झांसी मंडलायुक्त न्यायालय ने संस्कृत में लिखे जजमेंट:1911 में बनी थी कमिश्नरी, 110 साल में ऐसा जजमेंट पहली बार

9 दिन पहले
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मंडलायुक्त डॉ. अजय शंकर पाण्डेय ने शुक्रवार को संस्कृत भाषा में दो जजमेंट पारित किए। - Dainik Bhaskar
मंडलायुक्त डॉ. अजय शंकर पाण्डेय ने शुक्रवार को संस्कृत भाषा में दो जजमेंट पारित किए।

झांसी मंडलायुक्त डॉ. अजय शंकर पाण्डेय शुक्रवार को संस्कृत भाषा में 2 जजमेंट पारित करने के बाद से चर्चा में हैं। क्योंकि झांसी कमिश्नरी 1911 में बनी थी। ब्रिटिश काल से लेकर अब तक के 110 साल में फारसी, उर्दू, अंग्रेजी, हिंदी में तमाम फैसले लिखे गए, लेकिन राजस्व न्यायालय के इतिहास में संस्कृत भाषा में पहली बार जजमेंट हुए हैं।

उत्तर प्रदेश में सरकारी कामकाज और न्यायालयों की भाषा हिन्दी के रूप में मान्य है, लेकिन मंडलायुक्त ने भारत की सभी भाषाओं की जननी संस्कृत भाषा में निर्णय पारित करके इतिहास रचा है।
मंडलायुक्त संस्कृत में ग्रेजुएट, खुद लिखे जजमेंट

झांसी मंडल आयुक्त डॉ. अजय शंकर पाण्डेय।
झांसी मंडल आयुक्त डॉ. अजय शंकर पाण्डेय।

मंडलायुक्त डॉ. अजय शंकर पाण्डेय संस्कृत से ग्रेजुएट हैं। संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह जजमेंट लिखे गए। चूंकि संस्कृत में संबंधित अधिकारी जजमेंट नहीं लिख सकते थे, ताे मंडलायुक्त ने खुद ही जजमेंट लिखे। एक मामला आर्म्स एक्ट तो दूसरा राजस्व से संबंधित था। संस्कृत में फैसले की सब तारीफ कर रहे हैं।
साथ में हिंदी में भी लिखे गए जजमेंट

1911 से झांसी कमिश्नरी चल रही है।
1911 से झांसी कमिश्नरी चल रही है।

मंडलायुक्त के पेशकार प्रमोद तिवारी ने बताया कि उपरोक्त दोनों निणर्य संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं। चूंकि संस्कृत भाषा सभी की समझ में नहीं आएगी। इसलिए मंडलायुक्त डॉ. पाण्डेय के आदेश पर दोनों जजमेंट का अनुवाद हिन्दी में कराकर पत्रावली पर रखा जाएगा। संस्कृत भाषा में पारित निणर्य का हिन्दी में किया गया अनुवाद पत्रावली में अनुरक्षित रखा जायगा, जो आदेश का अंग रहेगा।
1911 से चल रही है झांसी कमिश्नरी

पुराना रिकॉर्ड खंगालते हुए। लेकिन संस्कृत में कोई निर्णय पहले कभी नहीं लिखा गया।
पुराना रिकॉर्ड खंगालते हुए। लेकिन संस्कृत में कोई निर्णय पहले कभी नहीं लिखा गया।

प्रशासनिक अधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने बताया कि 1911 से झांसी कमिश्नरी चल रही है। वर्तमान में मंडलायुक्त के न्यायालय में शस्त्र लाईसेंस सहित तमाम धाराओं के तहत मुकदमों की सुनवाई की जाती है। झांसी मंडल का इतिहास बहुत पुराना है, इसलिए हिंदी के अलावा ब्रिटिश काल से अब तक उर्दू, फारसी, अंग्रेजी व हिंदी भाषा में निर्णय पारित होने के साक्ष्य मिले हैं, लेकिन संस्कृत भाषा में पहली बार निर्णय पारित हुए हैं।
वकीलों ने निर्णयों की सराहना
एडवोकेट संतोष सिंह चैहान ने कहा कि पीठासीन अधिकारी द्वारा संस्कृत भाषा में निणर्य पारित किया गया, वह अपने आप में दुलर्भ है। एडवोकेट राजीव नायक ने कहा कि कमिश्नरी के इतिहास में आयुक्त ने संस्कृत भाषा में पारित किए निर्णय समाज में यह संदेश देंगे कि सभी भाषाओं की जननी संस्कृत भाषा है। संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए आयुक्त की पहल सराहनीय है।
ये दो निर्णय सुनाए गए
30 दिसंबर 2021 को मंडलायुक्त के न्यायालय में वाद संख्या-1296/ 2021 छक्कीलाल बनाम राजाराम आदि धारा-207 अधिनियम, उप्र राजस्व संहिता-2006 में दर्ज हुआ। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद उभयपक्षों को साक्ष्य व सुनवाई का समुचित अवसर देते हुए संस्कृत भाषा मे दो पृष्ठ का निणर्य पारित किया गया।

वहीं, 18 दिसंबर 2021 को शस्त्र लाईसेंस से संबंधित वाद संख्या-1266/ 2021 रहीश प्रसाद यादव बनाम राज्य सरकार उप्र के तहत धारा-18 भारतीय शस्त्र अधिनियम 1959 में दर्ज हुआ था। इस का भी जजमेंट संस्कृत में लिखा गया।

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