जालौन…शहीद का दर्जा नहीं देने पर लगाया जाम:गोली लगने से हुई थी जवान की मौत, सेना ने बताई आत्महत्या की बात; परिजनों ने कहा- सम्मान के साथ हो विदाई

जालौ7 महीने पहले
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जालौन में सेना के जवान को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर परिजनों ने लगाया जाम। - Dainik Bhaskar
जालौन में सेना के जवान को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर परिजनों ने लगाया जाम।

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में 69 राजपूताना राइफल में तैनात जालौन के एक जवान की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गई थी। आज जवान का शव उसके पैतृक गांव बैरई पहुंचा। जवान को शहीद का दर्जा न दिए जाने से नाराज परिजनों ने शव रखकर जमकर हंगामा किया। परिजनों ने शहीद का दर्जा देने की मांग की। प्रशासन से कोई आश्वासन न मिलता देख परिजनों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर शव को जोल्हूपुर-हमीरपुर मार्ग पर रखकर जाम लगा लिया।

बैरई गांव के रहने वाला था जवान

जाम की सूचना मिलते ही उरई से प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों और ग्रामीणों को समझाया-बुझाया और सम्मान के साथ शव का अंतिम संस्कार कराने की बात कही। इसके बाद ग्रामीणों ने जाम खोला। बता दें कि कालपी कोतवाली क्षेत्र के बैरई गांव के रहने वाले अंकित सिंह चौहान जम्मू-कश्मीर के राजौरी में 69 राजपूताना राइफल में तैनात थे। बीते दिन संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से उनकी मौत हो गई थी। जब सेना के अधिकारियों ने जांच की तो मामला आत्महत्या का निकला, जिस पर अंकित के शव का पोस्टमार्टम कराया गया।

जोल्हूपुर-हमीरपुर मार्ग पर लगाया जाम

सोमवार को अंकित का शव उसके पैतृक गांव बैरई पहुंचाया गया। बिना सेना के वाहन के शव गांव में पहुंचा तो परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश पनप गया। उन्होंने शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग शुरू कर दी। परिजन शव को कालपी कोतवाली लेकर पहुंच गए और वहां पर घेराव करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस ने ग्रामीणों और परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह शहीद का दर्जा दिलाने की मांग करते रहे। जब उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो शव को जोल्हूपुर-हमीरपुर मार्ग पर ले गए और वहां पर जाम लगा दिया।

कालपी विधायक भी मौके पर पहुंचे

जाम लगने से झांसी-कानपुर और हमीरपुर मार्ग का यातायात थम गया। जाम की सूचना मिलते ही उरई से अपर पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह, कालपी विधायक नरेंद्र पाल सिंह जादौन, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. धनश्याम अनुरागी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने जाम लगाए ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। कड़ी मशक्कत के बाद अपर पुलिस अधीक्षक, दोनों जनप्रतिनिधियों और अन्य अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाया, तब कहीं जाकर जाम खोला गया।

जवान के परिजनों को मिलेंगी सारी सुविधाएं

जवान अंकित सिंह के पिता शिव शंकर सिंह, चाचा बलराम और उमाशंकर ने बताया कि अंकित को बटालियन में परेशान किया जाता था, जिससे तंग आकर उसने जान दी। वहीं उसे शहीद का भी दर्जा नहीं दिया गया। साथ ही उसके शव को एक गाड़ी से भेज दिया गया। शव को सेना की गाड़ी से नहीं भेजा गया। एएसपी राकेश कुमार सिंह ने बताया कि सेना के अधिकारियों से परिजनों की बात कराई गई है। पूरे सम्मान के साथ जवान का अंतिम संस्कार किया जाएगा और जो भी शासन की तरफ से सुविधाएं हैं, वह जवान के परिजनों को दिलाई जाएंगी।