जौनपुर पुलिस कब सुलझाएगी प्रधान की हत्या की गुत्थी:वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान दिनदहाड़े मारी गई थी गोली, 6 माह से हाथ पर हाथ धरे बैठी है पुलिस; 1 लाख का इनामी हैं आरोपी

एक महीने पहले
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निवर्तमान ग्राम प्रधान की हत्� - Dainik Bhaskar
निवर्तमान ग्राम प्रधान की हत्�

जौनपुर की पुलिस तेजी के साथ ऑपरेशन क्लीन के तहत अपराधियों की धरपकड़ में लगी हुई है। पिछले 82 दिनों में पुलिस और बदमाशों के बीच 12 बार मुठभेड़ हुई है। इस दौरान पुलिस ने तीन बदमाशों को ढेर भी कर दिया है, लेकिन एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसपी अजय साहनी की पुलिस 1 लाख के इनामी बदमाश सतीश, प्रिंस और कालेश्वर उर्फ फौजी को ढूढ़ने में नाकाम रही है।

इन तीनों ने दिनदहाड़े राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के कार्यक्रम से 500 मीटर दूर मुख्य सड़क पर बाइक को ओवरटेक कर निवर्तमान प्रधान की ताबड़तोड़ फायरिंग कर हत्या कर दी थी। पुलिस ने इन्हें 48 घंटे के भीतर पकड़ने का दावा किया था। 6 महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इस मामले में अब तक पुलिस के हाथ खाली हैं।

इधर राज्यपाल दे रहीं थी भाषण, उधर बदमाश बरसा रहे थे गोलियां

जौनपुर में 16 फरवरी को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के कार्यक्रम से 500 मीटर दूर दिनदहाड़े बदमाशों ने मखमेलपुर के निवर्तमान प्रधान की गोली मारकर हत्या कर दी थी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिरकत कर रही थीं तो वहीं चंद कदम दूर बाइक सवार बेखौफ बदमाशों ने दिनदहाड़े ताबड़तोड़ फायरिंग कर निवर्तमान प्रधान राजकुमार यादव को मौत के घाट उतार दिया।

1 लाख के इनामी हैं ये तीनों बदमाश।
1 लाख के इनामी हैं ये तीनों बदमाश।

सुरक्षा व्यवस्था का था अंदाजा फिर भी घटना को दिया अंजाम

बदमाशों ने जो गोलियां चलाईं वो सिर, पैर, सीने और पेट में लगी थीं। गोली लगते ही राजकुमार यादव की मौके पर ही मौत हो गयी थी। 16 फरवरी को वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान हुई इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। बदमाशों के पेशेवर होने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें राज्यपाल के कार्यक्रम के मद्देनजर सुरक्षा-व्यवस्था की पूरी जानकारी थी, लेकिन फिर भी उन्होंने वारदात को अंजाम दिया। नाराज ग्रामीणों ने शव को रास्ते में रखकर जौनपुर-शाहगंज मार्ग जाम कर दिया था।

पुलिस पर हुआ था पथराव, उल्टे पांव भागे थे एडीएम और पुलिस फोर्स

राज्यपाल की मौजूदगी के कारण पूरी पुलिस फोर्स 500 मीटर दूर पूर्वांचल यूनिवर्सिटी में मौजूद थी। पुलिस घटना की सूचना पर जब तक मौके पर पहुंचती तब तक हालात काबू से बाहर हो गए थे। आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस की गाड़ी को पलट दिया और पुलिस फोर्स पर पथराव करने लगे। आलम यह था कि एडीएम और पुलिस फोर्स उल्टे पांव जान बचाकर भागने को मजबूर हो गई। किसी तरह तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजकरन नैयर ने मोर्चा सम्भाला तब जाकर आक्रोशित भीड़ वार्ता करने को तैयार हुई।

आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस की गाड़ी पर किया था पथराव।
आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस की गाड़ी पर किया था पथराव।

पुलिस ने 48 घंटे की भीतर आरोपियों को पकड़ने का किया था दावा

इस मामले में निवर्तमान प्रधान राजकुमार यादव के परिजनों की तरफ से दी गई तहरीर में पुलिस ने प्रिंस, सतीश, कल्लू फौजी और उदास यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। प्रिंस सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के मनिया गांव का निवासी है तो वही सतीश सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के नेवादा का रहने वाला है। फौजी उर्फ कल्लू आजमगढ़ के मेहनगर का निवासी है। पुलिस ने इन सब पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। उबास यादव ने इस मामले में सीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। घटना के 22 दिन बाद उबास यादव पुलिस को चकमा देकर कोर्ट में हाजिर हो गया।

सपा नेता को भी उतारा था मौत के घाट

यह कोई पहला मामला नहीं है, जिसमें पुलिस को इन सब आरोपियों की तलाश है। इससे पूर्व 31 मई 2019 को सभी बदमाशों ने सपा नेता लालजी यादव की गोली मारकर हत्या कर दी थी। तीन बाइक पर सवार छह नकाबपोश बदमाशों ने सपा नेता पर 10 राउंड से अधिक फायरिंग कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। दिनदहाड़े हुई इस वारदात से आसपास हड़कंप मच गया था। घटना को अंजाम देने के बाद बदमाश बाइक से फरार हो गए। पुलिस ने इस मामले में प्रिंस और सतीश का नाम सामने आया था।

आखिर क्यों गिरफ्तार नहीं कर पा रही पुलिस

सपा नेता लालजी यादव और मखमेलपुर के निवर्तमान प्रधान राजकुमार यादव की हत्या में सभी अपराधियों का नाम सामने आया। 16 फरवरी की घटना के बाद पुलिस ने सभी बदमाशों को 48 घंटे के भीतर पकड़ने का दावा किया था। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजकरण नैयर ने सर्विलांस टीम के साथ सात अन्य पुलिस टीम का गठन किया था, लेकिन इस मामले में 6 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पुलिस अधीक्षक अजय साहनी भले ही अपराधियों के सफाई में जुटे हैं, लेकिन एक लाख के इनामी बदमाश अभी भी पुलिस महकमे का सरदर्द बने हुए हैं। एक तरफ मृतक के परिजन न्याय की आस लगाए बैठे हैं तो वहीं दूसरी तरफ जौनपुर पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है। दुस्साहस एक वारदात को अंजाम देने वाले इनामी बदमाश अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

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