ऐसा निर्णय देश में पहली बार:झांसी कमिश्नरी कोर्ट के हर फैसले व अपील में लिखी जाएंगी संस्कृत की दो पंक्तियां

झांसी7 दिन पहले
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पुराना रिकॉर्ड खंगालते हुए। लेकिन संस्कृत में कोई निर्णय पहले कभी नहीं लिखा गया। - Dainik Bhaskar
पुराना रिकॉर्ड खंगालते हुए। लेकिन संस्कृत में कोई निर्णय पहले कभी नहीं लिखा गया।

झांसी कमिश्नरी कोर्ट में पिछले दिनों संस्कृत भाषा में दो निर्णय पारित कर चर्चा में आए मंडलायुक्त डॉ. अजय शंकर पांडेय। उन्होंने गुरुवार को संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब हर अपील व फैसले में संस्कृत भाषा में दो से तीन पंक्तियां लिखी जाएंगी।

यह निर्णय मंडलायुक्त ने कमिश्नरी बार के साथ समन्वय स्थापित करके हुए उनकी सहमति के बाद लिया है। देश में यह पहली बार होगा जब किसी कमिश्नरी कोर्ट के हर अपील व फैसले में संस्कृत लिखी जाएगी।

संस्कृत के साथ हिन्दी अनुवाद भी होगा
नए आदेश के मुताबिक, कमिश्नरी न्यायालय में किसी भी धारा में अगर अपील या रिवीजन दायर होगी, तो उसके ड्राफ्ट में 2-3 पंक्तियां संस्कृत भाषा में लिखी जाएंगी। साथ ही जो पंक्तियां संस्कृत भाषा में लिखी जाएंगी, उसका हिन्दी अनुवाद भी साथ में लिखा जाएगा। मंडलायुक्त सहित अपर आयुक्त गढ़ भी अपने निर्णय में कम-से-कम दो-तीन पंक्तियां संस्कृत भाषा में अवश्य लिखेंगे। साथ ही उनका हिन्दी अनुवाद भी अंकित रहेगा।

झांसी मंडल आयुक्त डॉ. अजय शंकर पाण्डेय।
झांसी मंडल आयुक्त डॉ. अजय शंकर पाण्डेय।

बाध्य नहीं, स्वेच्छा से लिखे संस्कृत
मंडलायुक्त ने कहा कि संस्कृत लिखने के लिए कोई भी बाध्य नहीं है, लेकिन स्वैच्छिक आधार पर देववाणी प्रोत्साहन के रूप में स्वैच्छिक रूप से प्रयोग में लाया जा सकता है। वहीं, वकीलों ने कहा कि अभी संस्कृत भाषा के लिखने व समझने का अभ्यास नहीं है।

ऐसे में संस्कृत में लिखने में समय लग सकता है और कठिनाई आ सकती है। इस पर मंडलायुक्त ने समाधान के लिए मंडलायुक्त परिसर में ‘‘देववाणी मार्गदर्शक‘‘ (संस्कृत भाषा को लिखने एवं समझाने वाला व्यक्ति) को तैनात करने की बात कही है।

मंडलायुक्त डॉ. अजय शंकर पाण्डेय ने शुक्रवार को संस्कृत भाषा में दो जजमेंट पारित किए।
मंडलायुक्त डॉ. अजय शंकर पाण्डेय ने शुक्रवार को संस्कृत भाषा में दो जजमेंट पारित किए।

संस्कृत भाषा के प्रयोग के दूसरे चरण की नींव ऐसे पड़ी
मंडलायुक्त ने कहा कि संस्कृत भाषा में 2 फैसले देने के बाद देश व प्रदेश भर से पॉजिटिव संदेश आ रहे हैं। झांसी व कमिश्नरी बार ने फैसले की सराहना की थी। इस अवसर पर औपचारिक बातचीत में मंडलायुक्त ने जब पूछा कि क्या कोई ऐसा अधिवक्ता है, जिसने कभी संस्कृत न पढ़ी हो? जानकारी करने पर पता लगा कि सभी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा में कहीं-न-कहीं संस्कृत अवश्य पढ़ी है।

वकीलों ने भी मंडलायुक्त से संस्कृत भाषा के अध्ययन के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि स्नातक तक संस्कृत भाषा को एक विषय के रूप में पढ़ा है। बातचीत से पता चला कि हर व्यक्ति शुरूआत में संस्कृत पढ़ता है। इसी को आधार मानकर उन्होंने हर अपील में संस्कृत की दो पंक्तियां लिखने के प्रस्ताव को वकीलों के समक्ष रखा। जिसे वकीलों ने विचार-विमर्श के बाद स्वीकार कर लिया।

झांसी मंडलायुक्त न्यायालय ने संस्कृत में लिखे जजमेंट:1911 में बनी थी कमिश्नरी, 110 साल में ऐसा जजमेंट पहली बार

संस्कृत भाषा में पारित आदेश

पहला :अतः अपीलस्य (प्रत्यावेदनस्य) ग्राहयता स्तरे एवं अवर न्यायालयेन 20-10-2021 इति दिनांके निगर्तम् आदेशं निरस्तीकृत्य प्रकरणमिदम् एतेन निर्देशन सह प्रतिपे्रषितम् क्रियते यद् अपीलकतार् 29-01-2020 इति दिनांके प्रस्तुते रिस्टोरेशन प्राथर्ना- पत्र विषये उभयोःपक्षयोः पुनः श्रवणाम् अवसरं विधाय गुणदोषयोश्च विचायर् एकमासाभ्यन्तरम् निस्तारणं करणीयम् वाद प्रतिवाद पत्रावली च कायार्लये सुरक्षिता करणीया।

दूसरा : एतासु परिस्थितिषु अवर न्यायालयेन 06-9-2021 दिनांकेः निगर्ते आदेशाविषये प्रतिक्षेपाय (हस्तक्षेपाय) औचित्य भवित्येव। अतः अस्य प्रतिवेदनस्य (अपीलस्य) विलम्बतः प्रस्तुतिविषये ‘‘विलम्बं सम्मषर्यन्’’ अपीलस्य (प्रतिवेदनस्य) ग्राह्यतास्थितौः एव स्वीकृत्य झांसी स्थावर न्यायालयेन/जनपद मजिसट्रेट महोदयेन 06-9-2021 दिनांकः निर्गत: आदेशः निरस्तीक्रियते। अपीलकतुर्ः रिवाल्वर शस्त्र सम्बन्धित मनुज्ञापत्रम्-‘‘7698’’ सम्प्रवतिर्तं क्रियते।

यदि आगामिनि समये कदापि शस्त्रानुज्ञाश्रयिजनस्य शस्त्रस्य दुरूपयोगे शस्त्रानुज्ञानबन्धविषये वा समुल्लंघमस्य परिस्थितिः समायादि तदा अवर न्यायालयात्, पुलिस विभागात् मजिस्ट्रेट महोदयात् सारगभिर्तां तथ्ययुक्तामाख्याम् (रिपोटर्) च सम्प्राप्य गुणावगुणविषये क्रियान्वयम् विधातं सक्षमः स्वतन्त्राश्च भविष्यन्ति। शस़्त्रस्य अनुज्ञानुबन्धस्य निरन्तरम् निरीक्षणं-परीक्षणम् च भवेदिति निदेर्शयन् अस्य आदेशस्य प्रतिकृतिः (प्रतिलिपिः) अवरन्यायालयाय प्रत्यावतर्नीया। वादस्य आवश्यकी कायर्वाही अपील पत्रावली (प्रतिवेदन पत्रावली) अभिलेखागारे सुरक्षिता भवितत्या/काणीया।

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