संडीला में गमगीन माहौल में निकला चेहल्लुम का जुलूस:मर्सिया पढ़कर मनाया मातम, या हुसैन की सदाओं से गमगीन हुआ माहौल

संडीला12 दिन पहले
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संडीला में ​​​​​​​चेहल्लुम के ताजियों का जुलूस निकाला गया। - Dainik Bhaskar
संडीला में ​​​​​​​चेहल्लुम के ताजियों का जुलूस निकाला गया।

संडीला में गमगीन माहौल में सुन्नी और शिया समुदाय के लोगों ने हजरत इमाम हुसैन की याद में चेहल्लुम के ताजियों का जुलूस निकाला। हजरत इमाम हुसैन की याद में मजलिस आयोजित हुईं। मर्सिया पढ़े गये और अजादारों ने मातम किया। घरों में महिलाओं की मजलिस आयोजित की गईं। मर्सिया पढ़कर मातम किया।

मोहल्ला मलकाना स्थित इमाम बड़ा सौदागररान, किसान टोला, मुल्लन टोला में बीती रात चेहल्लुम के ताज़िये रखे गए और सुबह जुलूस निकाला गया। जुलूस मुख्य सड़क से होता हुआ गुदड़ी, मखदूम शाह दरगाह होते हुए छोटा चौराहा पहुंचा। सुन्नी मुसलमानों ने हजरत इमाम हुसैन की याद में मर्सिया पढ़ा।

संडीला में चेहल्लुम के ताजियों का जुलूस निकाला गया।
संडीला में चेहल्लुम के ताजियों का जुलूस निकाला गया।

मर्सिया पढ़कर किया मातम​​​​​​​
फरहत महमूद, अकबर अली, मो. शाद, मो. सलमान, मो. आसिफ, गुड्डू, मो. चांद, मो. शारिक, इमरान ने जुलूस में मर्सिये पढ़े। मगरिब की नमाज के बाद स्थानीय कर्बला में सभी ताजिये सुपुर्दे खाक किये गये। शिया समुदाय ने इमाम बाड़ा सौदागरान में मजलिस हुई। अजादारों ने शोक व्यक्त किया और मर्सिया पढ़कर मातम किया।

संडीला में चेहल्लुम के ताजियों का जुलूस निकाला गया।
संडीला में चेहल्लुम के ताजियों का जुलूस निकाला गया।

दुनिया के अंत तक मनाई जाएगी शहादत
मजलिस को संबोधित करते हुए अहसन रजा ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन इस्लाम के सबसे बड़े रक्षक और संरक्षक हैं। कयामत तक जब भी कोई यजीदी फितना सामने आएगा। हुसैनी धार्मिकता के प्रतीक के रूप में मुस्लिम उम्मा का मार्गदर्शन करता रहेगा। इमाम हुसैन और 72 शहीदों की शहादत को दुनिया के अंत तक मनाया जाता रहेगा।

इमामबाड़ा सौदागरन से निकाला गया जुलूस
उन्होंने कहा कि दुनिया में कोई भी महामारी हो या सरकार, हजरत इमाम हुसैन की शहादत पर दुख व्यक्त करने में ज़र्रा बराबर भी कमी नहीं आने दी जाएगी। इस मौके पर डॉ. ताज नकवी, शकील नकवी, असलम, सबीह अल हसन, मास्टर इफ्तिखार हुसैन, सचिव कमर हसनैन, अजीम नकवी, फहीम नकवी, आजमी नकवी, सैयद हसन इश्तियाक, हफीज, काइम नकवी, दानिश आदि मौजूद थे। इसके बाद इमामबाड़ा सौदागरन से एक जुलूस निकाला गया। जो सड़क पर गस्त करते हुए सौदागरान इमामबाड़े पर समाप्त हुआ।

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