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पुष्पक एक्सप्रेस में बच्चे की मौत:ट्रेन से लखनऊ आ रहा था परिवार, 181 किमी तक नहीं मिला इलाज, झांसी आते-आते बच्चे ने दम तोड़ दिया

झांसी2 महीने पहले
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इसी ट्रेन में बच्चा अपने परिवार के साथ सफर में था। शव का झांसी में पोस्टमार्टम हुआ है। मृतक में डायरिया के संकेत मिले हैं। - Dainik Bhaskar
इसी ट्रेन में बच्चा अपने परिवार के साथ सफर में था। शव का झांसी में पोस्टमार्टम हुआ है। मृतक में डायरिया के संकेत मिले हैं।

मुंबई से लखनऊ आने वाली पुष्पक ट्रेन में परिवार संग सफर कर रहे बच्चे की मौत हो गई। शिकायत के बाद करीब 181 किमी तक बच्चे को इलाज तक नसीब नहीं हो सका। झांसी स्टेशन पहुंचने के बाद रेलवे के डॉक्टर व जीआरपी स्टाफ ट्रेन के कोच में पहुंचा तब तक बच्चे ने दम तोड़ दिया था। शव को स्टेशन पर उतार पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम में डायरिया के संकेत मिले हैं। पोस्टमार्टम के बाद परिजन को शव सौंप दिया गया। परिजन एम्बुलेंस कर बच्चे के शव को अपने गृह जनपद ले गए।

लखनऊ आ रहा था परिवार
परिवार सीतापुर के ग्राम अमर नगर समौदी का रहने वाला है। पिता संजय ने बताया कि वह अपने परिवार संग पुष्पक ट्रेन (02534) के एस-2 कोच में सीट नंबर 51 में बैठ लखनऊ आ रहे थे। बीना स्टेशन के पास बेटे प्रदीप (9) की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उल्टी-दस्त होने से बच्चे की हालत बिगड़ती देख उन्होंने अन्य यात्रियों की मदद से रेलवे हेल्पलाइन नंबर पर सूचित कर सहायता मांगी। लेकिन, 181 किमी का सफर करने के बाद ट्रेन सोमवार रात 1:25 बजे झांसी स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर पांच पर पहुंची। इसके बाद सहायक उपनिरीक्षक संजय प्रताप संग रेलवे डॉक्टर व जीआरपी स्टाफ कोच में चढ़े। सीट के पास पहुंचकर रेलवे के डॉक्टर ने बच्चे की जांच कर उसको मृत घोषित कर दिया।

झांसी में हुआ पोस्टमार्टम
कोच में चढ़े रेलवे स्टाफ ने बच्चे संग परिवार को स्टेशन पर उतार लिया, फिर जीआरपी उनको प्लेटफार्म पर स्थित थाने ले गई। जहां पंचनामा भर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। डॉक्टरों ने बताया कि पोस्टमार्टम में उल्टी-दस्त के संकते मिले है। उन्होंने गर्मी से तबीयत खराब होने की आशंका जताई।

मां-बाप समझ रहे थे बच्चे को बेहोश
तबीयत बिगड़ने के बाद बच्चा बेसुध हो गया। मां-बाप को लगा प्रदीप बेहोश है। थोड़ी देर में होश में आ जाएगा। लेकिन झांसी पहुंचने के बाद डॉक्टर ने प्रदीप को मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मौत की सूचना पाकर मां-बाप को जब हकीकत पता चली, तो वह सदमे में चले गए।

पानी के लिए करनी पड़ी मशक्कत
ट्रेन में सफर करने के दौरान पीड़ित परिवार को पीने के पानी के लिए भी मशक्कत करनी पड़ी। बच्चे की तबीयत बिगड़ने के बाद परिवार ने दूसरे यात्रियों से पानी मांगा। कोविड के चलते ट्रेनों में वेंडर नहीं आ रहे है। इसलिए पानी खत्म होने के बाद परिवार को पानी नहीं मिल सका। बाद में आसपास बैठे यात्रियों से मांग काम चलाया।

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