3 रेप पीड़ित मां की कहानियां:पहले दुष्कर्म का दर्द, अब बच्चे के साथ जोर से हंस भी नहीं सकती, पड़ोसी घूरती नजरों से देखते हैं

लखनऊ16 दिन पहलेलेखक: कोमल निगम
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आज मदर्स डे है। यानी मां का दिन। खुशी, वात्सल्य का दिन। लेकिन, कुछ ऐसी भी हैं जिनके लिए मां बनना खुशी नहीं बल्कि अभिशाप बन गया। वजह थी गर्भ में आ चुके बच्चे को दुनिया में लाना एक मजबूरी थी। हम बात कर रहे हैं रेप के बाद मां बनी पीड़िताओं की। समाज के तानों के बीच ये मां अपने बच्चों को पाल रही हैं। बच्चों के लिए ये मां भी बनी और पिता भी। पढ़िए, 3 ऐसी ही कुछ कहानियां...

जब गर्भवती हुईं, तब कुछ पता नहीं था
हरदोई की रेप पीड़िता सीमा (बदला हुआ नाम) कहती हैं, "मैं जब 17 साल की थी तब मेरा रेप हुआ था। जून का महीना था। साल-2021 का था। पड़ोस में रहने वाले एक युवक ने घर में घुसकर रेप किया। परिवार ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोपी पकड़ा गया। कुछ महीनों बाद उसको पता चला कि वो प्रेग्नेंट हैं। मां को बताया तो वो डर गईं। मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। कहां जाऊं, किससे क्या कहूं। समाज के डर से मेरा गर्भपात नहीं करवाया गया। धीरे-धीरे मेरा पेट बढ़ रहा था। मैं बहुत छोटी थी, पता नहीं था ये सब क्या होता है। फिर एक दिन बहुत तेज पेट में दर्द उठा। मां-पापा मुझे अस्पताल लेकर भागे। जहां मैंने एक बेटे को जन्म दिया। तब भी नहीं पता था कि मेरे साथ क्या हुआ है। अस्पताल से हम लोग घर आए। मां ने बताया कि मुझे बेटे के साथ कैसे रहना है। धीरे-धीरे मैं सब समझने लगी। मुझे उस बच्चे में खुशियां दिखने लगी। मैं खुद बहुत छोटी हूं, लेकिन उसकी मां बन गईं। मुझे मतलब नहीं था कि ये किसका बच्चा है। मैं बस इसे अपना समझती हूं और हमेशा इसके साथ रहूंगी। मैं बच्चे को लेकर बाहर भी जाती हूं और लोगों का सामना भी करती हूं। लोगों की निगाहें बहुत कुछ बोल रही होती हैं, लेकिन मैं उन्हें अपने बच्चे तक नहीं आने देती।"

मां-पापा ने बोला, ये पाप है गिरा दो
उन्नाव की रेप पीड़िता जूही (बदला हुआ नाम) कहती हैं, "उसके साथी ने ही उसका रेप किया। फिर जब वो प्रेग्नेंट हो गई तो उसको बच्चा गिराने के लिए बोला। मना करने पर जान से मारने की धमकी दी। घर में पता चला तो मां-पापा ने साथ नहीं दिया। उनका भी कहना था ये पाप है गिरा दो, लेकिन मैं बच्चे को लाना चाहती थी। आखिर कैसे में उस नन्हीं जान की हत्या करती। बच्चे को बचाने के लिए मैं घर से चली गई। मैंने आरोपी के खिलाफ शिकायत भी की। पहले तो मामला दबा रहा, बाद में राज्य मानवाधिकार आयोग के दखल से पुलिस एक्शन में आई। आरोपी को हिरासत में लिया। मार्च में मुझे एक बेटा हुआ। मुझे अपने बेटे से बहुत प्यार है। मैं कोशिश करूंगी कि मैं इसको एक अच्छा इंसान बना पाऊं। मां-पापा आज भी ताने देते हैं। मैं घर भी नहीं जाती। मेरे बेटे को तो कुछ पता भी नहीं है, वो भला ये सब क्यों झेले।"

मेरा रेप हुआ, मुझे ही गांव से बाहर निकाला
हरदोई की रेप पीड़िता मधु (बदला हुआ नाम) कहती हैं, "18 साल की उम्र में दो युवकों ने गैंगरेप किया था। मामला बड़े लोगों से जुड़ा था इसलिए पुलिस ने दबा दिया। उल्टा मेरे ही परिवार को युवकों ने गांव से बाहर निकलवा दिया। कुछ माह बाद मेरे प्रेग्नेंट होने की बात सामने आई। घरवालों ने बच्चा गिराने के लिए कहा। लेकिन मुझे कुछ समझ में नहीं आया। क्या करूं, क्या न करूं। 31 जनवरी-2022 को मैंने बेटे को जन्म दिया। घरवालों ने कहा कि बच्चे को कूड़ेदान में फेंक दो। पर मैं नहीं मानी। भले ही वो बच्चा एक कुकर्म से जन्मा था, लेकिन उसमें उसका कोई दोष नहीं था। मैंने उसको अपने साथ ही रखने का फैसला किया। मेरे घर की हालत ठीक नहीं है, इसलिए शहर में काम करके घर चला रही हूं। मां-पापा भी मेरे फैसले से नाराज हैं। वो मेरे बच्चे को बुरी नजर से देखते हैं। कभी उसको पुचकारते नहीं। मुझे बहुत दुख होता है, लेकिन मैं ये सब अपने बच्चे तक नहीं आने देती, क्योंकि मेरे बच्चे को और मुझे अभी बहुत लंबी लड़ाई लड़नी है।"

(कंटेंट- हरदोई से फैजी खान, उन्नाव से विशाल)