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  • 589 Hearings, 19 Witnesses And 27 Years Waiting, : Court Will Decide The Sentence Of Former MP Umakant Yadav In GRP Constable Murder Case On August 8, Name Also Appeared In Guest House Case

पूर्व सांसद उमाकांत को 8 अगस्त को होगी सजा:27 साल पुराने GRP सिपाही हत्याकांड में दोषी, 2007 में मायावती ने घर से कराया था गिरफ्तार

जौनपुर2 महीने पहले

जौनपुर की एमपी-एमएलए की विशेष कोर्ट ने जौनपुर की मछलीशहर लोकसभा से पूर्व सांसद उमाकांत यादव पर आरोप तय कर दिए हैं। 27 साल पहले जीआरपी सिपाही हत्याकांड में कोर्ट ने उमाकांत यादव को दोषी करार दिया है। मामले में उमाकांत सहित 7 आरोपियों को कोर्ट 8 अगस्त को सजा सुनाएगी।

इस केस में अब तक 598 सुनवाई हो चुकी है। सरकारी अधिवक्ता लाल बहादुर पाल और सीबीसीआईडी के सरकारी वकील मृत्युंजय सिंह ने 19 गवाहों की गवाही कराई। इसके आधार पर चार्ज तय किया गया है। इस दौरान कांस्टेबल लल्लन सिंह गवाही के दौरान पक्षद्रोही घोषित हो गया। पूर्वांचल की राजनीति में उमाकांत यादव बहुचर्चित सियासी चेहरा हैं। उनका नाम गेस्ट हाउस कांड में भी सामने आया था।

सोमवार यानी 8 अगस्त को पूर्व सांसद उमाकांत यादव के खिलाफ सजा सुनाई जाएगी।
सोमवार यानी 8 अगस्त को पूर्व सांसद उमाकांत यादव के खिलाफ सजा सुनाई जाएगी।

स्टेशन पर हुआ था मामूली विवाद
4 फरवरी 1995 को जौनपुर के शाहगंज स्टेशन पर दो पक्षों में विवाद हो गया। जीआरपी चौकी को सूचना दी गई कि प्लेटफार्म नंबर एक पर बेंच पर बैठने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया है। उनमें से एक व्यक्ति खुद को विधायक उमाकांत यादव का ड्राइवर राजकुमार बता रहा था।

कहासुनी हुई, तो ड्राइवर ने जीआरपी के सिपाही रघुनाथ सिंह को थप्पड़ जड़ दिया। बाद में अन्य सिपाहियों की मदद से राजकुमार को जीआरपी चौकी में लाकर बंद किया गया।

लॉकअप पर हुई अंधाधुंध फायरिंग
किसी ने इस बात की सूचना उमाकांत यादव को दी। आरोप है कि असलहे से लैस होकर उमाकांत अपने गनर बच्चूलाल, PRD जवान सूबेदार, धर्मराज, महेंद्र और सभाजीत के साथ पहुंच गए। इन सभी के हाथों में रिवॉल्वर, कार्बाइन रायफल और देसी तमंचा था।

जीआरपी लॉकअप के सामने उमाकांत ने सभी को ललकार कर गोलियां चलाने को कहा। इसके बाद स्टेशन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई। इस दौरान वहां दहशत फैल गई थी और भगदड़ मच गई थी।

GRP सिपाही ने मौके पर तोड़ा दम
फायरिंग की चपेट में आने से जीआरपी कांस्टेबल अजय सिंह ने मौके पर दम तोड़ दिया था। गोली लगने से सिपाही लल्लन सिंह, रेलवे कर्मचारी निर्मल और यात्री भरत लाल गंभीर रूप से घायल हो गए। अफरा-तफरी के माहौल का फायदा उठाकर उमाकांत अपने साथी को लॉकअप से निकाल कर फरार हो गए।

कांस्टेबल रघुनाथ सिंह ने घटना को लेकर एफआईआर दर्ज कर कराई थी। पुलिस ने हत्या, हत्या के प्रयास सहित 10 गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में छानबीन शुरू की गई और इसकी विवेचना सीबीसीआईडी को भी सौंपी गई।

ये आरोप हुए तय
आरोपित उमाकांत समेत 7 के खिलाफ IPC की धारा 147 बलवा, धारा 148 घातक हथियारों से युक्त होकर बलवा, धारा 225 आरोपित राजकुमार को विधि पूर्ण अभिरक्षा से छुड़वाना, धारा 302 हत्या, धारा 307 हत्या का प्रयास, धारा 332 लोकसेवक को चोट पहुंचाना, धारा 333 गंभीर चोट पहुंचाना, धारा 427 रेलवे स्टेशन के कमरों के दरवाजे फायर कर नष्ट करना, धारा 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट में अंधाधुंध फायरिंग करके अफरा-तफरी मचाना, इसके अलावा आरोपित राजकुमार पर धारा 224 में विधि पूर्ण अभिरक्षा से भागकर निकलने की धाराओं में 13 फरवरी 2007 को अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में आरोप तय हुआ था।

लखनऊ के गेस्ट हाउस में 1995 में बसपा अध्यक्ष मायावती के साथ मारपीट की गई थी।
लखनऊ के गेस्ट हाउस में 1995 में बसपा अध्यक्ष मायावती के साथ मारपीट की गई थी।

गेस्ट हाउस कांड में भी सामने आया था नाम
यूपी की सियासत में बहुचर्चित गेस्ट हाउस कांड में भी उमाकांत यादव का नाम सामने आया था। 2 जून 1995 को मीराबाई मार्ग पर बने गेस्ट हाउस में मायावती अपने विधायकों के साथ बैठक कर रहीं थीं। बसपा के समर्थन वापस लेने से मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार अल्पमत में आ गई थी।

इसी दौरान समाजवादी पार्टी के नाराज कार्यकर्ताओं ने गेस्ट हाउस पर धावा बोल दिया था। वहां पर समाजवादी पार्टी के लोगों ने जमकर मारपीट की और मायावती तक पर हमला बोल दिया था। किसी तरह बसपा नेताओं ने मायावती को सपा के उग्र कार्यकर्ताओं से बचाया था। इस मामले में शिवपाल यादव, माफिया डॉन अतीक अहमद, अन्ना शुक्ला और उमाकांत यादव का नाम सामने आया था।

मायावती ने घर बुलाकर करवाया था अरेस्ट
वर्ष 2004 में उमाकांत यादव जौनपुर की मछलीशहर लोकसभा सीट से बसपा की टिकट पर सांसद चुने गए थे। जेल में रहते हुए ही उमाकांत यादव ने चुनाव जीत लिया था। उस वक्त मछलीशहर लोकसभा सीट सुरक्षित न होकर सामान्य सीट थी। यूपी में 2007 में मायावती की सरकार बनी। इस दौरान उमाकांत पर महिला का घर गिराने का आरोप लगा, जिसमें वह फरार थे।

मायावती ने उमाकांत को मिलने के लिए लखनऊ बुलाया। इस दौरान सीएम आवास के सामने तैनात पुलिस ने उमाकांत यादव को धर दबोचा और जेल भेज दिया गया। इस घटना ने उमाकांत का सियासी जीवन खत्म कर दिया। इसके बाद उमाकांत यादव कभी चुनाव नहीं लड़ पाए।