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झांसी में कांग्रेस की मैराथन में योगी-मोदी के नारे गूंजे:मंच पर बैठे नेताओं से छात्राएं बोलीं- चीटिंग हुई, दो घंटे किया बवाल

झांसी7 महीने पहले
कांग्रेस की मैराथन के बाद मंच के सामने आकर छात्राओं ने खूब नारेबाजी की।

झांसी में रविवार सुबह कांग्रेस की रन फॉर मणिकर्णिका मैराथन में जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ। मैराथन में भाग लेने वाली सैकड़ों प्रतिभागी छात्राओं ने मंच के सामने आकर 'चीटिंग हुई-चीटिंग हुई' के नारे लगाए। जब सुनवाई नहीं हुई, तो करीब एक घंटे बाद छात्राओं ने योगी-मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिए। पूरी मैराथन में अव्यवस्था हावी रही। बताते चलें कि कांग्रेस 'लड़की हूं लड़ सकती हूं' थीम पर करीब पांच किलोमीटर की रन फॉर मणिकर्णिका मैराथन करा रही थी।

मैराथन राजा गंगाधर राव कला मंच से शुरू होनी थी। अव्यवस्थाओं का आलम यह रहा कि बिना हरी झंडी दिखाए ही छात्राएं दौड़ने लगीं। उन्हें करीब 400 मीटर दूर से लौटाया गया। दूसरी बार भी बिना हरी झंडी के छात्राओं ने मैराथन दौड़ शुरू कर दी। इसके बाद विरोध होने लगा।

मैराथन में पहला स्थान प्राप्त करने वाली छाया ठाकुर को स्कूटी सौंपते हुए।
मैराथन में पहला स्थान प्राप्त करने वाली छाया ठाकुर को स्कूटी सौंपते हुए।

कार-स्कूटी पर बैठाकर मैराथन कराने का आरोप

इलाइट चौराहा, जेल चौराहा, झोकनबाग, खंडेराव गेट, मिनरबां, पंचकुइयां होते हुए मैराथन वापस राजा गंगाधर राव कला मंच पर समाप्त हुई। मैराथन में विजेता को स्कूटी, द्वितीय स्थान पाने वाली प्रतिभागियों को 25 स्मार्ट फोन, तृतीय स्थान पाने वाली प्रतिभागियों को 100 फिटनेस हैंड बैंड दिए जाने थे। कार्यक्रम शुरू होते ही मंच के सामने सैकड़ों छात्राएं पहुंच गईं और चीटिंग हुई के नारे लगाने लगी।
छात्राओं का आरोप था कि मैराथन में गलत तरीके से छात्राओं को विजेता बनाया गया। कार्यक्रम संयोजक एवं यूपी कांग्रेस कमेटी के महासचिव ने मंच से कहा कि हमारे पास वीडियो मौजूद है। हम स्क्रीन पर वीडियो चला देते हैं, इससे साफ हो जाएगा कि कौन विजेता रहा है। तब भी छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन बंद नहीं किया। छात्राओं के भारी विरोध के बाद नेता धीरे-धीरे खिसक गए और छात्राएं प्रदर्शन करती रहीं।
मेडल तक नहीं बांट पाए
विरोध के दौरान छात्राएं मंच पर पहुंच गईं और जमकर हंगामा किया। जल्दबाजी में मैराथन की विजेता छाया ठाकुर को स्कूटी और द्वितीय विजेता रही प्रतिभागियों को स्मार्ट फोन बांटे गए। एक हजार लोगों को मेडल व सर्टिफिकेट दिए जाने थे। अव्यवस्था के कारण मेडल नहीं बांटे जा सके। कांग्रेस कार्यकर्ता पूरे ग्राउंड में मेडल लेकर इधर-उधर घूमते रहे। तब छात्राओं ने मेडल लूट लिए। कई लोगों को बिना दौड़े ही मेडल मिल गए, जबकि कई प्रतिभागियों ने कार-स्कूटी पर बैठाकर मैराथन पूरी की है।
खूब धक्का-मुक्की हुई
मैराथन को लेकर कांग्रेस की तरफ से वॉलंटियर लगाए गए थे, लेकिन छात्राओं की संख्या ज्यादा होने के कारण अवस्था हा़े गई। छात्राओं के झुंड में खूब धक्का-मुक्की हुई और कई बार मैदान में ही छात्राएं एकदम धक्का आने से गिरकर चोटिल भी हो गईं। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि काेई चीटिंग नहीं हुई है। हमने हर जगह चेक प्वाइंट बनाए थे। बहुत भारी सैलाब था, जिसकी वजह से थोड़ी अव्यवस्था हुई।

छाया ठाकुर रही पहली विजेता
पलिंदा गांव की छाया ठाकुर (19) पुत्री रज्जन संह मैराथन में पहली विजेता रही और उन्हें इनाम में स्कूटी मिली। छाया ने बताया कि वह एक साल से दौड़ रही हैं। पांच मैराथन में भाग ले चुकी हैं। पिछले साल निवाड़ी में हुई मैराथन में भी वह पहले स्थान पर आई थीं। वह रोजाना 8 किलोमीटर दौड़ लगाती हैं। उनके पिता किसान हैं।

लखनऊ में मैराथन को नहीं मिली इजाजत

उधर, प्रशासन की अनुमति नहीं मिलने की वजह से लखनऊ में होने वाली कांग्रेस की मैराथन नहीं हो पाई। इससे बेखबर प्रदेश भर से सैकड़ों लड़कियां और महिलाएं तय कार्यक्रम के मुताबिक रविवार सुबह 1090 चौराहे पहुंच गईं थीं। कांग्रेस का कहना है कि इसी भीड़ की ताकत से डरकर सरकार ने मैराथन की परमिशन नहीं दी।