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उरी हमले को हुए 5 साल:जौनपुर में शहीद के मां-बाप को नहीं मिले 5 लाख रुपए, द्वार और स्तम्भ को तरस रहा परिवार, पिता बोले- सरकार ने सिर्फ घोषणा की

जौनपुरएक महीने पहले
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उरी हमले को हुए 5 साल। - Dainik Bhaskar
उरी हमले को हुए 5 साल।

18 सितंबर 2016 को हुए उरी हमले में भारतीय सेना के 19 जवान शहीद हो गए थे। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने उरी सेक्टर के कैंप पर सुबह हमला कर दिया था। इस हमले में जौनपुर के राजेश सिंह भी शहीद हो गए थे। बिहार रेजिमेंट के सिपाही शहीद राजेश सिंह जौनपुर के सरायख्वाजा थाना के भकुरा गांव के निवासी थे। उरी हमले के 5 साल बाद भी शहीद के पिता को सरकार की तरफ से की घोषणाओं को पूरा न करने का मलाल है। उनके पैतृक निवास पर आज श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया था।

सरकार ने नहीं ली कोई सुध

भकुरा गांव के निवासी शहीद राजेश सिंह के पिता राजेंद्र सिंह बताते हैं कि उनके बेटा तिरंगे में लिपट कर वापस आया था। उरी हमले की घटना उन्हें रेडियो से मिली, लेकिन उन्हें इस बात पर यकीन नहीं हुआ था कि उनका बेटा शहीद हो गया। टेलीविजन स्क्रीन पर खबर देखने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। वह कहते हैं कि उरी हमले को 5 साल हो गया है, लेकिन सरकार ने कोई सुध नहीं ली है।

श्रद्धांजलि सभा का किया गया आयोजन।
श्रद्धांजलि सभा का किया गया आयोजन।

पत्नी को मिले 20 लाख रुपये, माता-पिता को नहीं

उन्होंने कहा जिस समय सरकार ने घोषणा की थी, उस समय चुनाव का माहौल था। नेता आते थे और घोषणा करके चले जाते थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने जो भी घोषणा की, उसमें कुछ हुआ नहीं। पत्नी को मिलने वाले 20 लाख रुपये तो मिल गए, लेकिन माता-पिता के हिस्से के 5 लाख रुपये अभी तक नहीं मिले हैं। वह कहते हैं कि 70 साल की उम्र में वे लगातार डीएम से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अभी तक उनके हिस्से की धनराशि नहीं मिली है।

दबंग लोगों ने जाति के नाम पर नहीं बनने दिया शहीद का गेट

राजेंद्र सिंह बताते हैं कि इतना ही नहीं बल्कि शहीद के नाम पर बनने वाला गेट कुछ दबंगों ने नहीं बनने दिया। उनका आरोप है कि दबंग प्रवृत्ति के सपा नेता नहीं चाहते कि शहीद के नाम पर द्वार बने। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासनिक मिलीभगत से गलत रिपोर्ट लगा दी जाती है, जिसके चलते द्वार नहीं बनने दिया जाता है।

फल वालों ने किया अतिक्रमण।
फल वालों ने किया अतिक्रमण।

वह कहते हैं कि उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री कार्यालय के चक्कर लगाए हैं, लेकिन यहां का जिला प्रशासन मुख्यमंत्री कार्यालय को गलत रिपोर्ट सौंप देता है। उनका कहना है कि किसान का बेटा देश की सीमा पर शहीद हो गया, लेकिन एक शहीद द्वार बनवाने के लिए उन्हें इतनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। शहीद को भी लोग जाति के नाम पर बांट रहे हैं।

तीन साल से रखी है शहीद की प्रतिमा, नहीं मिल रही जमीन

वह कहते हैं कि 3 साल से उन्होंने शहीद की प्रतिमा रखी हुई है, लेकिन प्रतिमा लगाने के लिए एक अदद जगह की तलाश नहीं हो पा रही है। दौड़-धूप कर किसी तरह से राज्यपाल के यहां से ऑर्डर आया। वे कहते हैं कि उस समय लोगों ने खूब वादे किए, लेकिन किसी के द्वारा कुछ किया नहीं गया। उनका बेटा तो देश के लिए मर गया। वह सिर्फ इतना चाहते हैं कि उसका नाम अमर रहे। इस वजह से वह बार-बार कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं कि किसी तरह से शहीद के नाम पर द्वार बन जाए।

लेखपाल कहता है कि तुम ऐसे ही दौड़ते रहो, रिपोर्ट मुझे ही लगानी है

वह कहते हैं कि शहीद के नाम पर जनपद में राजनीति हो रही है। वह इस संदर्भ में मुख्यमंत्री से भी मिल चुके हैं। जिला प्रशासन लगातार गलत रिपोर्ट प्रस्तुत कर देता है। लेखपाल लगातार यह कहता है कि रिपोर्ट उसे ही लगानी है। वह चाहे जितनी भी दौड़-धूप कर लें। काम नहीं हो पाएगा। उनका आरोप है कि पैसा खाकर लोग गलत रिपोर्ट लगा रहे हैं और इस तरह का काम कर रहे हैं।

शहीद के गांव जाने वाली सड़क पर भरा पानी।
शहीद के गांव जाने वाली सड़क पर भरा पानी।

शहीद के घर तक कि खराब है सड़क

जौनपुर मुख्यालय से 17 किलोमीटर दूर शहीद का गांव सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के भकुरा गांव में है। सड़कों की हालत खराब हो चली है। गांव के गेट पर शहीद के नाम का एक द्वार बना है। उसके आगे सड़कों की हालत और भी दयनीय है। पिता की मांग है कि मुख्य सड़क पर शहीद का द्वार बन जाए। प्रशासन ने इसको लेकर तैयारियां शुरू भी की थीं, लेकिन निर्माण कार्य बीच में रोक दिया गया। पिता का आरोप है कि दबंग किस्म के सपा नेता नहीं चाहते हैं कि गेट का निर्माण हो।

जिला पंचायत अध्यक्ष कला रेड्डी ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
जिला पंचायत अध्यक्ष कला रेड्डी ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

शहीद के बोर्ड पर फल वालों ने किया है अतिक्रमण

मुख्य मार्ग पर सड़क के किनारे शहीद राजेश सिंह के नाम का एक बोर्ड लगा हुआ है, लेकिन इस बोर्ड पर भी फल वालों ने अतिक्रमण कर रखा है। लगभग 11.60 किलोमीटर का मार्ग शहीद राजेश सिंह के नाम पर है, लेकिन इस मार्ग की हालत दयनीय है। सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। आलम यह है कि पिछले कई वर्षों में शहीद के पिता ने जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है, लेकिन जिला प्रशासन ने इस पर कोई काम नहीं किया। जौनपुर जिला पंचायत अध्यक्ष कला रेड्डी ने इस संदर्भ में शहीद के पिता राजेंद्र सिंह को आश्वासन दिया है। आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा कि शहीद स्थल और शहीद पार्क का निर्माण जल्द कराया जाएगा।

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