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घोड़ी चढ़ने की मांगी इजाजत:महोबा में दलित दूल्हे ने घोड़ी पर चढ़कर धूमधाम से बारात निकालने की ठानी जिद, गांव में सोच की बेड़ी में बंधे हैं दलित, 74 साल से अरमान अधूरे

महोबा23 दिन पहले
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बिना घोड़ी चढ़े बारात नहीं निकालने की ठानी। - Dainik Bhaskar
बिना घोड़ी चढ़े बारात नहीं निकालने की ठानी।

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामना आया है, जो वर्तमान समय में भी पुरानी ऊंचनीच की सोच को उजागर करता है। इसी परंपरा को तोड़ने के लिए एक दलित युवक ने आवाज उठाई है। उसने गांव की एक रुढ़िवादी पंरपरा को तोड़ने के लिए पुलिस-प्रशासन से इजाजत मांगी है कि उसे घोड़ी चढ़ने की अनुमति दी जाए, ताकि वह धूमधाम से बारात निकाल सके।

महोबकंठ थाने का एक गांव है माधवगंज। 2000 की आबादी वाले इस गांव में आजादी के 74 सालों बाद भी आजतक किसी दलित दूल्हे की बारात घोड़ी में सवार हो कर नही निकल सकी है। यहां ऊंची जाति के लोग दलितों को घोड़ी चढ़ने की इजाजत नहीं देते हैं। 22 वर्षीय अलखराम की शादी 18 जून को है। अलखराम ने सोशल मीडिया पर अरमान जाहिए किए हैं कि वह घोड़ी चढ़ने चाहते हैं, पर गांव के बाकी लोगों की तरह ही कहीं उनके भी अरमान अधूरे न रह जाएं। उन्होंने कहा है कि उनकी मदद की जाए।

बरसों से हैं सोच की बंदिशों में
माधवगंज गांव के हिर्देश बतात हैं कि उनकी शादी भी इसी 19 मई को हुई है, पर इनको भी बिना घोड़ी में चढ़े अपनी बरात को ले जाना पड़ा था, तो वहीं दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करने वाले प्रमोद की शादी भी 30 नवंबर को हुई थी। इन्होंने भी बिना घोड़ी पर बैठे ही शादी की थी।

शादी कराने के लिए आए आगे
अलखराम की पोस्ट को देखते हुए भीम सेना ने अपनी दम पर अलखराम की बारात घोड़ी में चढ़वा कर निकलवाने की तैयारी शुरू कर दी है । वहीं, पुलिस प्रशासन की ओर से भी आश्वासन दिया गया है, कि किसी तरह की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।

नहीं होने दिया जाएगा भेदभाव
युवक की ओर से थाने में दिए पत्र के बाद पुलिस की ओर से भी मामले को संज्ञान लिया गया है। पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा। महोबकंठ थाना पुलिस को शांति व्यवस्था कायम रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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