झांसी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज परेशान:ओपीडी बंद रही, मरीजों को लेकर भटकते रहे परिजन

झांसीएक वर्ष पहले
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बेटा बुजुर्ग पिता को मेडिकल कॉलेज लाया। लेकिन हड़ताल की वजह से दो घंटे तक इलाज नहीं मिला। तब वह टैंपो से पिता को ले गया। - Dainik Bhaskar
बेटा बुजुर्ग पिता को मेडिकल कॉलेज लाया। लेकिन हड़ताल की वजह से दो घंटे तक इलाज नहीं मिला। तब वह टैंपो से पिता को ले गया।

झांसी के महरानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में सोमवार को जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से मरीजों की जान हलक में आ गई। अपनी मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टर पर्ची काउंटर के बाहर धरने पर बैठ गए और ओपीडी बंद करा दी। मरीजों की ओपीडी पर्ची नहीं बनी। इससे दूर इलाकों से इलाज कराने पहुंचे परिजन मरीजों को लेकर भटकते रहे। पुराने मरीजों ने अपने पुराने पर्चे पर आगे की दवा ले ली। जबकि नए मरीज हड़ताल खत्म होने का इंतजार करते रहे। बाद में वे भी घर चले गए या फिर निजी अस्पतालों में जाकर इलाज कराया। शनिवार से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल आगे भी जारी रहेगी।

अपनी मांगों को लेकर मेडिकल कॉलेज में पर्ची काउंटर के बाहर धरने पर बैठे जूनियर डॉक्टर।
अपनी मांगों को लेकर मेडिकल कॉलेज में पर्ची काउंटर के बाहर धरने पर बैठे जूनियर डॉक्टर।

काउंसिलिंग नहीं होने से की हड़ताल
रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के उप प्रधान डॉ. हिमांशु शर्मा ने बताया कि हर साल नीट की परीक्षा 5 जनवरी तक हो जाती है। इस साल कोरोना की वहज से सितंबर में परीक्षा हुई। नवंबर तक एडमिशन होकर फस्ट ईयर का बैच शुरू हो जाना चाहिए था। लेकिन आरक्षण पॉलिसी में बलदाव करने की वजह से केस सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। काउंसिलिंग नहीं कराई जा रही है।
जिससे फस्ट ईयर का बैच शुरू नहीं होने के कारण काम का दबाव जूनियर डॉक्टरों पर पड़ रहा है। इससे डॉक्टर शारीरिक व मानसिक तनाव में हैं। इसको लेकर हड़ताल कर रहे हैं। अभी सिर्फ ओपीडी बंद की है। इंडोर, इमरजेंसी सेवा चालू हैं। अगर मांग नहीं मानी गई तो प्रदर्शन उग्र किया जाएगा।
परेशान मरीजों की जुबानी... कोई 100 तो कोई 150 किलोमीटर दूर से इलाज कराने पहुंचा

जालोन से पति व छोटी बेटी के साथ अपना मेडिकल कॉलेज पहुंची मालती को नहीं मिला इलाज।
जालोन से पति व छोटी बेटी के साथ अपना मेडिकल कॉलेज पहुंची मालती को नहीं मिला इलाज।

1 घंटे से परेशान हो रही हूं- मालती
पर्ची काउंटर के सामने बैठी मालती पत्नी विजय ने बताया कि वह जालौन के छिरिया गांव से इलाज कराने आई थी। टाइराइड की प्रोब्लम ज्यादा है। खाना तक नहीं खा पा रही हूं। 6 माह से इलाज चल रहा है। अब झांसी मेडिकल कॉलेज दिखाने आए तो डॉक्टर हड़ताल पर हैं। एक घंटे से बैठी हूं, लेकिन ओपीडी पर्ची नहीं कट रही है।
90 किमी. दूर से आए, इलाज नहीं मिला
भिंड के दबोह गांव निवासी उत्तम ने बताया कि पत्नी रोशन 5 माह की गर्भवती है। कुछ समय से उसको प्रोब्लम हो रही है, इसलिए मेडिकल कॉलेज में दिखाने के लिए आए थे। यहां डॉक्टर हड़ताल पर बैठे हैं और ओपीडी पर्ची नहीं कट रही है। करीब 90 किलोमीर दूर से आए हैं। दो घंटे से परेशान हैं।
पिता को कंधों पर लादकर दो घंटे तक भटका बेटा
खनियाधाना निवासी मुकेश प्रजापति ने बताया कि बुजुर्ग पिता भागीरथ प्रजापति कुछ समय से खाना नहीं खा रहे हैं। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। इसलिए मेडिकल कॉलेज लेकर आए थे। दो घंटे से पर्ची नहीं बन रही है। पिता को कंधों पर लादकर घूम रहे हैं। इमरजेंसी में इलाज नहीं मिला तो मजबूरन निजी अस्पताल ले जाना पड़ेगा।