कालपी में भरोसे पर बनाया आशियाना अब गिरेगा:बस्ती से बाहर मकान बनाने के दिए गए थे मौखिक निर्देश, नोटिस मिलते ही सकते में लोग

कालपी8 दिन पहले
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कालपी में दूसरों की लापरवाही का खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ेगा। दरअसल, 30 साल पहले जिला प्रशासन ने बाल्मीकि समाज के लोगों को घर बनाने लिए पट्टा आवंटन किया था, लेकिन जिस जमीन पर का आवंटन हुआ। उस पर घर बनने नहीं दिया गया। जिसके बाद ​​​​​​तत्कालीन चेयरमैन ने उन्हें नगर के बाहर हरचंदपुर रोड पर आवास बनाने के लिए निर्देश दिए थे। लेकिन अब इन आवासों को अवैध बताते हुए नगर पंचायत ने गिराने के लिए नोटिस जारी किए हैं। नोटिस मिलते ही सभी गृहस्वामी सकते में आ गए और अधिकारियों की चौखट पर चक्कर लगा रहे हैं।

नगर पंचायत ने थमाया नोटिस, कब्जा धारकों में मचा हड़कंप
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन व नगर पंचायत सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने के लिए जोर लगा रहा है। जहां नगर पंचायत प्रतिदिन नापजोख कराते हुए कब्जे धारकों को नोटिस थमा रहा है। इससे कब्जे धारकों में हड़कंप मचा हुआ है। कुछ दिन पूर्व नगर पंचायत ने हरचंदपुर रोड स्थित मनसादेवी मंदिर के पास मलिन बस्ती में नोटिस भेजते हुए निर्देश दिए कि आप लोगों के द्वारा बनाया गया आवास अवैध है। इसे हटा लें वरना बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया जाएगा।

नोटिस मिलते ही एक दर्जन लोगों में भय व्याप्त हो गया और उनकी भूख प्यास खत्म हो गई। लोग अधिकारियों की चौखट में चक्कर लगाते हुए आवास को बचाने की गुहार लगा रहे हैं। बाल्मीकि समाज के राजकुमार, कल्लू, घसीटा, तूलईया, रमेश ब्रजमोहन, गोबिंदा, सन्नी व जितेंद्र आदि लोगों ने बताया कि 1993 में प्रशासन ने उनके पास आवास न होने के चलते हो रही परेशानी को देखते हुए पट्टा दिया था। लेकिन जिस जगह का पट्टा था वो आबादी के भीतर था जिस पर आवास बनाने में लोगों ने विरोध किया तो तत्कालीन चेयरमैन ने उन्हें आबादी से बाहर अपना आशियाना बनाने के लिए कहा और हरचंदपुर रोड पर जगह दी गई, जिस पर उन्होंने लाखों रुपये लगा कर अपना आवास बना लिया पर अब नगर पंचायत उनके आवासों को ध्वस्त करने पर आमादा है, जिससे वो अपने बच्चों को लेकर कहा जाएंगे। इस नोटिस से लोगों की रात की नींद उड़ गई है।

नोटिस से एक परिवार के अनाथ बच्चे पशोपेश में बाल्मीकि समाज के लिए बनाई गई बस्ती में एक मकान ऐसा भी है जहां कुदरत का कहर टूट चुका है, क्योंकि 2009 में गृहस्वामी लल्लू की तालाब में डूब कर मौत हो गई थी, जबकि मृतक की पत्नी भी कुछ साल बाद लापता हो गई थी। जिस पर उसके 5 बच्चे मनीष 12 वर्ष, विनीत, अंकज दिलीप व पूजा बेसहारा हो गए। जब रहने तक को आवास नहीं था तो नगर के एक समाज सेवी महेश शिवहरे ने खाली पड़ी जमीन पर आवास का निर्माण करा कर उन्हें रहने के लिए दिया पर अब उक्त आवास ध्वस्त करने की प्रशासन तैयारी कर रहा है। परिवारों में मचा हड़कंप, रातों की नींद भी उड़ गई। मलिन बस्ती के बाशिंदों को मिली नोटिस से उनमें हड़कंप मचा हुआ है। आश्चर्य तो इस बात का है कि उक्त बस्ती में रहने वाले अधिकांश वाशिंदे नगर पंचायत में सफाई कर्मी के पद पर नियुक्त हैं। उन्होंने बताया कि अगर उनके आवास को ध्वस्त किया गया तो लोग सफाई का कार्य नहीं कर पाएंगे। इस नोटिस के बाद लोगों की नींद उड़ सी गई है। लोग अधिकारियों की चौखट के चक्कर काटते नजर आ रहे हैं। वहां से भी केवल आश्वासन दिया जा रहा है।

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