करा दिए हैं। समाचार लिखे जाने तक कार्रवाई जारी थी।

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