झांसी .. ट्रेन में पकड़ा संदिग्ध यात्री:कुशीनगर एक्सप्रेस में फर्जी लोको पायलट पकड़ा ; कई वर्षों से लोको पायलट बनकर बिना टिकट करता था यात्रा, किया आरपीएफ के हवाले

झांसी4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
डिप्टी सीटीआई सीटीआई शशांक सिंह को बी-3 कोच में  यात्रा करते हुए पकड़ा संदिग्ध लोगो पायलट को - Dainik Bhaskar
डिप्टी सीटीआई सीटीआई शशांक सिंह को बी-3 कोच में यात्रा करते हुए पकड़ा संदिग्ध लोगो पायलट को

झाँसी। कई सालों से फर्जी लोको पायलट बनकर ट्रेनों में सफर कर रहे एक व्यक्ति को टीटीई स्टाफ ने पकड़ लिया। पूछताछ के बाद उसे उरई आरपीएफ के हवाले कर दिया। इस मामले की सूचना टीटीई स्टाफ ने अपने अफसरों को दी है।

गाड़ी संख्या 02525 कुशीनगर एक्सप्रेस झाँसी से चलकर कानपुर की ओर जा रही थी। इस ट्रेन में डिप्टी सीटीआई शशांक सिंह व अन्य टीटीई ड्यूटी पर मौजूद थे। डिप्टी सीटीआई शशांक सिंह बी लिंक कंडक्टर कोच बी-3,बी-4,बी-5,बी-6 में कार्यरत था। जैसे ही झाँसी से रवाना हुई तो डिप्टी सीटीआई सीटीआई शशांक सिंह बी-3 कोच में चेक करना शुरु कर दिया। तभी उनकी नजर एक व्यक्ति पर गई। वह व्यक्ति पूरी तरह से अपने आप को लोको पायलट की ड्रेस पहने व रेलवे का पट्टा गले में डाले हुए संदिग्ध लगने लगा। वह व्यक्ति सीट नंबर 57 पर बैठा हुआ था। जब डिप्टी सीटीआई ने सीट क्रमांक 57 पर बैठे व्यक्ति से टिकट व पहचान पत्र दिखाने के लिए कहा तो उसने उन्हें गुमराह करते हुए कहा कि मेरा ड्यूटी बॉक्स गार्ड साहब के डिब्बे में रखा है, उसी में ही मेरी ट्रैवल अथॉरिटी व आईडी रखा हुआ है और वह भोपाल से कानपुर स्पेयर जा रहा है। यह कहते हुए उक्त व्यक्ति ने डिप्टी सीटीआई पर दबाव बनाने की कोशिश करने लगा, तभी डिप्टी सीटीआई ने अपनी टीम के सदस्य टीटीई बी.डी गुप्ता व टीटीई प्रमोद वर्मा को सूचित करके कोच में बुलवाया और कड़ाई से पूछताछ करना शुरू की। जैसे ही उक्त व्यक्ति से गार्ड के पास चलने को कहा तो उसने अपनी सच्चाई बयान कर दी।

टीटीई साहब, मैं फर्जी लोको पायलट हूं

पूछताछ के दौरान उस व्यक्ति ने बताया कि टीटीई साहब मैं पिछले कई वर्षों से इसी तरह फर्जी लोको पायलट बनकर चल रहा हूं, मेरा नाम इमरान खान पुत्र नसीम खान (50) निवासी थाना किला जामा मस्जिद, मोती महल फाटक बरेली (यूपी) है। बाद में उक्त व्यक्ति को उरई आरपीएफ के हवाले कर दिया।

क्या वाकई फर्जी लोको पायलट है या और कोई, इसकी जांच होना जरूरी हैं।

झाँसी रेल मंडल संवेदनशील स्थानों में जाना जाता है। सालों से फर्जी तरीके से सफर कर रहे व्यक्ति ने ट्रेन की सूचनाएं देश के बाहर तो नहीं भेजी हैं। ऐसे व्यक्ति के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल आदि बिंदुओं की जांच होना जरूरी है। मालूम हो कि पुखरायां के पास इंदौर-पटना एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसमें आईएसआई का नाम प्रकाश में आ रहा था मगर जांच में आईएसआई के तथ्य सामने नहीं आए थे। ऐसे व्यक्ति की खुफिया जांच होना जरुरी हैं।

खबरें और भी हैं...