श्रीकृष्ण जन्म होते ही टूट गए कारागार के ताले:सासनी में कथा वाचक ने सुनाया कृष्ण जन्म वृत्तांत, जमकर नाचे श्रोता

सासनी4 महीने पहले
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सासनी में श्री रामचौक में श्री राधागोपाल समिति के बैनर तले श्रीमद्ज्जगद्गुरू आचार्य मलूक पीठाधीश्वर श्री राजेन्द्र दास जी महाराज की पवित्र वाणी द्वारा सुनाए जा रहे भगवान श्रीमद्भागवत कथा प्रवचन ज्ञान के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जन्म कथा का रोचक वर्णन किया। जिसे सुन श्रेाता मंत्रमुग्ध हो गये।

श्रीमज्जगदगुरू ने अपनी मधुर रसमई वाणी से कथा अमृतपान कराते हुए कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो वहां कारागार के ताले टूट गये और पहरे वाले सो गये। तब उन्हें आकाशवाणी हुई कि वह भगवान श्रीकृष्ण को गोकुल में बाबा नंद के यहां छोड आएं और वहां जन्मी कन्या को लेकर यहां आ जाए। यदि कंस मांगे तो उन्हें कन्या सौंप दें। बासुदेव जी भगवान श्रीकृष्ण को एक लकडी की डलिया में रखकर गोकुल को चले तो मार्ग में बरसात होने लगी और आंधी तूफान आने लगे।

कथा सुनकर भक्त हुए भाव विभोर

तभी शेषनाग ने अपने फन से उनके ऊपर छाता बना दिया। बासुदेव जी भगवान को सिर पर उठाए गोकुल चल दिए। मार्ग में यमुना का जलस्तर बढ गया मगर जैसे ही यमुना ने भगवान श्रीकष्ण के चर्ण स्पर्श करते ही जलस्तर घटने लगा और वह गोकुल पहुंच गये जहां उन्होनंे मा यशोदा के पास सोई कन्या को उठा लिया और कृष्ण को वहां सुला दिया।

वृंदावन से पधारे जगद्गुरु ने कृष्ण जन्म की कथा सुनाई तो भक्त भाव विभोर हो गए
वृंदावन से पधारे जगद्गुरु ने कृष्ण जन्म की कथा सुनाई तो भक्त भाव विभोर हो गए

कारागार में लौटते ही स्थिति पहले जैसी हो गई। कारागार के ताले लग गये पहरे वाले जाग गये। कन्या का रूदन सुनकर पहरेदारों ने कंस केा सूचना दी और कंस ने कारागार मे आकर देवकी से कन्या छीन ली। कंस ने कन्या को जैसे ही पत्थर पर पटकना चाहा कन्या आकाश मे उड़ गई और कंस को श्रीकृष्णके पैदा होने की कथा सुना गई।

कथा के बैद भागवत भगवान और व्यास पीठ की आरती उतारते यजमान
कथा के बैद भागवत भगवान और व्यास पीठ की आरती उतारते यजमान

कथा व्यास बोले- मोह माया को छोड़कर प्रभु का स्मरण करो

तब कंस ने मथुरा क्षेत्र के सभी गांव में नौनिहालों की हत्या करा दी। इससे उसका पाप और बढ गया। कथा का भावार्थ सुनाते हुए श्रीमज्जगद्गुरू ने सुनाया कि तालों का खुलाना अर्थात प्रभु के आने पर माया से छूट जाना और प्रभु से दूर हो जाने के कारण फिर ताले लग जाना यानि कि माया में फिर फंस जाना। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा ही एक ऐसी कथा है जो मनुष्य को मायाजाल से छुटकारा दिलाकर मोक्ष की प्राप्ति कराती है।

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