सर्वे के बीच मदरसों की शिक्षा का रिपोर्ट कार्ड:मैथ्स के मौलवी नहीं सुना पाए 13 का पहाड़ा, ज्यादातर मदरसों में इंग्लिश की किताबें नहीं दिखीं

जालौन/ कौशांबी/बुलंदशहर/गाजीपुर/शामली3 महीने पहले

योगी सरकार ने पिछले दिनों प्रदेश में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे कराने का फैसला किया। सरकार का यह फैसला आते ही सियासत शुरू हो गई। किसी ने इसे धर्म से जोड़ा, तो किसी ने एक ही समुदाय को टारगेट करने की बात कही। हालांकि कुछ लोगों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत भी किया।

सर्वे के पीछे सरकार का कहना है कि इससे मदरसों की शिक्षा व्यवस्था बेहतर होगी। साथ ही मदरसों को यूपी मदरसा बोर्ड से मान्यता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

यह एक मदरसे की फोटो है, जहां बच्चे पढ़ रहे हैं।
यह एक मदरसे की फोटो है, जहां बच्चे पढ़ रहे हैं।

इन सारे बयानों के बीच दैनिक भास्कर की टीम यूपी के मदरसों की शिक्षा का स्तर जानने के लिए ग्राउंड पर पहुंची। मदरसों में टीम को बस नाम की हिंदी, इंग्लिश और मैथ्स की पढ़ाई दिखाई दी। मदरसे के बड़े बच्चे भी प्रधानमंत्री और यूपी के मुख्यमंत्री का नाम तक नहीं बता पा रहे थे। अंग्रेजी के शब्दों की स्पेलिंग भी नहीं बता पाए।

बच्चों से जब बातचीत की गई तो उनको मदरसे में हिंदी, इंग्लिश, मैथ्स, साइंस सब पढ़ाया जाता है। जब उनसे इन सब्जेक्ट से जुड़े सवाल पूछे गए, तो वो जवाब नहीं दे पाए। यहां तक कि मदरसे के मैथ्स के टीचर खुद 13 का पहाड़ा नहीं सुना पाए।

जालौन में बच्चे नहीं बता पाए बॉल, कैट और एलीफेंट की स्पेलिंग

छात्र मोहम्मद इलियाज से बातचीत की। उसने बताया कि हमको हिंदी, उर्दू सब पढ़ाई जाती है।
छात्र मोहम्मद इलियाज से बातचीत की। उसने बताया कि हमको हिंदी, उर्दू सब पढ़ाई जाती है।

जगह : जालौन का मदरसा अंजुमन इस्लामिया
जालौन में भास्कर की टीम मदरसे के अंदर पहुंची। ग्राउंड पर कुछ बच्चे खेल रहे थे। वहीं कुछ बच्चे एक क्लास के अंदर बैठकर बातें कर रहे थे। हमने 3-4 बच्चों को पास बुलाया। हमने बच्चे से बात शुरू की। उसने बताया कि वह कक्षा-2 का छात्र है। उन लोगों को यहां पर हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी सब पढ़ाई जाती है। हालांकि, जब उसने बात की गई तो वह किसी भी सवाल का जवाब नहीं दे पाए।

जालौन के इस मदरसे में भास्कर की टीम पड़ताल करने पहुंची।
जालौन के इस मदरसे में भास्कर की टीम पड़ताल करने पहुंची।

वहीं दूसरे छात्र मोहम्मद इलियाज ने पीएम मोदी को यूपी का सीएम बता दिया। इलियाज को एप्पल की स्पेलिंग भी पूछी। लेकिन वह नहीं सुना पाए। छात्र अल्ताफ ने सीएम योगी को देश का पीएम बता दिया। वो कैट और बॉल की स्पेलिंग भी नहीं बता पाया।

कौशांबी के छात्र नहीं बता पाए हिंदी की कोई कविता

जगह : मदरसा दारुल उलूम इमाम अहमद रजा
मदरसे के अंदर छोटे कमरों में क्लास थी। किसी कमरे में सीट रखी थी, किसी में नहीं थी। कुछ बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। हमने 8th क्लास के बच्चे मोहम्मद हसनैन रजा से बात की। उसने बताया कि उसको यहां पर हिंदी भी पढ़ाई जाती है। रहीम और कबीर भी पढ़ाए जाते हैं। लेकिन, वह उनका कोई दोहा नहीं सुना पाया। वहीं, छात्र उबैश इंग्लिश की कोई भी कविता सुना नहीं पाया। छात्रों का कहना है कि उन्हें यहां पर पोयम याद नहीं कराई गई है। बस ऐसे ही पढ़ा दी जाती है।

मोहम्मद आकिब 3rd में पढ़ता है, लेकिन उसे न ही सीएम का नाम पता है और न ही पीएम का।
मोहम्मद आकिब 3rd में पढ़ता है, लेकिन उसे न ही सीएम का नाम पता है और न ही पीएम का।

शामली में कहा- जब सर्वे टीम आए, तब आना

जगह : जामिया रहमानिया फैज उल कुरान मदरसा

मदरसे के अंदर हमारी टीम को बच्चों से बात नहीं करने दिया जा रहा था। मदरसे के शिक्षकों का कहना था कि जब सर्वे टीम आए, तब आप लोग उनके साथ ही आना। बहुत कहने पर दो बच्चों को मदरसों से बाहर बुलाया गया।

हमने पहले छात्र मोहम्मद आकिब से बात की। आकिब को न ही सीएम का नाम पता है और न ही पीएम का नाम पता है। आकिब ने खुद को कक्षा-3 का छात्र बताया। वहीं, छात्र साद ने पीएम नरेंद्र मोदी को यूपी का सीएम और देश का पीएम दोनों बता दिया।

खुर्जा के छात्र नहीं सुना पाए इंग्लिश की पोयम।
खुर्जा के छात्र नहीं सुना पाए इंग्लिश की पोयम।

खुर्जा के छात्र नहीं सुना पाए इंग्लिश की पोयम

जगह : बुलंदशहर के खुर्जा का गैर-सरकारी मदरसा
मदरसे में बच्चों के रहने के साथ-साथ खाने-पीने की व्यवस्था भी दिखी। मदरसे में दूसरे जिलों के बच्चे भी तालीम लेने आए हुए थे। वे यहीं पर रहते हैं। पूछने पर छात्र अकरम ने सीएम-पीएम का नाम तो सही बताया, लेकिन इंग्लिश की पोयम नहीं सुना पाए। उसका कहना है कि यहां पर अभी ये सब याद नहीं करवाया जाता। छात्र अब्दुल कादिल ने भी राष्ट्रपति से लेकर डीएम तक का नाम सही बताया। मदरसों में हिंदी की किताबें तो दिखाई दीं, लेकिन इंग्लिश की किताबें नहीं रखी थीं।

गाजीपुर के मदरसे के टीचर मोहम्मद सलीम मैथ्स पढ़ाते हैं, लेकिन उनको ठीक से पहाड़े भी याद नहीं हैं।
गाजीपुर के मदरसे के टीचर मोहम्मद सलीम मैथ्स पढ़ाते हैं, लेकिन उनको ठीक से पहाड़े भी याद नहीं हैं।

गाजीपुर में मैथ्स और साइंस के टीचर नहीं सुना पाए 13 का टेबल

जगह : मदरसा मोहसिनुल उलूम
इस मदरसे के अंदर जाने पर हम लोगों को बाहर ही रोक दिया गया। बहुत कहने पर भी बच्चों से बात नहीं करने दी गई। हम लोगों से कहा गया कि बच्चे अभी आराम कर रहे हैं। उन्हें उठाया नहीं जाएगा। बहुत कहने पर मैथ्स और साइंस टीचर मोहम्मद सलीम को बुलाया गया।

हमने उनसे पढ़ाई का तरीका पूछा। इस पर उन्होंने कहा कि हम लोग छोटे क्लास के बच्चों को 10 तक और बड़े क्लास के बच्चों को 15 तक के टेबल याद करवाते हैं। बिना टेबल के बच्चे मैथ्स कैसे पढ़ेंगे? इस बातचीत के बाद जब हमने उनसे 13 का टेबल सुनाने के लिए बोला, तो वो हिचकिचाने लगे। उन्होंने 13 का टेबल सुनाना शुरू किया। 3-4 नंबर के बाद वो रुकने लगे। उन्होंने पूरा टेबल गलत सुनाया।

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इन बिंदुओं पर है सरकार का सर्वे फॉर्मेट
यूपी में गैर सरकारी मदरसों के सर्वे के लिए योगी सरकार ने एक फॉर्मेट तैयार किया है। 11 पॉइंट्स पर रिपोर्ट तलब की गई है। योगी सरकार का कहना है सर्वे कराने के पीछे बेहतर शिक्षा व्यवस्था करना है।

गैर सरकारी मदरसों के सर्वे के लिए योगी सरकार ने एक फॉर्मेट तैयार किया है।
गैर सरकारी मदरसों के सर्वे के लिए योगी सरकार ने एक फॉर्मेट तैयार किया है।

इन पॉइंट्स पर सरकार कर रही है सर्वे…

  • मदरसे का नाम।
  • मदरसे को संचालित करने वाली संस्था।
  • स्थापना वर्ष।
  • मदरसे की वर्तमान स्थिति का संपूर्ण विवरण (निजी और किराए का भवन)।
  • क्या मदरसे का भवन छात्र छात्राओं के लिए सुरक्षित है?
  • मदरसे में पढ़ रहे छात्र छात्राओं की कुल संख्या क्या है?
  • मदरसे में कुल शिक्षकों की संख्या क्या है?
  • मदरसे में लागू पाठ्यक्रम क्या है?
  • मदरसे की आय का स्रोत क्या है?
  • क्या इन मदरसों में पढ़ रहे छात्र छात्राएं किसी और शिक्षण संस्थान स्कूल में नामांकित हैं?
  • क्या किसी गैर सरकारी संस्था या समूह से मदरसे संबद्ध है? अगर हां तो विवरण देना होगा।

(रिपोर्ट: जालौन से अनुज कौशिक, कौशांबी से अजय कुमार, शामली से सलेख, खुर्जा से तुषार गुप्ता, गाजीपुर से कृपा कृष्णा)