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जौनपुर...वकील की बहन को 3 महीने बाद मिलेगा इंसाफ:कोरोना काल में ऑक्सीजन न मिलने से हुई थी मौत, DM-CMO समेत अस्पताल के स्टाफ पर लगाया था आरोप, 19 सितंबर को होगी मामले पर सुनवाई

जौनपुरएक महीने पहले
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वकील ने DM-CMO समेत अस्पताल के स्टाफ पर लगाया था आरोप। - Dainik Bhaskar
वकील ने DM-CMO समेत अस्पताल के स्टाफ पर लगाया था आरोप।

जौनपुर में दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता रामसकल यादव के बहन की मौत 3 मई को हुई थी। उनका आरोप है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमें की लापरवाही के कारण उनकी बहन ने दम तोड़ दिया था। सीआरपीसी के तहत डीएम मनीष कुमार वर्मा, सीएमओ, सीएमएस और ड्यूटी पर कार्यरत जिला चिकित्सालय के डॉक्टर और नर्स के खिलाफ उन्होंने प्रार्थना पत्र दिया था। 19 सितंबर को इस मामले में सुनवाई होनी है।

अस्पताल प्रशासन के खिलाफ की थी शिकायत।
अस्पताल प्रशासन के खिलाफ की थी शिकायत।

प्राइवेट अस्पताल को एडमिट करने पर लगी थी रोक

उनका कहना है कि कोरोना के दूसरे फेज के दौरान जिला प्रशासन ने प्राइवेट अस्पतालों में नोटिस लगाया था कि, जो प्राइवेट अस्पताल सांस लेने में तकलीफ होने वाले मरीजों को एडमिट करेगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।यह भी कहा गया था कि अगर ऐसा हुआ तो उनका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। इस स्थिति में इलाज की सम्पूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और सीएमएस की होती है। अधिवक्ता की अर्जी पर सीजेएम ने डीएम, सीएमओ, सीएमएस और डॉक्टर समेत पांच पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में कोर्ट ने थाना कोतवाली से 19 सितंबर को रिपोर्ट तलब की है।

जिला अस्पताल में नहीं मिल रहा था बेड

अधिवक्ता राम शकल यादव ने बताया कि उनकी बड़ी बहन चंद्रावती (56 साल) कोरोना से संक्रमित थी। जिला प्रशासन द्वारा जारी की गई गाइडलाइन के कारण प्राइवेट हॉस्पिटल उन्हें एडमिट करने से मना कर रहा था। उनकी बहन को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। किसी तरह 29 मई की शाम को उन्होंने अपनी बहन को जिला चिकित्सालय के वार्ड में एडमिट कराया। उस दिन उनकी बहन को ऑक्सीजन की सुविधा मुहैया कराई गई थी। उनका आरोप है कि दूसरे दिन अस्पताल प्रशासन ने जानबूझकर उनकी बहन का बेड शिफ्ट कर दिया। दूसरे दिन उनकी बहन को ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं कराया गया। इस मामले में जब उन्होंने सीएमएस डॉ अनिल शर्मा से ऑक्सीजन के लिए पूछा, तो उन्होंने कहा कि उनके पास ऑक्सीजन की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।

डॉक्टर और नर्स पर लगाया था आरोप।
डॉक्टर और नर्स पर लगाया था आरोप।

लगातार घट रहा था ऑक्सीजन का लेवल

अपनी बहन की हालत बिगड़ती देख वह सीटी स्कैन कराने के लिए बाहर जाने की बात कहने लगे। बाहर जाने की बात पर जिला अस्पताल के लोगों ने कहा कि अगर वह मरीज को बाहर ले जायेंगे तो दुबारा अस्पताल में बेड नहीं मिलेगा। इस दौरान उनकी बहन की तबियत लगातार खराब होती जा रही थी। ऑक्सीजन लेवल भी घटकर 60 से 65 के बीच में आ गया था।

3 मई को बहन ने तोड़ दिया था दम

परेशान होकर उन्होंने इसकी शिकायत डॉक्टर से की। इस दौरान उन्होंने प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए हेल्पलाइन नंबर पर भी फोन मिलाया। उनका आरोप है कि हेल्पलाइन नंबर पर मिलाया गया फोन काट दिया गया था। जिला चिकित्सालय में तैनात डॉक्टर भी मरीज को रेफर करने की बात कर रहे थे। अधिवक्ता राम शकल यादव का आरोप है कि 3 मई 2021 को ऑक्सीजन के अभाव में उनकी बहन ने दम तोड़ दिया। उन्होंने स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही का वीडियो बना लिया था। साक्ष्य के साथ उन्होंने कोतवाली पुलिस को इसकी सूचना भी दी, लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। अधिवक्ता रामसकल यादव कहते हैं कि फिर उन्होंने कोर्ट का सहारा लिया। कोर्ट ने कोतवाली पुलिस से इस मामले में 19 सितंबर को रिपोर्ट तलब की है।

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