कालपी में हाथ कागज उद्योग को उम्मीद बंधी:सपने पूरे होना बाकी, उद्यमी बोले- निवेश और सरकारी सरंक्षण से कारोबार को मिलेगा गौरव

कालपी4 महीने पहले
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बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की शुरुआत से राहगीरों से कहीं ज्यादा कालपी के हाथ कागज उद्योग से जुड़े उद्यमियों में खुशी है। उन्हें उस बात की उम्मीद है कि एक जिला एक उत्पाद योजना में चयनित इस उद्योग के विकास का भी रास्ता खुलेगा। हालांकि इस उम्मीद के परवान चढ़ने पर अभी आशंका के बादल छाए हैं। अब तक शासन स्तर से हाथ कागज उद्योग को कोई संरक्षण या बढ़ावा नहीं मिला है। ऐसे में उद्यमियों ने सरकारी संरक्षण से निवेश बढ़ने पर ही इस काम को पुराना गौरव मिलने की बात कही है।

देश-विदेश में धूम मचा चुके कालपी के हाथ कागज उद्योग को अब सरकारी मदद की दरकार मिल मेड पेपर ने हैंडमेड पेपर उद्योग को बहुत नुकसान पहुंचाया है। शासन स्तर से सरकारी कार्यालयों में हैंडमेड पेपर प्रयोग किए जाने के निर्देश भी अभी तक धरातल पर नहीं उतर सके हैं। यह हाल तब है जब अकेले कालपी में ही हाथ कागज उद्योग की लगभग 100 इकाइयां हैं।

शासन से सरंक्षण न मिलने से बंदी के कगार पर
10 से 12 हजार लोग इससे जुड़े हुए हैं। हाथ कागज उद्योग के विकास के लिए जब सरकार ने एक जिला एक उत्पाद योजना में इसका चयन किया तो इसके विकास की उम्मीद बंधी हालांकि इसके बाद भी हाथ कागज उद्योग की हालत नहीं बदली। यह अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। शासन स्तर से संरक्षण न मिलने से दर्जनों इकाइयां बंदी के कगार पर हैं।

हाथ कागज के उपयोग- हाथ कागज से सरकारी दफ्तरों में उपयोग होने वाले फाइल कवर , कैरी बैग , टैग पेपर , फिल्टर पेपर , लिफाफे , शादी के कार्ड , विजिटिंग कार्ड आदि बनते हैं।

जमीनी लाभ मिलना बाकी
हाथ कागज यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र तिवारी ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे लोकार्पण के मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी को सूर्य मंदिर का चित्र भेंट किया है। यह चित्र कालपी के हाथ कागज पर ही उकेरा गया है। पीएम मोदी के जिले में आगमन पर ओडीओपी योजना की चर्चा तो हुई, पर इस योजना से जुड़े किसी भी उद्यमी को कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया। अभी तक ओडीओपी योजना सिर्फ सरकारी फाइलों व भाषणों में चल रही है।

उद्यमियों की प्रमुख मांगें

  1. सरकारी खरीद में आरक्षण तय होना चाहिए जैसे कुम्हारी कला माटी व कालीन उद्योग में है।
  2. पावर लूम उद्योग की तरह बिजली की दरों में सब्सिडी।
  3. जब ओडीओपी में यह उद्योग है तो यूपी एक्सपोर्ट का हब जिले में ही खोला जाना चाहिए। पहले करोड़ों रुपए का एक्सपोर्ट होता था व बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आती थी।
  4. जीएसटी की दरों में कमी की जानी चाहिए। जीएसटी की दरें 12 से 18 प्रतिशत है, जो पांच प्रतिशत होनी चाहिए।
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