जालौन में आज मनाया गया दशहरा:रावण-मेघनाद के पुतलों के साथ होता है राम-लक्ष्मण का सजीव युध्द, 169 सालों से चली आ रही है परंपरा

जालौन2 महीने पहले
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जालौन में आज मनाया गया दशहरा। - Dainik Bhaskar
जालौन में आज मनाया गया दशहरा।

जालौन में दशहरा शनिवार को 169 सालों पुरानी परंपरा के साथ मनाया गया। यहां पर रावण मेघनाथ के 20 फिट ऊंचे पुतलों का युद्ध राम और लक्ष्मण के साथ सजीव होता है। अंत में बुराई के प्रतीक के रूप में रावण और मेघनाथ का संहार राम-लक्ष्मण द्वारा किया गया। यह युद्ध कोंच के ऐतिहासिक धनु तालाब के मैदान पर होता है। इस युद्ध को देखने के लिए 20 से 30 हजार से अधिक की भीड़ जुटती है।

169 सालों से चली आ रही है परंपरा

जिले के कोंच नगर के धनु तालाब में यह रामलीला होती है। यहां पर 169 सालों से राम-रावण और लक्ष्मण मेघनाथ युद्ध परंपरागत तरीके से होता है। यहां पर राम और रावण का युद्ध सजीव होता है। जिसे देखने के लिये दूर दराज के क्षेत्रों से लोग आते हैं। यहां रावण और मेघनाद के 20 फिट से ऊंचे पुतलो को बड़े-बड़े पहियों वाले रथ में बांधा जाता है। इन पुतलों को पूरे मैदान में दौड़ाया जाता है। जिनसे युद्ध स्वयं भगवान राम और लक्ष्मण करते हैं। इस युद्ध में कई बार मेघनाथ और रावण के पुतले कई बार जमीन में गिरते हैं। इस युद्ध में लक्ष्मण को शक्ति भी लगती है और हनुमान संजीवनी बूटी भी लाते है। जब राम और रावण का युद्ध होता है तो इन पुतलों को रस्सियों की सहायता से पूरे मैदान में दौड़ाया जाता है। रावण और मेघनाद के पुतलों को रथों में रखकर दौड़ाने के पीछे लोगो का तर्क है कि बुराई चाहे जितना भी भागे उसका अंत निश्चित ही होता है।

यहां पर बना दी गई पक्की लंका

धनुताल के मैदान पर रामलीला के मंचन के लिये पक्की लंका भी बना दी गई है। यहां पर अशोक वाटिका से सीता मां को रखा गया। यहां से वह पूरे युद्ध को खुद देखती हैं। इसके अलावा अयोध्या को भी बनाया गया था। जहां पर भरत और शत्रुहन भी बैठे हुए दिखाई देते हैं।

कोरोना के कारण रावण और मेघनाथ के पुतलें 20 फिट के बने

जालौन के कोंच नगर में दशहरा का पर्व बड़े धूम-धाम से शनिवार को मनाया गया। यहां पर पहले 40 फिट के रावण और मेघनाथ के पुतले बनाए जाते थे। जिन्हें तीर चलाकर राम और लक्ष्मण द्वारा मारा जाता था। लेकिन कोरोना महामारी के कारण इन पुतलों की ऊंचाई 40 फीट से 20 फिट कर दी गई है। वहीं लोगों में जो उत्साह पहले देखने को मिलता था। वह उत्साह अब कम हो गया है।

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