झांसी स्टेशन का नाम बदलने पर एतराज:महिलाएं बोली- झांसी की रानी से हमारी पहचान, नाम जोड़ने के लिए ज्ञापन दिया

झांसी6 महीने पहले
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर गृहमंत्री के नाम एडीएम को ज्ञापन सौंपा।

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले झांसी स्टेशन का नाम बदलकर वीरांगना लक्ष्मीबाई करने पर सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद सड़कों पर पहुंच गया। शुक्रवार सुबह उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और केंद्रीय गृहमंत्री के नाम एडीएम को ज्ञापन सौंपा। इसमें स्टेशन का नाम में झांसी शब्द जोड़ने की मांग की गई है।
इससे पहले हम झांसी का नाम नहीं खोने देंगे विषय पर व्यापार मंडल की आकस्मिक बैठक भी हुई। जिसमें झांसी स्टेशन के नाम को बदलकर वीरांगना लक्ष्मीबाई किए जाने पर खुशी के साथ अफसोस भी जताया गया। पदाधिकारियों ने कहा कि जब महरानी लक्ष्मीबाई ब्याह कर नगर में आई तो उस समय इस नगर का नाम झांसी था। झांसी हमारे लिए अपने आप में ही गौरव पूर्ण नाम है। जितनी सम्मानीय महारानी लक्ष्मीबाई हैं, उतना ही प्यार हम अपनी झांसी से भी करते हैं। इसलिए झांसी का नाम न हटाया जाए। स्टेशन के नाम झांसी वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई या वीरांगना झांसी रानी लक्ष्मीबाई किया जाए।
मेरी झांसी मेरी शान
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष उमेश गुप्ता ने कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई पूरे विश्व में झांसी की रानी के नाम से प्रसिद्ध है। ऐसे में झांसी नाम हटाना गलत है। हम लोग चाहते हैं कि 133 साल पुराना झांसी स्टेशन में झांसी का नाम जोड़ा जाए। मेरी झांसी मेरी शान यह हमारा नारा रहा है।
महिलाओं की पहचान खत्म हो जाएगी
जिला उद्योग महिला व्यापार मंडल की जिलाध्यक्ष कंचन आहूजा ने कहा कि स्टेशन से झांसी शब्द को हटा दिया गया है। झांसी हमारी शान है। रानी लक्ष्मीबाई भी इस शब्द को लेकर चलती थीं कि मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी। आज लाइन से झांसी को हटा दिया। यह हम लोगों के लिए अफसोस का विषय है।
वीरांगना लक्ष्मीबाई के साथ झांसी शब्द जोड़ा जाए। महिलाएं कही जाती हैं तो झांसी की रानी के नाम से संबोधित किया जाता है। ऐसे में हमारी पहचान खत्म हो जाएगी। उपाध्यक्ष ऊषा सिंह ने कहा कि झांसी हमारी आन-बान-शान है। मैं अभी गृहमंत्री से आग्रह करती हूं कि वे वीरांगना लक्ष्मीबाई के साथ झांसी शब्द को भी जोड़े। जिससे पहचान बनी रहे।