• Hindi News
  • Local
  • Uttar pradesh
  • Jaunpur
  • Contested The Election Only Once, Seeing The Congress Candidate Smoking Beedi Said – It Is Not Possible To Defeat This Man And In Reality He Lost The Election.

दीन दयाल उपाध्याय की जयंती...पेश है रोचक किस्सा:पंडितजी सिर्फ एक बार जौनपुर से चुनाव लड़े, यहां कांग्रेस प्रत्याशी को बीड़ी पीते देखकर बोले- इसे हराना मुमकिन नहीं और हकीकत में हार गए

जौनपुर22 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

आज दीनदयाल उपाध्याय की जयंती है। अपनी जिंदगी में उन्होंने सिर्फ एक ही बार चुनाव लड़ा। वो जगह जौनपुर सीट है। इस चुनाव से जुड़ा एक रोचक किस्सा है। जिसे कांग्रेस के पूर्व सांसद स्व. कमला प्रसाद सिंह के पुत्र अनिल सिंह ने भास्कर से साझा किया। ये बात उन्हें उनके पिता ने बताई थी।

बात 1963 की है। तब दीनदयाल उपाध्याय जौनपुर से लोकसभा के उप चुनाव प्रत्याशी थे। प्रत्याशी बनने के बाद उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को बीड़ी पीते देखकर बोला कि इस आदमी काे चुनाव हराना मुमकिन नहीं है। उनकी कही यह बात सच साबित हुई और वह चुनाव हार गए थे।

आइए पढ़ते हैं, उस चुनाव का पूरा किस्सा क्या था-

कांग्रेस प्रत्याशी राजदेव सिंह के खिलाफ लड़े थे चुनाव

1962 में जौनपुर लोकसभा के आम चुनाव में जनसंघ के उम्मीदवार को बड़ी जीत हासिल हुई थी, लेकिन 1 साल के भीतर ही जनसंघ के सांसद डॉ. ब्रह्मजीत सिंह का निधन हो गया। 1963 में इस सीट पर उपचुनाव हुए। पार्टी ने इस सीट से उपचुनाव के प्रत्याशी के तौर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय का चयन किया।

पार्टी का मानना था कि जनसंघ के कद्दावर नेता इस सीट को आसानी के साथ जीत जाएंगे। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस में भी दो गुट थे। ऐसे में जनसंघ कयास लगाए बैठा था कि कांग्रेस की गुटबाजी का भी लाभ उन्हें मिलेगा। इस चुनाव में कांग्रेस ने राज देव सिंह को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के खिलाफ अपना प्रत्याशी बनाया था।

चुनाव में कांग्रेस ने राज देव सिंह को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के खिलाफ अपना प्रत्याशी बनाया था।
चुनाव में कांग्रेस ने राज देव सिंह को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के खिलाफ अपना प्रत्याशी बनाया था।

बड़े सियासी चेहरे आए दीन दयाल के समर्थन में
कांग्रेस के बड़े नेताओं ने स्थानीय स्तर पर गुटबाजी को समाप्त करा दिया। यहां से यह चुनाव रोचक स्थिति में आ गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चुनावी प्रचार में बड़े सियासी चेहरे जौनपुर में नजर आने लगे।

अटल बिहारी बाजपेई, रज्जू भैया, माधव प्रसाद त्रिपाठी और प्रताप नारायण जैसे लोगों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय का चुनावी प्रचार शुरू किया। कांग्रेस ने इस चुनाव को स्थानीय बनाम बाहरी करार दे दिया। कांग्रेस समर्थकों ने इस बात पर जोर दिया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जौनपुर के नहीं हैं। चुनाव अपनी रोमांचक स्थिति में पहुंच चुका था।

अनिल सिंह, कांग्रेस के पूर्व सांसद स्व. कमला प्रसाद सिंह के पुत्र।
अनिल सिंह, कांग्रेस के पूर्व सांसद स्व. कमला प्रसाद सिंह के पुत्र।

रिक्शे वाले से बीड़ी मांगकर पी रहे थे कांग्रेस प्रत्याशी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनिल सिंह बताते हैं कि पैदल चुनावी प्रचार के दौरान पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने जौनपुर के ओलंदगंज चौराहे पर भारी भीड़ देखी। लोगों की भारी भीड़ देखकर वह रुक गए। उन्होंने देखा कि एक आदमी को चारों तरफ से लोगों ने घेर रखा है। वह आदमी पास में ही एक रिक्शे वाले से मांगकर बीड़ी पी रहा था। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपने सहयोगियों से उस आदमी के बारे में पूछा। उनके सहयोगी ने बताया कि कांग्रेस के उम्मीदवार राजदेव सिंह है।

अटल बिहारी बाजपेई, रज्जू भैया, माधव प्रसाद त्रिपाठी और प्रताप नारायण जैसे लोगों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय का चुनावी प्रचार में शामिल हुए थे।
अटल बिहारी बाजपेई, रज्जू भैया, माधव प्रसाद त्रिपाठी और प्रताप नारायण जैसे लोगों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय का चुनावी प्रचार में शामिल हुए थे।

लोकसभा के उपचुनाव में मिली थी हार
यह सुनकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपने सहयोगियों से कहा कि इस आदमी को चुनाव हराना मुमकिन नहीं है। चुनावी निष्कर्ष में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की बात सही साबित हुई। जनसंघ के कद्दावर नेता को लोकसभा के उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। यह उनके जीवन का पहला और आखिरी चुनाव था। जनसंघ के जिस कद्दावर नेता ने पार्टी को नई दिशा दिखाई थी, उसे अपने जीवन के एकमात्र चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी प्रभावित थे
दीनदयाल उपाध्याय आजीवन संघ के प्रचारक रहे। 1952 के जनसंघ के प्रथम अधिवेशन में वह महामंत्री थे। श्यामा प्रसाद मुखर्जी दीनदयाल उपाध्याय से प्रभावित रहते थे। उनकी कार्यप्रणाली को देखकर उन्होंने कहा था कि यदि दीनदयाल उपाध्याय उन्हें मिल रहे हैं तो वह भारतीय राजनीति का नक्शा बदल सकते हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के निधन के बाद जनसंघ को दिशा देने का कार्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने किया था।

खबरें और भी हैं...