जालौन में होती है अनोखी रामलीला:169 सालों से चली आ रही आयोजन की परंपरा, दिखाया जाता है जटायू-रावण युद्ध, हिंदू-मुस्लिम मिलकर लेते हैं भाग

जालौन2 महीने पहले
जालौन में रामलीला में दिखाया जा रहा है जटायू- रावण युद्ध।

जालौन में एक अनोखी किस्म की रामलीला का मंचन होता है। यहां कलाकार मंच पर अपना किरदार नहीं निभाते। बल्कि कुछ दृश्य सजीव तौर पर दिखाए जाते हैं। यहां पर मारीच वध के साथ रावण-जटायू के युद्ध का सजीव मंचन होता है। जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं। जिसके चलते सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन भी मुस्तैद रहता है।

169 सालों से निरंतर चली आ रही है परम्परा
जालौन के कोंच नगर में पिछले 169 सालों से यह रामलीला आयोजित की जा रही है। यह रामलीला अयोध्या-बनारस के बाद सबसे बड़ी मैदानी रामलीला मानी जाती है। जिसमें राम-लक्ष्मण के साथ सीता का किरदार छोटे-छोटे बच्चे निभाते हैं। यहां जो भी युद्ध होते हैं वह मंच पर न होकर मैदान में सजीव किए जाते हैं। मंगलवार को यहां मारीच वध, सीता हरण और रावण-जटायु युद्ध का सजीव मंचन किया गया। जिसे देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ जुटी थी।

हिन्दू-मुस्लिम एक साथ मिलकर मनाते है मेला
रामलीला समिति के आयोजक रमेश तिवारी, राहुल तिवारी और अतुल चतुर्वेदी ने बताया जिस तरह से कोंच के कलाकारों के द्वारा रामलीला में सजीव अभिनय किया जाता है। इस तरह का अभिनय पूरे देश- प्रदेश में कहीं भी देखने को नहीं मिलता है। यहां पर हिन्दू-मुस्लिम एक साथ मिलकर मेला मनाते है। इस रामलीला का शोध अयोध्या संस्थान द्वारा किया जा चुका है। इसके अलावा यह आयोजन लिमका बुक में रिकार्ड स्थापित कर चुका है।

टोबैगो एण्ड त्रिनिडाड के प्रधानमंत्री की भतीजी ने किया था शोध
यह रामलीला रिसर्च करने वालों के लिए रिसर्च का विषय भी बन चुकी है। इस रामलीला के इतिहास को देखते हुए 9 साल पहले पूर्व टोबैगो एण्ड त्रिनिडाड के प्रधानमंत्री की भतीजी इन्द्राणी रामदास को उनकी सरकार ने कोंच की रामलीला पर शोध करने के लिए विशेष रूप से भेजा था।

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