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जौनपुर में हड़ताल करेंगे 535 ईंट भट्ठा मालिक:80 हजार से अधिक मजदूर होंगे बेरोजगार, 66 करोड़ रुपए राजस्व का हो सकता है नुकसान

जौनपुर4 महीने पहले
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भट्ठा बंद रहने के कारण सरकार को लगभग 66 करोड़ रुपये राजस्व का भी नुकसान हो सकता है। - Dainik Bhaskar
भट्ठा बंद रहने के कारण सरकार को लगभग 66 करोड़ रुपये राजस्व का भी नुकसान हो सकता है।

जौनपुर में 535 ईट भट्ठा मालिकों ने इस बार ईंट नहीं बनाने का मन बना लिया है। भट्ठा मालिकों की तरफ से हड़ताल करने की बात सामने आ रही है। जीएसटी संबंधित मांग न माने जाने के संदर्भ पर उन्होंने यह फैसला लिया है। इसकी सूचना जिला प्रशासन, वित्त मंत्रालय, पर्यावरण विभाग और कोयला मंत्री को दी गई है। भट्ठा मालिक के हड़ताल पर जाने से ईंट की कीमतों में भी इजाफा होने का आसार नजर आ रहा।

GST न लगाने की मांग

ईट निर्माण समिति के महामंत्री अनिल सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि भट्ठा मालिक को एक करोड़ रुपए पर एक फ़ीसदी टैक्स देना होता था। लेकिन सरकार ने इस पर 6 फ़ीसदी जीएसटी लगा दी है। सरकार द्वारा कोयले पर भट्ठा मालिकों से 5 फ़ीसदी जीएसटी ली जाती है। अक्टूबर महीने से ईट भट्ठों में काम शुरू हो जाता है। ऐसे में भट्ठा मालिकों की मांग है कि उन्हें कंपोजिशन टैक्स की श्रेणी में रखा जाए। इस स्लैब में उनसे कोई भी टैक्स न लिया जाए।

बेरोजगार हो सकते हैं 80 हज़ार मजदूर

535 भट्ठे अगर हड़ताल पर चले जाते हैं तो लगभग 80 हज़ार मजदूरों पर बेरोजगारी का खतरा मंडराने लगेगा। आमतौर पर कच्ची पथाई के लिए एक भट्टे पर 60 से 80 मजदूर लगते हैं। मजदूरों की दिहाड़ी लगभग 400 से 500 रुपयों के बीच होती है। मुख्य रूप से यह मजदूर रांची, झारखंड और बिहार से आते हैं। ऐसे में अगर 535 भट्ठे हड़ताल पर चले जाते हैं तो इन मजदूरों के ऊपर बेरोजगारी का संकट मंडराने लगेगा।

बढ़ जाएगी निर्माण लागत

सरकार को लगभग 66 करोड़ रुपये राजस्व का भी नुकसान हो सकता है। भट्ठा बंद रहने के कारण लगभग 9 करोड़ 36 लाख रुपये टैक्स का भी नुकसान होगा। इसके अलावा निर्माण कार्यों की लागत भी बढ़ सकती है। 1000 ईटों की कीमत 8 हज़ार से बढ़कर 10 हज़ार होने के आसार हैं। इसका असर निजी कामकाज के साथ-साथ सरकारी काम के पुराने टेंडर पर भी पड़ेगा।