फैक्‍ट्री में मजदूरी से रणजी के फाइनल तक:कार्तिकेय सुबह क्रिकेट की प्रैक्टिस करते, शाम को मजदूरी; 32 विकेट लेकर बनाया MP को चैंपियन

झांसी3 महीने पहलेलेखक: सचिन सिंह

मध्य प्रदेश को पहली बार रणजी चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले कुमार कार्तिकेय यूपी के रहने वाले हैं। वे लेफ्ट आर्म्स स्पिन गेंदबाज हैं और छह मैच में 32 विकेट लेकर अपनी टीम के सबसे सफल गेंदबाज रहे हैं। खास बात यह है कि IPL-15 में मुंबई के लिए खेले और रणजी के फाइनल में मुंबई के खिलाफ पांच विकेट लेकर अपनी टीम को उन्होंने ऐतिहासिक जीत दिलाई।

कुमार कार्तिकेय के पिता श्याम नाथ सिंह यूपी पुलिस में हेड कांस्टेबल हैं। वह फिलहाल झांसी में पोस्टेड हैं। मां सुनीता और छोटा भाई कुमार विनायक सिंह कानपुर में रहते हैं। उनका अब तक का सफर संघर्ष भरा रहा है। एक समय क्रिकेट के लिए उन्होंने स्कूल छोड़ दिया। खर्चा पूरा नहीं हुआ, तो फैक्ट्री में मजदूरी भी की। पढ़िए कुमार कार्तिकेय के संघर्ष की कहानी…

स्कूल छोड़ क्रिकेट खेलने पहुंचे

रणजी ट्रॉफी में विकेट लेने पर बधाई देते साथी खिलाड़ी।
रणजी ट्रॉफी में विकेट लेने पर बधाई देते साथी खिलाड़ी।

पिता बताते हैं कि 2009 में वह सीतापुर में 11वीं बटालियन पीएससी में तैनात थे। तब कुमार कार्तिकेय और छोटा बेटा विनायक क्रिकेट टूर्नामेंट खेलने गए। वहां अच्छा प्रदर्शन करने पर डीएम ने विनायक को इनाम दिया। क्रिकेट की तरफ रुझान बढ़ता गया। एक दिन मैंने उनसे पूछा, "पढ़ना है या खेलना है।" दोनों ने एक साथ जबाब दिया, "खेलना है।" तब वे 7वीं में पढ़ते थे।

दोनों ने स्कूल छोड़ दिया और स्वदेश क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन कर ली। यूपी पुलिस क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों ने कुमार कार्तिकेय को खेलते हुए देखा, तो अच्छी जगह डालने के लिए कहा। तब मेरे दोस्त उपेंद्र यादव 2011 में कुमार कार्तिकेय को अपने साथ कानपुर ले गए। वहां कमला क्लब और पीएससी नर्सरी में कुमार कार्तिकेय प्रैक्टिस करने लगा। फिर छोटा बेटा भी कानपुर चला गया।

कुमार कार्तिकेय की एक गेंद देखते ही दिया दाखिला

कुमार कार्तिकेय कुछ समय पहले आईपीएल में मुंबई इंडियन टीम में भी शामिल थे।
कुमार कार्तिकेय कुछ समय पहले आईपीएल में मुंबई इंडियन टीम में भी शामिल थे।

दोनों बेटों के कानपुर जाने के बाद मां उनको याद करते हुए रोती थीं। तब श्याम नाथ सिंह एडीजी के पास पेश हुए और उनको समस्या बताई। एडीजी ने श्याम नाथ सिंह का कानुपर ट्रांसफर कर दिया। कानपुर में यूपी पुलिस टीम के कोच रोहन कंधाई ने कुमार कार्तिकेय का खेल देखा, तो दिल्ली भेजने के लिए कहा। लेकिन पिता असमर्थ थे।

रोहन 2014 में कुमार कार्तिकेय को दिल्ली की एलबी शास्त्री एकेडमी में ले गए। तब वह 16 साल का था। एकेडमी कोच एसएन भारद्वाज ने ट्रायल लेने के बाद दाखिला देने के लिए कहा। कुमार कार्तिकेय ट्रायल देने गया। उसने पहली गेंद फेंकी, तो कोच फिदा हो गए और बोले कि इसे यहीं छोड़ दो।

पैसे कम पड़े, तो फैक्ट्री में मजदूरी की

पहली बार मध्यप्रदेश की टीम ने रणजी ट्रॉफी जीती।
पहली बार मध्यप्रदेश की टीम ने रणजी ट्रॉफी जीती।

कुमार कार्तिकेय ने नोएडा में कमरा ले लिया और रोजाना प्रैक्टिस को जाने लगा। दैनिक भास्कर से बातचीत में कुमार कार्तिकेय ने बताया कि दिल्ली जैसे शहर में खर्चा पूरा नहीं हो रहा था। तब एक फैक्ट्री में नाइट जॉब करते हुए मजदूरी की। इसके बारे में घर पर नहीं बताया। दिन में 5 से 6 घंटे प्रैक्टिस करता था और रात में जॉब। कुछ समय बाद 2016 में कोच भारद्वाज ने अपने पास रख लिया और फिर वो ही पूरा खर्चा उठाते थे।

2018 में पहली बार एमपी टीम में चयन
अपनी गेंदबाजी की दम पर 2018 में पहली बार कुमार कार्तिकेय को एमपी टीम में जगह मिली। रणजी में एक-दो मैच खेलने को मिले। इसके बाद लगातार वह रणजी खेलते रहे। IPL-15 में उनको खरीदा नहीं गया। मुंबई लगातार हार रही थी, तभी अरशद खान चोटिल हो गए। उनकी जगह कुमार कार्तिकेय को टीम में जगह मिली। पहले ही मैच में किफायती गेंदबाजी की और टीम को पहली जीत दिलाई। आईपीएल के 4 मैच में 5 विकेट लिए।

सचिन तेंदुलकर के टिप्स से गेंदबाजी में आया निखार
कुमार कार्तिकेय कहते हैं कि आईपीएल के दौरान मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने उनको गेंदबाजी के कुछ टिप्स बताए। उन टिप्स से गेंदबाजी में निखार आया। IPL के बाद वह एमपी से रणजी खेलने पहुंचे, जहां वह बल्लेबाजों पर कहर बनकर टूटे। 6 मैच में 32 विकेट लिए। इसमें बंगाल से हुए सेमीफाइनल में 8 विकेट लिए और फाइनल में 5 विकेट लेकर मुंबई की कमर तोड़ दी। रणजी ट्रॉफी में सबसे ज्यादा मुंबई के सैम्स मुलानी ने विकेट लिए, जबकि दूसरे नंबर पर कार्तिकेय हैं। अब उनका सपना इंडिया टीम में खेलना का है।