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जौनपुर...उरी हमले में शहीद के पिता का छलका दर्द:PMO को झूठी रिपोर्ट भेजता है जिला प्रशासन, स्मृति द्वार बनाने में अड़ंगा लगा रहे दबंग

जौनपुर3 महीने पहले
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मीडिया से बातचीत के दौरान गेट न बनने को लेकर शहीद के पिता का दर्द छलका। - Dainik Bhaskar
मीडिया से बातचीत के दौरान गेट न बनने को लेकर शहीद के पिता का दर्द छलका।

18 सितंबर 2016 को उरी हमले में जौनपुर के राजेश सिंह भी शहीद हो गए थे। सरकार ने उनकी याद में स्मृति द्वार बनाने का ऐलान किया था। जो 5 साल बाद भी नहीं बन पाया। इसको लेकर शहीद के पिता का अब दर्द सामने आया है। उन्होंने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिला प्रशासन शहीद द्वार को लेकर PMO को गलत रिपोर्ट भेजते हैं।

शहीद के पिता राजेंद्र सिंह ने बताया कि विधायक नदीम जावेद द्वारा अपनी निधि से प्रांतीय खंड में गेट बनने के लिए रुपए दिए थे। गेट का निर्माण 5 फीट की हो पाया था। तभी सपा के दबंग नेता इसे रोकने लगे। भाजपा सरकार में गेट का निर्माण किसी तरह शुरू हुआ, लेकिन राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से इस काम में अड़ंगा लग गया। राजेंद्र सिंह ने कहा कि इसी दौरान गलत तरीके से शहीद की पत्नी को ही वादी बनाकर मामले पर स्टे ले लिया गया।

18 सितंबर 2016 को उरी हमले में जौनपुर के राजेश सिंह भी शहीद हो गए थे।
18 सितंबर 2016 को उरी हमले में जौनपुर के राजेश सिंह भी शहीद हो गए थे।

PMO ने जांच के लिए लिखा था पत्र

शहीद के पिता ने जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार तक गुहार लगाई। प्रधानमंत्री कार्यालय को भी इस बाबत पत्र लिखा। इसी बीच 27 अगस्त 2021 को स्टे का मुकदमा खारिज हो गया। यह मुकदमा सिविल जज सीनियर डिवीजन ने सिरे से खारिज किया था। लेकिन शहीद की पत्नी द्वारा लिखे गए पत्र को प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान में ले लिया था। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा इसकी जांच के लिए जिला प्रशासन को पत्र भी लिखा गया है। असली खेल यहीं से शुरू हुआ।

जिला प्रशासन ने भेज दी गलत रिपोर्ट

29 सितम्बर 2021 को प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई जांच रिपोर्ट में एसडीएम सदर ने न्यायालय में स्थगन आदेश होने की वजह से शहीद स्मृति द्वार बनवाने से इंकार करने की बात कही। जबकि 27 अगस्त 2021 को यह मुकदमा सिरे से खारिज कर दिया गया था। इस बात की भनक शहीद के पिता को अक्टूबर के पहले सप्ताह में पता चली।

शहीद के पिता का आरोप है कि जिला प्रशासन ने गलत रिपोर्ट पीएमओ को भेजी। उनका कहना है जब यह स्टे का मुकदमा खारिज कर दिया गया था तो किस आधार पर जिला प्रशासन ने पीएमओ को गलत रिपोर्ट दी है।

राजेंद्र सिंह कहते हैं कि 3 साल से उन्होंने शहीद की प्रतिमा रखी हुई है, लेकिन प्रतिमा लगाने के लिए एक अदद जगह की तलाश नहीं हो पा रही है।
राजेंद्र सिंह कहते हैं कि 3 साल से उन्होंने शहीद की प्रतिमा रखी हुई है, लेकिन प्रतिमा लगाने के लिए एक अदद जगह की तलाश नहीं हो पा रही है।

निर्माण के लिए आया बजट वापस हो गया

जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल कप्तान बताते हैं कि उरी हमले में शहीद हुए राजेश सिंह की स्मृति में सिद्धीकपुर में द्वार बनना था। लेकिन गुलाबी देवी महाविद्यालय के प्रबंधक लाल चंद यादव ने गेट के निर्माण के दौरान तथ्य को छुपाकर शहीद की पत्नी जुली सिंह को प्रतिवादी बनाकर न्यायालय में वाद दायर कर दिया।

मामले में ना तो पीडब्ल्यूडी या राजस्व विभाग को पार्टी बनाया। जिसके चलते मामले की पैरवी नहीं हुई। जिस पर 27 अगस्त को सिविल जज सीनियर डिवीजन ने पूरा वाद ही खारिज कर दिया। इसके निर्माण के लिए आया हुआ बजट लौट चुका है। बताया कि जल्द ही बजट का नया प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा, जिससे गेट का निर्माण हो सके।

तीन साल से रखी है शहीद की प्रतिमा

राजेंद्र सिंह कहते हैं कि 3 साल से उन्होंने शहीद की प्रतिमा रखी हुई है, लेकिन प्रतिमा लगाने के लिए एक अदद जगह की तलाश नहीं हो पा रही है। दौड़-धूप कर किसी तरह से राज्यपाल के यहां से ऑर्डर आया। वे कहते हैं कि उस समय लोगों ने खूब वादे किए, लेकिन किसी के द्वारा कुछ किया नहीं गया। उनका बेटा तो देश के लिए मर गया। वह सिर्फ इतना चाहते हैं कि उसका नाम अमर रहे। इस वजह से वह बार-बार कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं कि किसी तरह से शहीद के नाम पर द्वार बन जाए।

मुख्य मार्ग पर सड़क के किनारे शहीद राजेश सिंह के नाम का एक बोर्ड लगा हुआ है, लेकिन इस बोर्ड पर भी फल वालों ने अतिक्रमण कर रखा है।
मुख्य मार्ग पर सड़क के किनारे शहीद राजेश सिंह के नाम का एक बोर्ड लगा हुआ है, लेकिन इस बोर्ड पर भी फल वालों ने अतिक्रमण कर रखा है।

शहीद के बोर्ड पर फल वालों ने किया है अतिक्रमण

मुख्य मार्ग पर सड़क के किनारे शहीद राजेश सिंह के नाम का एक बोर्ड लगा हुआ है, लेकिन इस बोर्ड पर भी फल वालों ने अतिक्रमण कर रखा है। लगभग 11.60 किलोमीटर का मार्ग शहीद राजेश सिंह के नाम पर है, लेकिन इस मार्ग की हालत दयनीय है। सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे हैं।

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