50 एमएलडी से अधिक सीवेज, 100 करोड़ रुपये का जुर्माना:NGT ने प्रदूषण पर उचित प्रबंध न करने पर जौनपुर कर लगाया जुर्माना

जौनपुर3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
50 एमएलडी से अधिक की सीमा तक अनुपचारित सीवेज नालियों में छोड़ा जा रहा है जिसका मुआवजा कम से कम 100 करोड़ रुपए है। - Dainik Bhaskar
50 एमएलडी से अधिक की सीमा तक अनुपचारित सीवेज नालियों में छोड़ा जा रहा है जिसका मुआवजा कम से कम 100 करोड़ रुपए है।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर जौनपुर पर 100 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन एवं औद्योगिक इकाइयों के प्रदूषित पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं करने के लिए दोषी ठहराया गया है। प्रतापगढ़, रायबरेली और गोरखपुर में भी कचरा प्रबंधन ना होने पर 120 करोड़ रुपए जमा करने का आदेश है। एनजीटी की तरफ से उत्तर प्रदेश सरकार पर 220 करोड रुपए हर्जाना जमा करने का निर्देश दिया गया है।

50 एमएलडी से अधिक सीवेज

प्रदूषण को लेकर दाखिल एक याचिका की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि फंडिंग के लिए तय समय सीमा समाप्त होने की वजह से आवश्यक कदम नहीं उठाए जा सके। जौनपुर में प्रदूषण के लिए अधिकारी 50 प्रतिशत की सीमा तक प्रदूषण भार में कमी का दावा कर रहे हैं। लेकिन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट इससे अलग है। रिपोर्ट के अनुसार 50 एमएलडी से अधिक की सीमा तक अनुपचारित सीवेज नालियों में छोड़ा जा रहा है जिसका मुआवजा कम से कम 100 करोड़ रुपए है।

याचिका पर हो रही थी सुनवाई

गोरखपुर की रामगढ़ झील और आमी, राप्ती और रोहणी नदियों में प्रदूषण को लेकर दाखिल एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने एक अन्य आदेश में उत्तर प्रदेश राज्य सरकार को 120 करोड़ रुपए की राशि जमा करने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा कि हम गोरखपुर में नदियों में 55 एमएलडी सीवेज के निर्वहन के लिए 110 करोड़ की देनदारी सरकार पर निर्धारित करते हैं। इसके अलावा ठोस कचरे के प्रबंधन में विफलता पर 10 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है।

3 हज़ार करोड़ रुपये का जुर्माना

एनजीटी द्वारा यूपी सरकार के अलावा राजस्थान पर भी जुर्माना लगाया गया है। एनजीटी ने राजस्थान पर 3 हज़ार करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। एनजीटी ने कहा है कि कई जिलों से निकलने वाला सीमेंट और अन्य फैक्ट्रियों का पानी नदियों में जा रहा है। इसको रोकने के लिए भी उचित प्रबंध नहीं किया गया है। एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि उल्लंघन जारी रहता है तो अतिरिक्त मुआवजा वसूलने पर विचार किया जा सकता है।