हाथरस…इस बार किसकी होगी सादाबाद सीट:4 लाख वोटर्स करेंगे फैसला, गठबंधन से रालोद के खाते में आई है सीट, बसपा ने भी घोषित किया उम्मीदवार

हाथरस6 दिन पहले
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सादाबाद सीट पर टिकी सबकी नजर। - Dainik Bhaskar
सादाबाद सीट पर टिकी सबकी नजर।

हाथरस की सादाबाद सीट पर इस समय सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। तीन लाख 73 हजार दो सौ 35 मतदाता इस सीट का परिणाम घोषित करेंगे। इस सीट को जाट बाहुल्य सीट के नाम से जाना जाता है। इस बार समाजबादी पार्टी और रालोद के गठबंधन में ये सीट रालोद के खाते में आई है। रालोद ने प्रदीप उर्फ गुड्डू चौधरी को अपना उम्मीदवार भी घोषित भी कर दिया है।

भाजपा के उम्मीदवार पर टिकी सबकी निगाहें

बसपा ने पहले से ही अविन शर्मा को प्रत्याशी बना रखा है। अब सबको इस सीट पर भाजपा के उम्मीदवार का इंतजार है। सूत्रों की माने तो भाजपा भी इस सीट पर जिले का कोई बड़ा राजनैतिक चेहरा उतारने वाली है। ये सीट पिछले विधानसभा चुनाव से ज्यादा चर्चा में रही है। 2017 के चुनाव में इस सीट पर जिले के सबसे बड़े राजनैतिक धुर विरोधी आमने सामने थे। 2017 में बसपा पार्टी से रामवीर उपाध्याय थे, तो वहीं समाजबादी पार्टी से देवेंद्र अग्रवाल थे। ये दोनों एक दूसरे के आपस में राजनैतिक धुर विरोधी हैं। ये बात किसी से छुपी नहीं है।

रालोद प्रत्याशी दो बार से हैं जिला पंचायत

2017 के चुनाव में बसपा से रामवीर विधायक बने थे। अब सपा और रालोद का गठबंधन है, तो ये सीट रालोद के पास है। रालोद प्रत्याशी प्रदीप चौधरी 2 बार से जिला पंचायत सदस्य हैं। वहीं कुछ महीने पहले हुए जिला पंचायत चुनाव में 1 वोट से इनकी पत्नी शशि चौधरी चुनाव हारी थीं। इनके सामने रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय जीती थीं।

2012 में सपा को मिली थी सीट

इस सीट पर सपा की बात करें तो समाजवादी पार्टी से देवेंद्र अग्रवाल 2012 में विधायक बने थे। इस सीट पर वर्तमान विधायक रामवीर उपाध्याय को बसपा से निष्काषित कर दिया गया था। तब से उनका पूरा परिवार भाजपा में चला गया था, हालांकि रामवीर अभी किसी पार्टी में नही हैं।

रामवीर के करीबियों और सूत्रों की माने तो भाजपा रामवीर उपाध्याय को ही इस सीट पर अपना उमीदवार घोषित कर सकती है। रामबीर के बेटे चिराग उपाध्याय युवा भाजपा नेता हैं। वो पिछले काफी टाइम से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।

सीट पर देखने को मिल सकता है घमासान

अगर भाजपा से रामवीर इस सीट पर चुनाव लड़ते हैं, तो इस सीट पर एक बार फिर से घमासान होने की प्रबल संभावना है। एक तरफ खुद वर्तमान विधायक और पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय मैदान में होंगे, तो वहीं दूसरी तरफ प्रदीप चौधरी और इनका साथ सपा के पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल देंगे। वहीं बसपा से अविन शर्मा भी पिछले काफी टाइम से इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे हुए हैं।

उनकी पत्नी क्षमा शर्मा भी रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय के सामने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ चुकी हैं। लोगों का कहना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में जो घमासान देखने को मिला था वो एक बार फिर इस सीट पर देखने को मिल सकता है।